क्या ओम पुरी लोको पायलट बनना चाहते थे, लेकिन किस्मत ने उन्हें नसीरुद्दीन का 'ऋणी' बना दिया?
सारांश
Key Takeaways
- ओम पुरी का संघर्ष और सफलता प्रेरणादायक है।
- अभिनय की दुनिया में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
- युवाओं के लिए ओम पुरी एक प्रेरणा स्रोत रहे हैं।
- उनकी दोस्ती नसीरुद्दीन शाह के साथ जीवन के महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना उनकी मेहनत का फल है।
मुंबई, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिवंगत अभिनेता ओम पुरी की जीवन यात्रा संघर्ष, मेहनत और सफलता का अद्वितीय उदाहरण है। बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी शानदार अदाकारी से पहचान बनाने वाले इस अभिनेता का बचपन बेहद गरीबी में बीता। सिर्फ छह साल की उम्र में, उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिए चाय की दुकान पर बर्तन धोने का कार्य शुरू किया।
बचपन से लोको पायलट बनने का सपना देखने वाले ओम पुरी ने कभी नहीं सोचा था कि वह एक दिन अभिनय की दुनिया का इतना चमकता सितारा बनेंगे। ओम पुरी एक ऐसा नाम है, जिसने कठिनाईयों का सामना करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश की। हालांकि, वह अभिनय की दुनिया में आने का श्रेय नसीरुद्दीन शाह को देते थे।
ओम पुरी का जन्म 18 अक्टूबर 1950 को पंजाब के पटियाला जिले में हुआ। उनका बचपन आसान नहीं था। खेलने-कूदने की उम्र में उन्होंने परिवार का सहारा बनने के लिए चाय की दुकान पर काम किया। आर्थिक तंगी के कारण घर की स्थिति दिन-ब-दिन बुरी होती जा रही थी। ऐसे में उन्होंने बर्तन मांजकर परिवार का गुजारा किया। इसके अलावा, उन्होंने कई छोटे-मोटे काम भी किए।
ओम पुरी की दूसरी पत्नी नंदिता ने उनके जीवन पर 'अनलाइकली हीरो: ओम पुरी' नाम की किताब लिखी, जिसमें उनके जीवन के कई पहलुओं और किस्सों का उल्लेख है। उन्होंने बताया कि ओम पुरी का रेलवे से गहरा लगाव था। रात में अक्सर रेलवे यार्ड में जाकर किसी ट्रेन में सो जाते थे। बड़े होकर वह लोको पायलट बनना चाहते थे। लेकिन, किस्मत ने कुछ और लिखा था। अभिनय की दुनिया ने उन्हें अपनाया और विश्व स्तर पर पहचान दिलाई।
ऐसे हालात बने कि उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) में दाखिला लिया। यहां उनकी मुलाकात नसीरुद्दीन शाह से हुई। कोर्स के दौरान दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई। दोनों ने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में भी साथ पढ़ाई की। ओम पुरी नसीरुद्दीन शाह को अपने विशेष दोस्त मानते थे। अभिनेता अनुपम खेर के एक शो में उन्होंने कहा था, “मैं नसीर साहब का बहुत ऋणी हूं। मेरे मेंटर कोई भी रहे हों, लेकिन असली अभिनेता बनाने का श्रेय इन्हीं को जाता है। अगर ये मेरे साथ न होते तो शायद मैं यहां न होता। मैं हमेशा ऋणी रहूंगा।”
ओम पुरी ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत मराठी फिल्म 'घासीराम कोतवाल' से की थी। उन्हें हिंदी सिनेमा में पहचान 1980 की फिल्म 'आक्रोश' से मिली, जिसमें उनके अभिनय की काफी सराहना हुई और उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार मिला। इसके बाद उन्होंने 'अर्द्ध सत्य', 'आरोहण', 'जाने भी दो यारों' और 'मालामाल वीकली' जैसी यादगार फिल्मों में बेहतरीन प्रदर्शन किया।
उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी कि वे हर किरदार में जान डाल देते थे। ओम पुरी गंभीर और यथार्थवादी भूमिकाओं के लिए प्रसिद्ध थे, लेकिन उन्होंने कॉमेडी में भी कमाल किया। हॉलीवुड में भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई। 'सिटी ऑफ जॉय', 'वुल्फ' और 'द घोस्ट एंड द डार्कनेस' जैसी फिल्मों में काम करके उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया।
ओम पुरी ने दो शादियां कीं, पहली सीमा कपूर से और दूसरी पत्रकार नंदिता पुरी से। उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते और युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा स्रोत बने। उन्होंने कई नए अभिनेताओं को मार्गदर्शन दिया। 6 जनवरी 2017 को दिल का दौरा पड़ने से 66 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।