क्या नेताजी सुभाष चंद्र बोस की गाथा सिनेमा में अमर रहेगी?
सारांश
Key Takeaways
- पराक्रम दिवस हर साल 23 जनवरी को मनाया जाता है।
- नेताजी सुभाष चंद्र बोस की गाथा सिनेमा का एक महत्वपूर्ण विषय है।
- कई प्रमुख फिल्में और सीरीज उनके जीवन पर आधारित हैं।
- नेताजी की कहानी युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
- उनकी मृत्यु के रहस्य आज भी चर्चा का विषय हैं।
मुंबई, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रत्येक वर्ष 23 जनवरी को सम्पूर्ण देश महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाता है। भारत सरकार ने 2021 में इस दिन को आधिकारिक रूप से पराक्रम दिवस घोषित किया, ताकि नेताजी के अजेय साहस, अनुशासन और देश के प्रति उनके बलिदान को सम्मानित किया जा सके।
नेताजी का जीवन, उनके विचार और संघर्ष आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं, और यही कारण है कि सिनेमा और टेलीविजन में उनकी कहानी बार-बार उभरकर आई है।
1966 में रिलीज हुई बंगाली फिल्म 'सुभाष चंद्र' नेताजी के जीवन पर बनी पहली फिल्मों में से एक मानी जाती है। इस फिल्म का निर्देशन पीयूष बोस ने किया और इसमें समर कुमार ने सुभाष चंद्र बोस का किरदार निभाया। यह फिल्म उनके बचपन, शिक्षा, कॉलेज जीवन और भारतीय सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े अनुभवों को प्रदर्शित करती है। यह कहानी बताती है कि कैसे एक प्रतिभाशाली छात्र देश की स्वतंत्रता के लिए सब कुछ छोड़ने वाला क्रांतिकारी बना। उनकी प्रारंभिक जीवन को सरलता और भावनात्मकता के साथ प्रस्तुत किया गया है।
नेताजी पर बनी एक और प्रसिद्ध फिल्म 'नेताजी सुभाष चंद्र बोस: द फॉरगॉटन हीरो' है, जो 2004 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म का निर्देशन प्रसिद्ध फिल्मकार श्याम बेनेगल ने किया। फिल्म में सचिन खेडेकर ने नेताजी की भूमिका अदा की, जबकि दिव्या दत्ता भी महत्वपूर्ण किरदार में नजर आईं। कहानी 1941 से 1945 के उस समय पर केंद्रित है, जब नेताजी नजरबंदी से भागकर देश से बाहर गए, जर्मनी और जापान के साथ मिलकर आजाद हिंद फौज का गठन किया और ब्रिटिश शासन के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी। फिल्म में युद्ध, राजनीति और व्यक्तिगत संघर्ष को बहुत संवेदनशीलता के साथ दर्शाया गया है। इस फिल्म के लिए सचिन खेडेकर को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला और इसे कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में सराहा गया।
2017 में आई वेब सीरीज 'बोस: डेड/अलाइव' ने नेताजी की मृत्यु से जुड़े रहस्य को केंद्र में रखा। वास्तव में, 18 अगस्त 1945 को एक विमान दुर्घटना में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु हो गई थी, लेकिन इस घटना को लेकर आज भी प्रश्न उठते हैं। एकता कपूर द्वारा निर्मित इस सीरीज का निर्देशन पुलकित ने किया और इसमें राजकुमार राव ने नेताजी का किरदार निभाया। यह सीरीज लेखक अनुज धर की किताब 'इंडियाज बिगेस्ट कवर-अप' पर आधारित थी। कहानी इस सवाल को उठाती है कि क्या वास्तव में ताइवान विमान दुर्घटना में नेताजी की मृत्यु हुई थी, या फिर सच कुछ और है। इस सीरीज में इतिहास, जांच और कल्पना का ऐसा अद्भुत समावेश है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है।
2019 में प्रसारित बंगाली टीवी सीरीज 'नेताजी' भी उनके प्रारंभिक जीवन पर आधारित थी। इस सीरीज में अभिषेक बोस ने नेताजी का किरदार निभाया और इसे जी बांग्ला चैनल पर प्रसारित किया गया। कहानी कटक और कोलकाता के उन दिनों को प्रदर्शित करती है, जब सुभाष चंद्र बोस के मन में देशभक्ति की चिंगारी प्रज्वलित हुई और वे एक साधारण छात्र से असाधारण नेता बने। यह सीरीज विशेष रूप से युवाओं और बच्चों को ध्यान में रखकर बनाई गई थी, ताकि वे सरल भाषा में नेताजी की कहानी समझ सकें।
इसी साल रिलीज हुई बंगाली फिल्म 'गुमनामी' ने नेताजी के जीवन के सबसे रहस्यमय पहलू को छुआ। फिल्म का निर्देशन श्रीजीत मुखर्जी ने किया और इसमें प्रोसेनजीत चटर्जी ने नेताजी का किरदार निभाया। फिल्म में न्यायमूर्ति मुखर्जी आयोग की सुनवाई और उससे जुड़े सवालों को भावनात्मक और रहस्यमय अंदाज में प्रस्तुत किया गया है।