धुंधली दृष्टि के संकेतों को न करें नजरअंदाज, जानें बचाव के उपाय
सारांश
Key Takeaways
- धुंधली नजर को न करें नजरअंदाज।
- मोतियाबिंद के लक्षण जानें।
- समय पर आंखों की जांच करवाएं।
- ऑपरेशन एक सुरक्षित प्रक्रिया है।
- स्वस्थ आहार से बचाव करें।
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। यदि आपको या आपके परिवार के वरिष्ठ सदस्य को धुंधली नजर आने लगी है या बार-बार चश्मे का नंबर बदलने की जरूरत पड़ रही है, तो इसे अवश्य ध्यान दें। यह मोतियाबिंद का प्रारंभिक संकेत हो सकता है। इस स्थिति में विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए उपायों को अपनाने से राहत मिल सकती है।
नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, आजकल मोतियाबिंद आम समस्या बन चुकी है, विशेष रूप से उम्र बढ़ने के साथ। यदि समय पर इसका निदान हो जाए और इलाज किया जाए, तो दृष्टि को पूरी तरह से सुरक्षित रखा जा सकता है। मोतियाबिंद की स्थिति में आंख का लेंस धुंधला हो जाता है, जिससे स्पष्ट दृष्टि में बाधा आती है। यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है और अनदेखी करने पर दृष्टि और कमजोर हो सकती है।
सुखद बात यह है कि आजकल मोतियाबिंद का ऑपरेशन बहुत ही सुरक्षित, सरल और प्रभावी हो गया है। अधिकांश मामलों में ऑपरेशन के बाद मरीज को अच्छी रोशनी और स्पष्ट दृष्टि वापस मिल जाती है।
मोतियाबिंद के प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं: धुंधला या धुएं जैसा दिखाई देना, रोशनी के चारों ओर चमक दिखाई देना, रात में गाड़ी चलाने में कठिनाई, पढ़ने में समस्या, रंगों का फीका या पीला दिखना, और बार-बार चश्मे के नंबर को बदलने की आवश्यकता। ये लक्षण विशेष रूप से 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में सामान्य हैं, लेकिन कभी-कभी युवाओं में भी मोतियाबिंद हो सकता है। यदि बड़े लोगों की नजर धीरे-धीरे कमजोर हो रही है, तो तुरंत आंखों के डॉक्टर से जांच करवाना चाहिए।
डॉक्टरों का कहना है कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन अब एक छोटी प्रक्रिया है, जिसमें आंख की धुंधली लेंस को निकालकर उसकी जगह कृत्रिम लेंस लगाया जाता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर 15-20 मिनट में पूरी हो जाती है और मरीज उसी दिन घर लौट सकता है। इसमें दर्द बहुत कम होता है और रिकवरी भी तेज होती है। समय पर इलाज न करने से मोतियाबिंद बढ़ सकता है और आंखों की रोशनी पूरी तरह चली जा सकती है, इसलिए धुंधली नजर को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित आंखों की जांच करवाना सबसे अच्छा उपाय है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि 50 वर्ष की उम्र के बाद हर साल एक बार आंखों की जांच अवश्य करानी चाहिए। स्वस्थ आहार, हरी सब्जियां, फल और धूप से बचाव भी मोतियाबिंद से बचाव में मदद कर सकता है।