क्या फिल्मों का भाषा से कोई लेना-देना नहीं है? नॉर्थ-साउथ की दूरी मीडिया कैंपेन का परिणाम है?

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क्या फिल्मों का भाषा से कोई लेना-देना नहीं है? नॉर्थ-साउथ की दूरी मीडिया कैंपेन का परिणाम है?

सारांश

फिल्म निर्माता विवेक रंजन अग्निहोत्री ने सिनेमा में नॉर्थ-साउथ की दूरी को खारिज किया। उनका मानना है कि फिल्मों का भाषा से कोई लेना-देना नहीं है। क्या यह सिर्फ एक मीडिया कैंपेन का परिणाम है?

Key Takeaways

  • फिल्में केवल अच्छी होनी चाहिए.
  • भाषा से कोई लेना-देना नहीं है.
  • नॉर्थ-साउथ की दूरी एक मीडिया कैंपेन का परिणाम है.
  • अच्छी कहानी कहीं से भी आ सकती है.
  • फिल्में लोगों को जोड़ने का काम करती हैं.

मुंबई, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान समय में, नॉर्थ के दर्शक साउथ की फिल्में और साउथ के दर्शक नॉर्थ की कहानियों का आनंद ले रहे हैं। बावजूद इसके, सिनेमा पर भाषा और क्षेत्र की सीमाओं का आरोप लगना जारी है। इस संदर्भ में, फिल्म निर्माता और निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री ने इस दूरी को खारिज करते हुए कहा कि फिल्में केवल अच्छी होनी चाहिए, इनका भाषा से कोई संबंध नहीं है।

हाल के वर्षों में, कई साउथ की फिल्में हिंदी में डब या रीमेक होकर नॉर्थ में सफल रही हैं। राष्ट्र प्रेस से बातचीत में उन्होंने बताया कि फिल्मों का भाषा से कोई संबंध नहीं होता और एक अच्छी फिल्म हर जगह सफल हो सकती है। विवेक ने इसे कुछ मीडिया और अभियानों का परिणाम बताया, जिसने नॉर्थ-साउथ के बीच झगड़े को बढ़ाया।

विवेक रंजन ने कहा, "मेरे दिल में तो साउथ, ईस्ट, वेस्ट, नॉर्थ की कोई दूरी कभी नहीं रही। फिल्म, फिल्म होती है। हम हॉलीवुड और कोरियन फिल्में देखते हैं। अच्छी फिल्म तो हर कोई देखता है। फिल्म का भाषा से इतना लेना-देना नहीं है। मराठी से लेकर मलयालम फिल्में भी देखते हैं। साउथ और नॉर्थ के बीच जो दूरी दिखाई जाती है, वह एक तरह की मीडिया ओरिएंटेड कैंपेन रही। मैं इससे पूरी तरह असहमत हूं।"

उन्होंने आगे बताया, "अगर साउथ की फिल्में इतनी खास हैं कि नॉर्थ में नहीं चल सकतीं, तो फिर आधे से ज्यादा हिंदी फिल्में साउथ की फिल्मों को अडैप्ट करके ही क्यों बनती हैं? यह दिखाता है कि अच्छी कहानी कहीं से भी हो सकती है।"

विवेक रंजन ने अपनी हालिया रिलीज फिल्म 'द बंगाल फाइल्स' का उदाहरण देते हुए कहा, "हमें नॉर्थ-साउथ, ईस्ट-वेस्ट की इन दूरियों को खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए। इसलिए मैं हमेशा 'इंडियन सिनेमा' कहता हूं। मैं अपनी फिल्मों को कभी नॉर्थ या साउथ के नजरिए से नहीं देखता। मैं पूरे भारत के लिए फिल्में बनाता हूं। मेरी फिल्म 'द बंगाल फाइल्स' भारत के विभाजन पर आधारित है। पार्टिशन नॉर्थ और साउथ का नहीं था, यह तो पूरे भारत का था। इसलिए यह एक भारत की फिल्म है।"

विवेक रंजन ने दर्शकों और फिल्मकारों से अपील की, "बिना वजह नॉर्थ-साउथ का झगड़ा न बढ़ाया जाए, जो लोग जानते हैं, उन्हें इसे खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए। फिल्में तो लोगों को जोड़ने का काम करती हैं, तोड़ने का नहीं। मेरा स्पष्ट मानना है कि अच्छी कहानी, अच्छा निर्देशन और सच्ची भावना वाली फिल्म किसी भी भाषा या क्षेत्र की सीमा में नहीं बंधती।

Point of View

बल्कि यह दर्शाता है कि कला किसी भी प्रकार की सीमाओं से परे होती है। उनका विचार है कि अच्छी फिल्में एकता का प्रतीक होती हैं, और हमें इसे बढ़ावा देना चाहिए।
NationPress
04/02/2026

Frequently Asked Questions

क्या फिल्मों का भाषा से कोई संबंध होता है?
नहीं, विवेक रंजन अग्निहोत्री के अनुसार, फिल्में केवल अच्छी होनी चाहिए, उनकी भाषा से कोई लेना-देना नहीं है।
क्या नॉर्थ-साउथ के बीच कोई वास्तविक दूरी है?
विवेक का मानना है कि यह दूरी एक तरह की मीडिया कैंपेन का परिणाम है, और इसे खत्म करना चाहिए।
क्या अच्छी फिल्में हर जगह सफल होती हैं?
हां, विवेक के अनुसार, अच्छी फिल्में हर जगह दर्शकों का दिल जीत सकती हैं।
क्या 'द बंगाल फाइल्स' भारत की फिल्म है?
'द बंगाल फाइल्स' भारत के विभाजन पर आधारित है, इसलिए इसे भारत की फिल्म माना जाना चाहिए।
फिल्में लोगों को कैसे जोड़ सकती हैं?
फिल्में कला का एक माध्यम हैं जो लोगों को जोड़ने का काम करती हैं, न कि तोड़ने का।
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