क्या मैंने भगवान विष्णु के दसवें अवतार कल्कि का प्रशिक्षण और दर्शन देखा है? : ममता कुलकर्णी
सारांश
Key Takeaways
- गोमाता का महत्व सभी धर्मों में है।
- फिल्म 'गोदान' गोमाता के सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व को उजागर करती है।
- गाय की हत्या सभी धर्मों में वर्जित है।
- ममता कुलकर्णी ने आध्यात्मिक अनुभव साझा किए हैं।
- समाज को गायों की रक्षा करनी चाहिए।
मुंबई, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में गोमाता की महत्वता को उजागर करने के लिए निर्देशक अमित प्रजापति की फिल्म 'गोदान' जल्द ही प्रदर्शित होने वाली है। यह फिल्म गोमाता के सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और सामाजिक मूल्य को दर्शाती है, जिसमें पंचगव्य की उपयोगिता पर खास ध्यान दिया गया है।
पूर्व अभिनेत्री और साध्वी ममता कुलकर्णी ने इस फिल्म का समर्थन किया है। उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए फिल्म की प्रशंसा की और सभी देशवासियों को संदेश दिया कि यह फिल्म हर किसी को देखनी चाहिए, चाहे वह किसी भी धर्म के हों।
ममता ने कहा, "यह बहुत खुशी की बात है कि कामधेनु इंटरनेशनल प्रोडक्शन ने 'गोदान' नाम की एक प्रेरणादायक फिल्म बनाई है, जो हमारी भारतीय संस्कृति, विज्ञान और संवेदनशीलता को दिखाती है। इसे हर भारतीय को जरूर देखना चाहिए। क्योंकि गाय का जिक्र केवल हिंदू धर्म, वेदों और पुराणों में ही नहीं है, बल्कि बाइबिल और कुरान में भी है। मैंने दोनों ही पढ़ी हैं।"
उन्होंने कहा, "गाय की हत्या न तो बाइबिल में सही ठहराई गई है, और न ही कुरान में। गाय सभी धर्मों में मां के समान है और उसकी हत्या वर्जित होनी चाहिए।"
ममता ने अपने आध्यात्मिक अनुभवों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 25 साल के ध्यान और तपस्या के बाद वह समाधि की अवस्था तक पहुंच चुकी हैं। उन्होंने कहा, "मैंने भगवान विष्णु के दसवें अवतार कल्कि का प्रशिक्षण और दर्शन देखा है और अब ऐसा समय आने वाला है, जब गाय दूध देना बंद कर देगी। जैसे आज हम पानी बर्बाद कर रहे हैं, वैसे ही गौ-माता के साथ भी हो रहा है। जो लोग अभी भी जागरूक नहीं हुए हैं, उनके लिए बहुत देर हो जाएगी।"
उन्होंने कहा, "यह फिल्म आपको सोचने पर मजबूर करेगी। गाय मां है, जो दूध देती है। किसी भी धर्म में मां को ऊंचा दर्जा दिया गया है। इस्लाम में भी अल्लाह से पूछा गया कि आपके बाद किसे महत्व दें, तो तीन बार मां का जिक्र किया गया।"
उन्होंने आगे कहा कि हम मानसिक रूप से विकृत हो गए हैं। उन्होंने कहा, "श्रीमद्भगवद्गीता में लिखा है कि जैसा हम करेंगे, वैसा ही पाएंगे। आज युद्ध, भूखमरी सब कर्म का फल है। लोगों को दस बार सोचना चाहिए कि गाय को नुकसान न पहुंचाएं।"