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क्या पीरियड्स के दर्द और ऐंठन से निजात पाने के लिए योगासनों का अभ्यास करें?

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क्या पीरियड्स के दर्द और ऐंठन से निजात पाने के लिए योगासनों का अभ्यास करें?

सारांश

क्या आप पीरियड्स के दर्द और ऐंठन से परेशान हैं? जानिए कैसे योगासन आपकी इस समस्या को हल कर सकते हैं। इस लेख में हम आपको कुछ खास योगासनों के बारे में बताएंगे, जो पीरियड्स के दौरान राहत देने में सहायक हो सकते हैं।

मुख्य बातें

योगासन से पीरियड्स के दर्द में राहत मिलती है।
नियमित अभ्यास से मूड स्विंग्स नियंत्रित होते हैं।
हल्के योगासन ऐंठन और सूजन को कम करते हैं।
सुरक्षित तरीके से योग करें, दर्द बढ़ने पर डॉक्टर से परामर्श लें।

नई दिल्ली, २४ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। नेशनल गर्ल चाइल्ड डे का यह महत्वपूर्ण दिन बेटियों की हिम्मत, ताकत और जज़्बा को सम्मान देता है। यह दिन बेटियों के महत्व को प्रदर्शित करता है। लड़कियों को जीवन में कई शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इनमें से एक चुनौती पीरियड्स के दौरान होने वाला असहनीय दर्द है, जो अक्सर उनकी दैनिक गतिविधियों को प्रभावित करता है। ऐसे समय में, योगासन एक प्रभावी और प्राकृतिक उपाय के रूप में उभरते हैं।

लड़कियों के लिए पीरियड्स के दौरान दर्द, ऐंठन, सूजन और मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं सामान्य हैं, जो उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती हैं। योग विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित योगासन इन समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक हो सकते हैं। योग के माध्यम से शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन का स्राव बढ़ता है, जो एक प्राकृतिक दर्द निवारक के रूप में कार्य करता है। इससे दर्द कम होता है, मूड बेहतर होता है और थकान भी घटती है।

कई हल्के और आरामदायक योगासन हैं, जिन्हें पीरियड्स के दौरान भी सुरक्षित रूप से किया जा सकता है। इससे पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार बेहतर होता है और मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं, जिससे ऐंठन में कमी आती है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से की जाने वाली गतिविधियों से बचें और केवल हल्के योगासन का चुनाव करें। नियमित अभ्यास से पीरियड्स की तकलीफें कम हो सकती हैं और उन दिनों में ऊर्जा भी मिलती है।

बालासन या चाइल्ड पोज: यह आसन पीरियड्स के दौरान बहुत राहत देता है। घुटनों के बल बैठकर आगे झुकें, माथा जमीन पर टिकाएं और हाथ आगे फैलाएं। इससे कमर और पेट की मांसपेशियां आराम पाती हैं, दर्द और ऐंठन कम होती है। १-२ मिनट तक इस मुद्रा में रहें। यह सूजन को भी घटाता है और मन को शांत करता है।

सुप्त बद्ध कोणासन या रिलाइनिंग बटरफ्लाई पोज: पीठ के बल लेटकर पैरों के तलवे आपस में जोड़ें और घुटनों को बाहर की ओर खोलें। हाथों से सहारा लें। इससे पेल्विक क्षेत्र में रक्त प्रवाह बढ़ता है और ऐंठन के साथ ही सूजन से राहत मिलती है। इसका अभ्यास ५ से १० मिनट तक करें।

अपानासन: पीठ के बल लेटकर दोनों घुटनों को छाती से लगाएं और हाथों से उन्हें पकड़ें। धीरे-धीरे हिलाएं। यह पेट की ऐंठन को शांत करता है, गैस और सूजन कम कर दर्द में तुरंत राहत देता है।

मार्जरीआसन-बितिलासन या कैट-काउ पोज: चारों हाथ-पैरों पर आकर पीठ को ऊपर-नीचे करें। सांस के साथ तालमेल बनाएं। यह रीढ़ को लचीला बनाता है, कमर के दर्द को कम करता है और पूरे शरीर में एंडोर्फिन बढ़ाता है। पीरियड्स में मूड स्विंग्स भी नियंत्रित होते हैं।

सुप्त मत्स्येंद्रासन: इसके अभ्यास के लिए पीठ के बल लेटकर एक घुटने को दूसरी तरफ मोड़ें और विपरीत हाथ से दबाएं। यह पेट की मरोड़ को दूर करता है, सूजन घटाता है और दर्द से राहत देता है। दोनों तरफ ३०-६० सेकंड करना चाहिए।

योगासन को अपनी दिनचर्या में शामिल कर पीरियड्स की समस्याओं पर नियंत्रण संभव है। हालांकि, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि शरीर या पेट पर दबाव न पड़े और यदि दर्द या सूजन अधिक हो, तो डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जो न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि समाज में उनके योगदान को भी प्रभावित करता है। योग का अभ्यास इस समस्या से निपटने का एक प्राकृतिक और प्रभावी तरीका है, जिसे अधिक से अधिक महिलाओं द्वारा अपनाया जाना चाहिए।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या योगासन पीरियड्स के दर्द को कम कर सकते हैं?
जी हां, नियमित योगासन पीरियड्स के दौरान दर्द को कम करने में सहायक होते हैं।
कौन सा योगासन पीरियड्स के दौरान सबसे प्रभावी है?
बालासन और अपानासन जैसे आसन पीरियड्स के दौरान बहुत फायदेमंद होते हैं।
क्या हर कोई योगासन कर सकता है?
हाँ, लेकिन यदि आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो योग करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना उचित है।
राष्ट्र प्रेस
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