21 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या फिल्में लोगों को संस्कृति और मूल्यों से जोड़ने में सफल होती हैं? रणदीप हुड्डा का नजरिया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या फिल्में लोगों को संस्कृति और मूल्यों से जोड़ने में सफल होती हैं? रणदीप हुड्डा का नजरिया

सारांश

रणदीप हुड्डा ने अपने हालिया इंटरव्यू में साझा किया कि कैसे सिनेमा संस्कृति और मूल्यों को दर्शकों से जोड़ता है। उनका मानना है कि ये कहानियाँ न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि समाज में गहरी छाप भी छोड़ती हैं। जानिए उनके विचारों में क्या खास है!

मुख्य बातें

संस्कृति और मूल्य सिनेमा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
रणदीप की कहानियाँ दर्शकों के दिल में गहरी छाप छोड़ती हैं।
ग्लैमर से अधिक कंटेंट पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
सिनेमा एक आईना है जो समाज के मुद्दों को उजागर करता है।
अभिनय के साथ-साथ संवेदनशीलता भी जरूरी है।

मुंबई, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड के अभिनेता रणदीप हुड्डा हमेशा अपनी जड़ों से जुड़े रहने और अपनी संस्कृति को अपनाने के महत्व पर जोर देते हैं। वह उन कलाकारों में से हैं जो ग्लैमर के बजाय कंटेंट को प्राथमिकता देते हैं। उनका मानना है कि भाषा, संस्कृति और जड़ें किसी भी व्यक्ति के लिए बाधा नहीं बनती, बल्कि ये उसकी ताकत और पहचान होती हैं।

राष्ट्र प्रेस को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जब हम अपने मूल्यों और संस्कृति को गहराई से समझते हैं और उन्हें अपनाते हैं, तो हमारे विचारों का दृष्टिकोण और दुनिया को देखने का तरीका भी बदलता है।

रणदीप अब उन कहानियों से जुड़ रहे हैं जो हरियाणवी, राजस्थानी और भोजपुरी संस्कृति को प्रस्तुत करती हैं।

उन्होंने कहा, "मुझे ऐसी कहानियां पसंद हैं जो दिखावटी न हों, बल्कि जीवन की वास्तविकताओं को ईमानदारी से दर्शाएं। आज के समय में जब सब कुछ तेज और चमकदार होता जा रहा है, तब सिनेमा का कार्य है लोगों को ठहरकर सोचने का अवसर देना। गांव, मिट्टी, रिश्ते और संघर्ष से निकली कहानियां दर्शकों के दिल में गहरी छाप छोड़ती हैं। ऐसी फिल्मों में काम करना एक अभिनेता को और बेहतर बनाता है, क्योंकि यहां अभिनय के साथ-साथ संवेदनशीलता भी आवश्यक होती है।"

उन्होंने आगे कहा, "मैं अपने करियर में संख्या से ज्यादा गुणवत्ता पर ध्यान दे रहा हूं। हर फिल्म मेरे लिए एक सीख होती है, जो न केवल एक कलाकार, बल्कि एक इंसान के रूप में भी मुझे आगे बढ़ाती है। जब मैं अपनी जड़ों से जुड़ी कहानियों का हिस्सा बनता हूं तो दर्शक भी उस कहानी में खुद को देख पाते हैं।"

बातचीत के दौरान रणदीप ने कहा, "सिनेमा समाज को आईना दिखाने का कार्य करता है। यदि फिल्में लोगों को अपनी पहचान, संस्कृति और मूल्यों से जोड़ने में सफल होती हैं, तो यही सिनेमा की असली जीत है। यही सोच मुझे बार-बार ऐसी कहानियों की ओर खींचती है, जो सरल होते हुए भी गहरी छाप छोड़ जाती हैं।"

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी बताता है कि सिनेमा का असली कार्य समाज को आईना दिखाना है। एक राष्ट्रीय संपादक के रूप में, हमें ऐसे विचारों का समर्थन करना चाहिए जो संस्कृति और मानवीय मूल्यों को आगे बढ़ाते हैं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रणदीप हुड्डा किस प्रकार की फिल्मों में काम कर रहे हैं?
रणदीप हुड्डा हरियाणवी, राजस्थानी और भोजपुरी संस्कृति को दर्शाने वाली कहानियों में रुचि रखते हैं।
रणदीप हुड्डा का सिनेमा के प्रति क्या दृष्टिकोण है?
उनका मानना है कि सिनेमा समाज को अपनी पहचान और संस्कृति से जोड़ने का कार्य करता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 11 महीने पहले
  4. 11 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 12 महीने पहले
  8. 1 साल पहले