क्या सिद्धार्थ ने 2025 को ‘सीख का साल’ बताया? इन छह फिल्मों ने सिनेमा को समझने की सोच बदल दी!

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क्या सिद्धार्थ ने 2025 को ‘सीख का साल’ बताया? इन छह फिल्मों ने सिनेमा को समझने की सोच बदल दी!

सारांश

क्या सिद्धार्थ सूर्यनारायण ने 2025 को ‘सीख का साल’ कहा? इस साल उन्होंने छह महत्वपूर्ण फिल्मों का अनुभव किया, जिन्होंने सिनेमा को समझने की उनकी सोच को बदल दिया। जानिए इन फिल्मों के बारे में और सिद्धार्थ के अनुभव के बारे में।

Key Takeaways

  • सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन को समझने का माध्यम है।
  • सिद्धार्थ ने 2025 को सीख का साल कहा।
  • इन छह फिल्मों ने उनकी सोच को प्रभावित किया।
  • फिल्में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी प्रकाश डालती हैं।
  • सिद्धार्थ का अनुभव दर्शाता है कि सिनेमा शिक्षाप्रद हो सकता है।

मुंबई, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत और वैश्विक स्तर पर सिनेमा हमेशा से केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा है, बल्कि यह जीवन की गहराइयों और विभिन्न संस्कृतियों को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी रहा है। फिल्म 'रंग दे बसंती' के अभिनेता सिद्धार्थ सूर्यनारायण के लिए वर्ष 2025 ऐसा ही एक अनुभव रहा।

पिछले वर्ष उन्होंने छह अत्यंत महत्वपूर्ण और विशेष फिल्में देखी, जिनमें विभिन्न विषयों और शैलियों का समावेश था। सिद्धार्थ ने इसे अपने लिए एक शिक्षा का साल बताया और अपने अनुभव को इंस्टाग्राम पर साझा किया।

सिद्धार्थ ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज में लिखा, "'इट वाज जस्ट एन एक्सीडेंट,' 'सिनर्स,' 'सेंटिमेंटल वैल्यू,' 'वन बैटल आफ्टर अनदर', 'हैमनेट' और 'द सीक्रेट एजेंट' जैसी फिल्में मैंने एक ही वर्ष में देखीं।" ये फिल्में मेरे लिए न केवल मनोरंजन थीं, बल्कि सिनेमा की गहराई को समझने का एक अद्वितीय अनुभव भी थीं।"

सिद्धार्थ ने कहा, "ये फिल्में मेरे लिए एक सीख बन गईं। जीवन और कैरियर में, ये फिल्में शिक्षा के समान थीं, क्योंकि प्रत्येक फिल्म ने मुझे अलग-अलग कहानियों, अभिनय और निर्देशन के दृष्टिकोण को देखने का अवसर दिया।"

जफर पनाही की फिल्म 'इट वाज जस्ट एन एक्सीडेंट' ईरान की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसमें कुछ पुराने राजनीतिक कैदियों को अपने साथ हुए अत्याचार का बदला लेने का संकल्प दिखाया गया है। ईरानी सरकार के आलोचक पनाही ने बिना अनुमति के यह फिल्म बनाई है। यह फिल्म मानवता और न्याय के मुद्दों पर प्रकाश डालती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।

रयान कूग्लर की हॉरर फिल्म 'सिनर्स' 1932 के मिसिसिपी डेल्टा में सेट है। इसमें माइकल बी. जॉर्डन जुड़वां भाइयों की भूमिका निभा रहे हैं, जो अपने शहर लौटते हैं और एक अलौकिक बुराई का सामना करते हैं। यह फिल्म केवल डर और रोमांच नहीं देती, बल्कि समाज की जटिलताओं को भी सामने लाती है।

नॉर्वेजियन फिल्म 'सेंटिमेंटल वैल्यू' पारिवारिक और भावनात्मक गहराई को दर्शाती है। इसमें दो बहनें अपने पिता से मिलती हैं और पुराने रिश्तों को समझने की कोशिश करती हैं। एले फैनिंग और एंडर्स डैनियलसेन ली ने इसमें मुख्य भूमिकाएँ निभाई हैं।

पॉल थॉमस एंडरसन की 'वन बैटल आफ्टर अनदर' पूर्व क्रांतिकारी की कहानी है, जो अपनी बेटी की रक्षा के लिए संघर्ष करता है। यह फिल्म अतीत और वर्तमान की चुनौतियों का सामना करने का तरीका दर्शाती है।

'हैमनेट' क्लो झाओ द्वारा निर्देशित एक ऐतिहासिक और भावनात्मक फिल्म है, जो विलियम शेक्सपियर और उनकी पत्नी एनी हैथवे के जीवन पर आधारित है। इसमें उनके बेटे हैमनेट की मृत्यु के बाद परिवार के दुख और संघर्ष का चित्रण किया गया है।

'द सीक्रेट एजेंट' ब्राजील की मिलिट्री तानाशाही के समय की कहानी है। इसमें एक पूर्व प्रोफेसर आर्मांडो को अपने विचारों की रक्षा के लिए संघर्ष करते हुए दिखाया गया है। यह फिल्म राजनीति, साहस और मानवीय संघर्ष को उजागर करती है।

Point of View

बल्कि यह जीवन के विविध पहलुओं को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस दृष्टिकोण से, भारतीय सिनेमा में गहराई और विविधता का समावेश दर्शकों के लिए महत्वपूर्ण है।
NationPress
05/02/2026

Frequently Asked Questions

सिद्धार्थ ने कौन-कौन सी फिल्में देखीं?
सिद्धार्थ ने 'इट वाज जस्ट एन एक्सीडेंट,' 'सिनर्स,' 'सेंटिमेंटल वैल्यू,' 'वन बैटल आफ्टर अनदर', 'हैमनेट' और 'द सीक्रेट एजेंट' देखीं।
इन फिल्मों का मुख्य विषय क्या है?
इन फिल्मों में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और पारिवारिक मुद्दों को दर्शाया गया है।
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