क्या चावल या गेहूं है सेहत के लिए फायदेमंद या हानिकारक?
सारांश
Key Takeaways
- गेहूं का अधिक सेवन मधुमेह और थायराइड का कारण बन सकता है।
- चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स उच्च है, जिससे मोटापे का खतरा बढ़ता है।
- सही पकाने का तरीका और मात्रा का ध्यान रखना आवश्यक है।
- अनाज के साथ सब्जियों का सेवन बढ़ाना चाहिए।
- सिर्फ चावल और गेहूं पर निर्भर न रहें।
नई दिल्ली, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। गेहूं और चावल दोनों ही भारतीय भोजन में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। इनके बिना भारतीय थाली अधूरी मानी जाती है, लेकिन चावल और गेहूं के स्वास्थ्य लाभों को लेकर हमेशा बहस होती रही है। कुछ लोगों का मानना है कि गेहूं अधिक फायदेमंद है, जबकि अन्य चावल को अधिक पौष्टिक मानते हैं। हालांकि, आपको जानकर आश्चर्य होगा कि गेहूं और चावल दोनों ही सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार, समस्या अनाज में नहीं, बल्कि रिफाइंड अनाज, गलत मात्रा और गलत तरीके से खाने में है। आधुनिक समय में, चावल और गेहूं दोनों के फायदों और नुकसानों का सही संतुलन बनाना आवश्यक है। आइए, पहले गेहूं के फायदों और नुकसानों पर चर्चा करते हैं।
गेहूं में उच्च मात्रा में ग्लूटेन होता है, जो लंबे समय तक सेवन करने पर मधुमेह और थायराइड जैसी समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। यह पेट से संबंधित रोगों का कारण भी बनता है, क्योंकि यह आंतों में अच्छे बैक्टीरिया के विकास के लिए अनुकूल वातावरण नहीं प्रदान करता। इसके अलावा, आजकल के गेहूं में पोषक तत्वों की कमी होती है, विशेषकर जिंक और आयरन की। अधिक गेहूं का सेवन इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाता है, जिससे रक्त में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ता है। लेकिन, गेहूं में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो ऊर्जा का एक उत्कृष्ट स्रोत है।
अब अगर हम चावल की बात करें, तो हर प्रकार के चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत अधिक होता है, जो मोटापे और मधुमेह के खतरे को बढ़ाता है। चावल के पौधे की जड़ में मिट्टी से पोषक तत्वों को सोखने की क्षमता कम होती है, जिससे चावल में हानिकारक रसायनों की मात्रा अधिक होती है। आजकल के पॉलिश किए गए चावलों में आयरन, जिंक और अन्य पोषक तत्वों की कमी होती है। चावल केवल पचाने में आसान होते हैं और सीमित मात्रा तक ही पेट के लिए ठीक हैं।
अब यह सवाल उठता है कि हमें क्या खाना चाहिए? स्वस्थ भोजन के लिए जीवन में तीन महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना आवश्यक है। पहला, भोजन को सही तरीके से पकाना। रोटी हो या चावल, दोनों को अच्छे से पकाना आवश्यक है। चावल को कई बार धोकर और अच्छे से पकाना चाहिए, जबकि रोटी का सेवन सीमित करना चाहिए। एक दिन में 2 से अधिक रोटियां न खाएं। दूसरा, भोजन में अन्य अनाजों को भी शामिल करें। केवल चावल और गेहूं पर निर्भर न रहें। बाजरा, ज्वार और मक्का को भी अपनी थाली में शामिल करें। तीसरा, अनाज की मात्रा कम और सब्जियों की मात्रा अधिक रखें। धारणा है कि रोटी और चावल से ताकत मिलती है, लेकिन यह गलत है। ये केवल अस्थायी ऊर्जा प्रदान करते हैं, असली ताकत नहीं।