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कीर्ति कुल्हारी की फिल्म 'किनारे' की स्क्रीनिंग DIFF में, बोलीं — 'यह मेरा पहला बच्चा है'

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कीर्ति कुल्हारी की फिल्म 'किनारे' की स्क्रीनिंग DIFF में, बोलीं — 'यह मेरा पहला बच्चा है'

सारांश

कीर्ति कुल्हारी ने निर्माता की भूमिका में कदम रखते हुए 'किनारे' बनाई — एक ऐसी फिल्म जो ईरानी सिनेमा की संवेदनशीलता से प्रेरित है और परिवार के अनकहे रहस्यों को बड़े करीने से उजागर करती है। DIFF में स्क्रीनिंग के साथ यह स्वतंत्र सिनेमा की एक नई आवाज़ बनकर उभर रही है।

मुख्य बातें

कीर्ति कुल्हारी की निर्माता के रूप में पहली फीचर फिल्म 'किनारे' की स्क्रीनिंग धर्मशाला इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (DIFF) में होगी।
फिल्म दिल्ली के पास एक गाँव की पृष्ठभूमि पर आधारित है — एक महिला की जिंदगी में 15 साल बाद चचेरे भाई की वापसी और परिवार के दफन रहस्यों की कहानी।
कीर्ति ने फिल्म को अपने बैनर किंत्सुकुरोई फिल्म्स के तहत स्वतंत्र रूप से निर्मित किया।
फिल्म का निर्देशन कादरी ब्रदर्स (अकबर कादरी और आजम कादरी) ने किया है; सह-निर्माता अभिषेक कोका और मानसी गुप्ते हैं।
अभिनेता राजीव सिद्धार्थ ने फिल्म में कीर्ति के साथ मुख्य भूमिका निभाई है।

अभिनेत्री और निर्माता कीर्ति कुल्हारी की आने वाली फिल्म 'किनारे' की स्क्रीनिंग धर्मशाला इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (DIFF) में होने जा रही है। कीर्ति ने इस फिल्म को बतौर निर्माता अपनी पहली परियोजना बताया और कहा कि कहानी की सादगी तथा बारीकियों को दर्शाने के अनूठे अंदाज ने उन्हें इसे बनाने के लिए प्रेरित किया। फिल्म दिल्ली के पास बसे एक गाँव की पृष्ठभूमि पर आधारित है और परिवार, रिश्तों तथा अनकहे रहस्यों की भावनात्मक कहानी कहती है।

फिल्म की कहानी और कीर्ति का किरदार

फिल्म में कीर्ति कुल्हारी अमीना का किरदार निभा रही हैं, जो अकेले रहती हैं और अपना अधिकांश समय बुज़ुर्ग माता-पिता की देखभाल में बिताती हैं। कहानी में तब नाटकीय मोड़ आता है, जब 15 साल बाद उनका चचेरा भाई आजम अचानक लौट आता है। उसकी वापसी परिवार के अतीत से जुड़े उन रहस्यों की परतें खोलती है, जिन्होंने कभी घर के रिश्तों में गहरी दरार डाल दी थी।

कीर्ति ने बताया क्यों चुनी यह कहानी

कीर्ति ने फिल्म के बारे में बात करते हुए कहा, 'किनारे' बतौर निर्माता उनका 'पहला बच्चा' है और यह हमेशा उनके लिए खास रहेगी। उन्होंने कहा, 'यह एक साधारण, दिल को छू लेने वाली और बारीकियों के साथ कही गई फिल्म है। मुझे ये सारी खूबियाँ ईरानी फिल्मों में देखने को मिलती हैं, जिन्हें मैं हमेशा से पसंद करती रही हूँ। इसलिए जब मेरे पास ऐसी कहानी आई, तो मैंने तय कर लिया कि मैं इसे ज़रूर बनाऊंगी।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे फिल्म को स्वतंत्र रूप से बनाना चाहती थीं, ताकि उनकी और उनकी टीम की मूल परिकल्पना बिना किसी समझौते के पर्दे पर उतर सके। उन्होंने कहा, 'फिल्म से जुड़े सभी लोगों ने इसकी कहानी पर भरोसा किया और सिनेमा के प्रति अपने प्यार की वजह से इसका हिस्सा बने।'

राजीव सिद्धार्थ की प्रतिक्रिया

फिल्म में कीर्ति के साथ मुख्य भूमिका निभा रहे अभिनेता राजीव सिद्धार्थ ने भी 'किनारे' की पटकथा की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, 'हर अभिनेता ऐसी स्क्रिप्ट की तलाश में रहता है जिसमें सिर्फ लिखे गए शब्द ही मायने न रखें, बल्कि उन शब्दों के बीच छिपी भावनाओं को समझने और उन्हें पर्दे पर उतारने का मौका भी मिले — 'किनारे' में मुझे एक अभिनेता के तौर पर बिल्कुल वैसा ही अनुभव हुआ।'

राजीव ने यह भी कहा कि फिल्म का विषय सार्वभौमिक है, जिससे हर दर्शक जुड़ाव महसूस कर सकता है, और उन्हें उम्मीद है कि यह कहानी दर्शकों के भीतर कुछ न कुछ बदलाव ज़रूर लाएगी।

निर्माण और बैनर

फिल्म की पटकथा और निर्देशन कादरी ब्रदर्स — अकबर कादरी और आजम कादरी — की जोड़ी ने किया है। कीर्ति ने इसे अपने प्रोडक्शन बैनर किंत्सुकुरोई फिल्म्स के तहत निर्मित किया है, जबकि अभिषेक कोका और मानसी गुप्ते सह-निर्माता हैं। यह कीर्ति की बतौर निर्माता पहली फीचर फिल्म है, जो उनके करियर में एक नया अध्याय जोड़ती है।

DIFF और आगे का सफर

गौरतलब है कि धर्मशाला इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल स्वतंत्र सिनेमा के लिए भारत के प्रमुख मंचों में से एक माना जाता है। 'किनारे' जैसी भावनात्मक और कम बजट की स्वतंत्र फिल्मों के लिए यह स्क्रीनिंग आलोचकों और सिनेप्रेमियों तक पहुँचने का महत्वपूर्ण अवसर है। अब देखना यह होगा कि DIFF की सफलता के बाद 'किनारे' की व्यापक रिलीज़ की दिशा क्या तय होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि हिंदी सिनेमा में उस बढ़ती प्रवृत्ति का हिस्सा है जहाँ अभिनेत्रियाँ खुद कहानियाँ चुन रही हैं और उन्हें परदे पर उतार रही हैं। 'किनारे' का DIFF जैसे फेस्टिवल से शुरुआत करना बताता है कि यह फिल्म मुख्यधारा के मसाला मनोरंजन से अलग, एक नपे-तुले दर्शक वर्ग को ध्यान में रखकर बनाई गई है। सवाल यह है कि फेस्टिवल सर्किट की सफलता के बाद क्या यह व्यापक रिलीज़ तक पहुँच पाएगी — और क्या स्वतंत्र हिंदी सिनेमा के लिए थिएटर में पर्याप्त जगह है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कीर्ति कुल्हारी की फिल्म 'किनारे' किस बारे में है?
'किनारे' दिल्ली के पास एक गाँव में रहने वाली महिला अमीना की कहानी है, जिसकी जिंदगी में 15 साल बाद उसके चचेरे भाई की वापसी परिवार के दबे हुए रहस्यों को सामने ला देती है। फिल्म परिवार, रिश्तों और अनकहे राजों को संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करती है।
'किनारे' की स्क्रीनिंग कहाँ होगी?
फिल्म की स्क्रीनिंग धर्मशाला इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (DIFF) में होगी, जो स्वतंत्र सिनेमा के लिए भारत के प्रमुख फेस्टिवल मंचों में से एक है।
कीर्ति कुल्हारी ने यह फिल्म क्यों बनाई?
कीर्ति ने कहा कि कहानी की सादगी और बारीकियों ने उन्हें प्रभावित किया — खासकर ईरानी सिनेमा जैसी संवेदनशीलता से। उन्होंने इसे स्वतंत्र रूप से अपने बैनर किंत्सुकुरोई फिल्म्स के तहत निर्मित किया ताकि मूल परिकल्पना से कोई समझौता न हो।
'किनारे' में कौन-कौन हैं?
फिल्म में कीर्ति कुल्हारी और राजीव सिद्धार्थ मुख्य भूमिकाओं में हैं। इसका निर्देशन कादरी ब्रदर्स — अकबर कादरी और आजम कादरी — ने किया है, जबकि अभिषेक कोका और मानसी गुप्ते सह-निर्माता हैं।
क्या 'किनारे' कीर्ति कुल्हारी की पहली प्रोडक्शन है?
हाँ, 'किनारे' कीर्ति कुल्हारी की बतौर निर्माता पहली फीचर फिल्म है। उन्होंने इसे अपने प्रोडक्शन बैनर किंत्सुकुरोई फिल्म्स के तहत बनाया है।
राष्ट्र प्रेस
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