क्या गोवा में 56वें आईएफएफआई का समापन सेलेब्स के लिए सिनेमा की नई दिशा है?
सारांश
Key Takeaways
- गोवा में 56वें आईएफएफआई का समापन हुआ।
- ऋषभ शेट्टी और मधु भंडारकर ने अपने अनुभव साझा किए।
- फिल्म निर्माताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत।
- सिनेमा के कंटेंट का महत्व।
- नई तकनीक का स्वीकार करना आवश्यक।
मुंबई, 28 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। गोवा में संपन्न हुए 56वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव इंडिया का समापन शुक्रवार को हुआ। इस कार्यक्रम में कई प्रमुख कलाकारों और प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया। इस मौके पर कांतारा के अभिनेता ऋषभ शेट्टी और फिल्म निर्देशक मधु भंडारकर ने राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत की।
ऋषभ शेट्टी ने कहा, "हम सभी मिलकर यहां सिनेमा का जश्न मना रहे हैं, जहां भारत की फिल्म इंडस्ट्री का समागम हुआ है। इससे बड़ी खुशी की बात और कुछ नहीं हो सकती। इस आयोजन ने फिल्म निर्माताओं को बड़ी प्रेरणा दी है। मैं गोवा सरकार और आयोजकों का दिल से धन्यवाद करता हूं।"
मधुर भंडारकर ने कहा कि इस बार नई फिल्मों का प्रीमियर और क्षेत्रीय सिनेमा को एक नया मौका मिला है। यहां पर आकर ऐसा लगता है कि सम्पूर्ण भारत के फिल्म निर्माता, अभिनेता और निर्देशक एक छत के नीचे मिलते हैं। यह अनुभव हमारे लिए बहुत मूल्यवान है।
आईएफएफआई के लाभों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "मेरी कई फिल्में पैनोरमा सेक्शन में दिखाई गई हैं। यहां आकर लोगों से मिलना और बहुत कुछ सीखना मुझे मिला है। कई निर्माता कम बजट में भी बेहतरीन फिल्में बनाने में सक्षम हैं।"
फिल्मों के चुनाव की प्रक्रिया पर उन्होंने कहा, "फिल्मों के चयन में कई मानदंड होते हैं। पूरी जूरी मिलकर निर्णय करती है। अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के लिए विदेशी जूरी सदस्य भी शामिल होते हैं। सभी क्षेत्रों के फिल्म निर्माताओं के साथ चर्चा के बाद तय किया जाता है कि कौन-सी फिल्में दिखाई जाएंगी।"
उन्होंने अंत में कहा कि आजकल चाहे कोई भी फिल्म हो, लेकिन कंटेंट का अच्छा होना अनिवार्य है, और अब एआई सिनेमा भी आ गया है, इसलिए हमें तकनीक का स्वीकार करना चाहिए।