क्या अल फाशेर में आरएसएफ के कब्जे से लोग खौफ में हैं? यूएन एजेंसी ने कहा, '36,000 सूडानी क्षेत्र छोड़कर भाग गए'

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क्या अल फाशेर में आरएसएफ के कब्जे से लोग खौफ में हैं? यूएन एजेंसी ने कहा, '36,000 सूडानी क्षेत्र छोड़कर भाग गए'

सारांश

सूडान के अल फाशेर में 36,000 से अधिक लोग पलायन कर चुके हैं। यह स्थिति आरएसएफ के कब्जे के बाद उत्पन्न हुई है। यूएन ने चिंता जताई है कि लोग खौफ में हैं। जानें इस पलायन का कारण और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया।

मुख्य बातें

अल फाशेर में हालात गंभीर हो गए हैं।
यूएन की रिपोर्ट के अनुसार 36,000 लोग पलायन कर चुके हैं।
आरएसएफ के कब्जे के बाद पलायन की संख्या में वृद्धि हुई है।
स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 3 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। सूडान के अल फाशेर में पलायन की रफ्तार ने तेजी पकड़ ली है। यूएन की माइग्रेशन एजेंसी ने बताया है कि शनिवार से सूडान के कोरडोफान क्षेत्र से 36,000 से अधिक लोग पलायन कर चुके हैं। यह पलायन पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) के अल फाशेर में कब्जे के एक हफ्ते बाद बढ़ा है।

यह क्षेत्र, जो दारफुर और खार्तूम के बीच स्थित है, हाल के हफ्तों में सूडानी सशस्त्र बलों (एसएएफ) और पैरामिलिट्री समूह के बीच गृह युद्ध का केंद्र बन गया है।

'इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन' (अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन) ने रविवार रात बताया कि 26 अक्टूबर (जिस दिन अल फाशेर पर आरएसएफ ने कब्जा किया) और 31 अक्टूबर के बीच उत्तरी कोरडोफान राज्य के पांच इलाकों से लगभग 36,825 लोग पलायन कर गए।

यूएन ने कहा कि अधिकांश लोग पैदल ही अल फाशेर के पश्चिम में स्थित तवीला शहर की ओर जा रहे हैं, जहां पहले से ही 6,52,000 से अधिक विस्थापित शरण लिए हुए हैं।

उत्तरी कोरडोफान के निवासियों ने सोमवार को बताया कि राज्य के कस्बों और गांवों में आरएसएफ और सेना की मौजूदगी में भारी बढ़ोतरी हुई है। दोनों उत्तरी कोरडोफान राज्य की राजधानी और एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स और कमांड हब अल ओबेद पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं, जो दारफुर को खार्तूम से जोड़ता है। आरएसएफ ने रविवार रात एक वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया, जिसमें आरएसएफ के सदस्य ने कहा, "आज, हमारी सभी सेनाएं यहां बारा फ्रंट पर इकट्ठा हो गई हैं," जो अल ओबेद के उत्तर में एक शहर है। आरएसएफ ने पिछले हफ्ते बारा पर कब्जे का दावा किया था।

अफ्रीका के लिए यूएन की सहायक महासचिव मार्था पोबी ने पिछले हफ्ते बारा में आरएसएफ द्वारा "बड़े पैमाने पर अत्याचार" और "जातीय आधार पर बदले की कार्रवाई" को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने दारफुर जैसी घटनाओं के पुनरावृत्ति की आशंका जताई। यहां आरएसएफ के लड़ाकों पर गैर-अरब जातीय समूहों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हत्या, यौन हिंसा और अपहरण का आरोप लगाया गया है।

वहीं, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) ने चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं पर चिंता जताई है और कर्मचारियों पर हमलों की पुष्टि की है। बताया गया है कि छह स्वास्थ्य कार्यकर्ता - चार चिकित्सक, एक नर्स और एक फार्मासिस्ट को अगवा कर लिया गया है। अकेले अक्टूबर में ही 'सऊदी मैटरनिटी हॉस्पिटल' पर पांच बार हमला हुआ है।

डब्ल्यूएचओ के ह्यूमैनिटेरियन ऑपरेशंस यूनिट की हेड डॉ. टेरेसा जकारिया ने बताया कि अल फाशेर में यूएन हेल्थ एजेंसी अभी "उन लोगों की मदद नहीं कर पा रही है जिन पर नकारात्मक असर पड़ा है।"

डब्ल्यूएचओ के अनुसार इस साल सूडान में 189 हमलों की पुष्टि हुई है, जिसमें 1,670 मौतें और 419 लोग घायल हुए हैं। डॉ. जकारिया ने कहा, "इन सभी हमलों से होने वाली मौतों में से छियासी प्रतिशत मौतें अकेले इसी साल हुई हैं और यह बताता है कि हमले और ज्यादा जानलेवा होते जा रहे हैं।"

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अल फाशेर में पलायन की मुख्य वजह क्या है?
अल फाशेर में पलायन की मुख्य वजह आरएसएफ का कब्जा और वहां के हालात में तेजी से बदलाव है।
यूएन ने इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
यूएन ने पलायन की संख्या को चिंताजनक बताया है और लोगों की सुरक्षा की चिंता जताई है।
कितने लोग अल फाशेर से पलायन कर चुके हैं?
लगभग 36,000 लोग अल फाशेर से पलायन कर चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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