'दृश्यम 3: द कन्क्लूजन' पर बोले डायरेक्टर अभिषेक पाठक: 'रीमेक का टैग नहीं चाहता था'
सारांश
मुख्य बातें
निर्देशक अभिषेक पाठक की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'दृश्यम 3: द कन्क्लूजन' इन दिनों देशभर के सिनेमाघरों में दर्शकों की जबरदस्त तालियाँ बटोर रही है। 3 अक्टूबर 2026 को मुंबई में हुई एक विशेष बातचीत में पाठक ने खुलासा किया कि इस फ्रेंचाइजी के समापन अध्याय को गढ़ते वक्त उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता थी — पुरानी फिल्मों की आत्मा को जीवित रखते हुए एक बिल्कुल नई कहानी परोसना।
कहानी की जटिलता और तैयारी
अभिषेक पाठक ने बताया कि 'दृश्यम 3' की पटकथा कई परतों में बुनी गई है, जिसके लिए उन्हें और उनकी टीम को 'दृश्यम' और 'दृश्यम 2' को बार-बार देखना पड़ा। उनके अनुसार, हर संवाद और हर दृश्य को पिछली फिल्मों की कहानी से सुसंगत बनाना उनकी प्रमुख चिंता थी।
उन्होंने कहा, 'दृश्यम 3: द कन्क्लूजन' की कहानी लिखते समय हम बार-बार पिछली फिल्मों के छोटे से डायलॉग या सीन को देखा करते थे और सोचते थे कि इसे पिछली कहानी से कैसे कनेक्ट किया जा सके। मैं इस बात को लेकर बहुत सजग था कि हमारे दर्शक पहले से ही 'दृश्यम' और 'दृश्यम 2' देख चुके हैं, तो वे इसकी कहानी से अच्छे वाकिफ हैं।
रीमेक के टैग से परहेज
निर्देशक ने स्पष्ट किया कि इस बार उनका इरादा किसी मलयालम मूल की फिल्म की महज नकल उतारना नहीं था। उन्होंने कहा, मैं चाहता था कि लोगों को पुरानी यादों का एहसास हो और लगे कि सारे हिस्से आपस में जुड़े हुए हैं। साथ ही मैं इस बार रीमेक का टैग नहीं चाहता था, क्योंकि कहीं न कहीं मुझे इस बात का अंदाजा था कि जब आप कुछ ऐसा बनाते हैं, जो पहले से ही मौजूद है, तो लोग हिंदी वर्जन में बनी फिल्म की मेहनत को नजरअंदाज करते हैं।
यह टिप्पणी उन आलोचनाओं के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण है जो हिंदी सिनेमा में क्षेत्रीय फिल्मों के रीमेक को लेकर अक्सर उठती हैं। गौरतलब है कि 'दृश्यम' फ्रेंचाइजी की नींव मलयालम सिनेमा के मोहनलाल-अभिनीत ब्लॉकबस्टर पर टिकी है।
पटकथा को जटिल बनाए रखने की कोशिश
पाठक ने बताया कि पूरी टीम स्क्रीनप्ले को लेकर लगातार बहस करती रहती थी। उन्होंने कहा, मैं इसे सच में अपने तरीके से लिखना चाहता था। कहानी को अपने अंदाज में आगे ले जाना चाहता था और आखिरी भाग का अपना वर्जन बनाना चाहता था। अगर कुछ अंदाजा लगाने लायक लगता था तो हम कहते थे कि इसे कोई भी समझ सकता है। इस प्रोसेस ने हमें कहानी को जटिल बनाए रखने में मदद की, बिना दर्शकों को खोए।
यह ऐसे समय में आया है जब बॉलीवुड में ओरिजिनल बनाम रीमेक की बहस एक बार फिर जोर पकड़ रही है, और दर्शक हिंदी फिल्मों में मौलिकता की माँग करने लगे हैं।
दर्शकों की प्रतिक्रिया
फिल्म को अब तक दर्शकों की ओर से बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। सिनेमाघरों में उमड़ रही भीड़ और सोशल मीडिया पर हो रही चर्चा यह दर्शाती है कि फ्रेंचाइजी के प्रति दर्शकों का प्रेम बरकरार है। आने वाले हफ्तों में बॉक्स ऑफिस पर इसका प्रदर्शन यह तय करेगा कि अभिषेक पाठक की यह 'कन्क्लूजन' फ्रेंचाइजी को वाकई एक यादगार अंत दे पाती है या नहीं।