23 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राम गोपाल वर्मा का टाइगर श्रॉफ फायरिंग पर तंज: 'शूटर्स को फिल्म में चाय वाले का रोल भी नहीं मिलता'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राम गोपाल वर्मा का टाइगर श्रॉफ फायरिंग पर तंज: 'शूटर्स को फिल्म में चाय वाले का रोल भी नहीं मिलता'

सारांश

राम गोपाल वर्मा का अंदाज़ हमेशा की तरह बेबाक रहा — टाइगर श्रॉफ फायरिंग के कथित शूटरों पर तंज कसते हुए उन्होंने बॉलीवुड और असल ज़िंदगी के बीच की खाई को उजागर किया। उनकी 'चाय वाले का रोल भी नहीं' वाली टिप्पणी ने सोशल मीडिया पर एक अलग बहस छेड़ दी।

मुख्य बातें

राम गोपाल वर्मा ने 23 अक्टूबर को एक्स पर पोस्ट कर टाइगर श्रॉफ फायरिंग के कथित शूटरों पर टिप्पणी की।
वर्मा के अनुसार, आरोपियों को किसी फिल्म में विलेन के अड्डे पर चाय लाने वाले का छोटा किरदार भी नहीं मिलता।
उन्होंने दाऊद इब्राहिम का उदाहरण देते हुए असली और फिल्मी अपराधियों की दिखावट का फर्क बताया।
इससे पहले वर्मा ने इस वारदात के पीछे 'अहंकार और प्रतिष्ठा' को कारण बताया था, न कि वसूली या बदले को।
फायरिंग 19 अक्टूबर को मुंबई के जुहू में हुई थी; टाइगर श्रॉफ सुरक्षित रहे, चालक और एक ऑटो रिक्शा चालक घायल हुए।

फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा ने 23 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के कथित आरोपियों की शक्ल-सूरत पर तीखी टिप्पणी की, और उनकी तुलना फिल्मों में अपराधियों की कास्टिंग से करते हुए कहा कि ये लोग किसी फिल्म में खलनायक के अड्डे पर चाय लाने वाले लड़के का छोटा-सा किरदार भी नहीं पा सकते। यह पोस्ट वास्तविक जीवन के अपराधियों और रुपहले पर्दे पर दिखाई जाने वाली उनकी फिल्मी छवि के बीच के फर्क पर एक अनोखी बहस छेड़ गई।

वर्मा की एक्स पोस्ट में क्या कहा

वर्मा ने एक्स पर लिखा, 'टाइगर श्रॉफ पर हमला करने वाले शूटर जैसे दिखते हैं, उन्हें किसी फिल्म में विलेन के अड्डे पर चाय पहुंचाने वाले लड़के का रोल भी नहीं मिलेगा।' उन्होंने इस पोस्ट में जाने-माने कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा को भी टैग किया।

वर्मा ने आगे लिखा कि 'असल जिंदगी का कास्टिंग डायरेक्टर, फिल्मी दुनिया के कास्टिंग डायरेक्टर से कहीं ज़्यादा अजीब होता है।' उनका इशारा इस बात की ओर था कि हकीकत में अपराधी अक्सर बेहद साधारण दिखते हैं, जबकि फिल्मों में उन्हें एक विशेष 'ग्लैमरस' छवि दी जाती है।

दाऊद इब्राहिम का संदर्भ

वर्मा ने इस बहस को और आगे बढ़ाते हुए अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि यदि दाऊद इब्राहिम पर कोई फिल्म बनाई जाए, तो संभव है कि उनके जैसा दिखने वाले व्यक्ति को भी उनका किरदार निभाने के लिए न चुना जाए — क्योंकि बॉलीवुड की कास्टिंग और वास्तविकता की दुनिया के मानदंड सर्वथा भिन्न हैं।

गौरतलब है कि वर्मा ने इससे पहले भी टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले पर प्रतिक्रिया दी थी, जब उन्होंने इस वारदात को 'असामान्य' करार देते हुए कहा था कि कथित तौर पर इसके पीछे वसूली या बदला नहीं, बल्कि 'अहंकार और प्रतिष्ठा' की भावना थी।

फायरिंग की घटना का पूरा संदर्भ

19 अक्टूबर को मुंबई के जुहू क्षेत्र स्थित पुष्पा नरसी पार्क के निकट एक फुटबॉल क्लब के बाहर टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी की गई थी। इस घटना में टाइगर श्रॉफ सुरक्षित बच निकले, परंतु उनके चालक और एक ऑटो रिक्शा चालक घायल हो गए थे।

यह घटना मुंबई के एक व्यस्त इलाके में हुई, जिसने शहर में सुरक्षा व्यवस्था और सेलेब्रिटी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए। मामले में पुलिस ने कथित शूटरों की पहचान की है और जाँच जारी है।

सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया

वर्मा की इस पोस्ट पर एक्स पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। एक यूजर ने लिखा, 'कास्टिंग डायरेक्टर वही चुनते हैं जो बिक सके, ज़रूरी नहीं कि वह हकीकत जैसा हो। बॉलीवुड में गैंगस्टर सूट और दाढ़ी में दिखाया जाता है, जबकि असली अपराधी आपके आसपास के आम लोगों जैसे दिख सकते हैं।'

एक अन्य यूजर ने व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा, 'आप इतने सालों से फिल्म निर्देशक हैं, अच्छा होगा कि आप खुद भी किसी किरदार को निभाएं, जैसे दाऊद इब्राहिम का।' इस पोस्ट ने फिल्म उद्योग और वास्तविकता के बीच की खाई पर एक दिलचस्प सार्वजनिक संवाद को जन्म दिया है।

आने वाले दिनों में जैसे-जैसे पुलिस इस मामले में आरोपियों के खिलाफ जाँच आगे बढ़ाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा कि वर्मा की यह 'कास्टिंग' वाली टिप्पणी महज़ एक विनोद बनकर रह जाती है या इस बहस को कोई ठोस दिशा मिलती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस गहरी विडंबना की ओर इशारा करती है जो बॉलीवुड की 'ग्लैमरस' अपराध-छवि और वास्तविकता के बीच मौजूद है। वर्मा ने स्वयं 'सत्या' और 'कंपनी' जैसी फिल्मों में अंडरवर्ल्ड को यथार्थवादी तरीके से दिखाने का दावा किया है — ऐसे में उनकी यह राय उनके अपने सिनेमाई इतिहास से भी टकराती है। असली सवाल यह है कि क्या इस तरह की सोशल मीडिया टिप्पणियाँ एक गंभीर आपराधिक मामले को हल्का तो नहीं बना देतीं, जिसमें दो लोग घायल हुए और एक अभिनेता की जान खतरे में पड़ी।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम गोपाल वर्मा ने टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले पर क्या कहा?
राम गोपाल वर्मा ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि टाइगर श्रॉफ पर हमला करने वाले कथित शूटर किसी फिल्म में विलेन के अड्डे पर चाय लाने वाले लड़के का किरदार भी पाने के लायक नहीं दिखते। उन्होंने दाऊद इब्राहिम का उदाहरण देते हुए असली और फिल्मी अपराधियों की दिखावट में फर्क को रेखांकित किया।
टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग कहाँ और कब हुई?
यह घटना 19 अक्टूबर को मुंबई के जुहू क्षेत्र स्थित पुष्पा नरसी पार्क के पास एक फुटबॉल क्लब के बाहर हुई। टाइगर श्रॉफ सुरक्षित रहे, लेकिन उनके चालक और एक ऑटो रिक्शा चालक घायल हो गए।
वर्मा के अनुसार टाइगर श्रॉफ फायरिंग का मकसद क्या था?
वर्मा ने कहा कि इस मामले में कथित तौर पर वजह वसूली या बदला नहीं, बल्कि 'अहंकार और प्रतिष्ठा' है। उन्होंने इसे पहले कभी न देखी गई असामान्य वारदात बताया।
राम गोपाल वर्मा ने अपनी पोस्ट में किसे टैग किया?
वर्मा ने अपनी एक्स पोस्ट में जाने-माने कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा को टैग किया। इसके ज़रिए उन्होंने फिल्मी और वास्तविक दुनिया की कास्टिंग के फर्क को और स्पष्ट करने की कोशिश की।
सोशल मीडिया पर वर्मा की टिप्पणी पर क्या प्रतिक्रिया रही?
वर्मा की पोस्ट पर मिली-जुली प्रतिक्रिया रही। कुछ यूजर्स ने उनसे सहमति जताते हुए कहा कि असली अपराधी आम लोगों जैसे दिखते हैं, जबकि कुछ ने व्यंग्यात्मक अंदाज में उनसे खुद दाऊद का किरदार निभाने की सलाह दी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 26 मिनट पहले
  2. 2 दिन पहले
  3. 3 दिन पहले
  4. 3 दिन पहले
  5. 4 दिन पहले
  6. 4 दिन पहले
  7. 5 दिन पहले
  8. 5 दिन पहले