क्या पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सरकारी कर्मचारियों ने डिस्पैरिटी रिडक्शन अलाउंस की मांग को लेकर प्रदर्शन किया?

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क्या पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सरकारी कर्मचारियों ने डिस्पैरिटी रिडक्शन अलाउंस की मांग को लेकर प्रदर्शन किया?

सारांश

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सरकारी कर्मचारियों का प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है। क्या उनकी मांगें पूरी होंगी? जानिए इस संघर्ष की कहानी और इसके पीछे का सच।

Key Takeaways

  • कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं अपनी मांगों के लिए।
  • डिस्पैरिटी रिडक्शन अलाउंस की मांग है।
  • बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी शामिल हुए हैं।
  • प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तारियां हुईं।
  • सरकार की नीति पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

क्वेटा, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सरकारी कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन को और तेज कर दिया है। बलूचिस्तान एम्प्लॉइज ग्रैंड अलायंस (बेगा) से जुड़े कर्मचारियों ने क्वेटा और खुजदार में रैलियां निकालकर सरकार से डिस्पैरिटी रिडक्शन अलाउंस (डीआरए) समेत अन्य मांगें पूरी करने की अपील की।

स्थानीय मीडिया के अनुसार, बेगा के कर्मचारियों ने क्वेटा के बचा ख़ान चौक से सिटी पुलिस स्टेशन तक रैली निकाली। पुलिस स्टेशन पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने धरना दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। सरकार द्वारा मांगें न माने जाने पर प्रदर्शन और भी उग्र हो गया। डॉन अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शन में शामिल 11 कर्मचारियों ने स्वेच्छा से अपनी गिरफ्तारी दी।

खुज़दार में भी सरकारी कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। इस आंदोलन का नेतृत्व गठबंधन के जिला अध्यक्ष असलम नोटानी, एपीसीए कलात डिवीजन के अध्यक्ष मंज़ूर नौशाद, महासचिव असलम ज़हरी और पैरामेडिकल स्टाफ एसोसिएशन के अध्यक्ष राशिद अहमद गुलामानी ने किया। बड़ी संख्या में विभिन्न सरकारी विभागों के कर्मचारी प्रदर्शन में शामिल हुए और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने मांगें मानने में हो रही देरी पर गंभीर चिंता जताई।

इससे पहले 22 जनवरी को बलूचिस्तान की अनएम्प्लॉयड फार्मासिस्ट्स एक्शन कमेटी (यूपीएसी) ने सरकार के उस फैसले की आलोचना की थी, जिसमें 2,000 से अधिक बेरोज़गार फार्मासिस्टों के लिए बहुत कम पदों की घोषणा की गई थी। इसे “ऊंट के मुंह में ज़ीरा” के समान बताते हुए संगठन ने फैसले को अस्वीकार्य करार दिया था।

क्वेटा प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए यूपीएसी के महासचिव क़ासिम अज़ीज़ मेंगल ने अधिक पद सृजित करने और पारदर्शी व मेरिट आधारित भर्ती की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि बीपीएस-17 पदों पर वॉक-इन इंटरव्यू के जरिए फार्मासिस्टों की नियुक्ति गैर-पारदर्शी है और इससे चहेते लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। मेंगल ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य विभाग में न तो मेरिट का पालन हो रहा है और न ही भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता है।

उन्होंने निजी अस्पतालों में फार्मेसी विभागों की अनुपस्थिति और नियुक्तियों की कमी पर भी चिंता जताई तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा हाल ही में जारी उस अधिसूचना की निंदा की, जिसमें डॉक्टरों और फार्मासिस्टों की संविदा आधार पर भर्तियों का विज्ञापन दिया गया था।

उधर, 20 जनवरी को क्वेटा में रेड ज़ोन में डिस्पैरिटी रिडक्शन अलाउंस की मांग को लेकर दिए जा रहे धरने को पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद दर्जनों सरकारी कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। प्रदर्शन के दौरान क्वेटा और आसपास के इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी निलंबित कर दी गई थीं।

बलूचिस्तान पोस्ट के मुताबिक, बलूचिस्तान के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी क्वेटा पहुंचे थे, जिसके चलते कई सरकारी दफ्तरों का कामकाज प्रभावित हुआ। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए प्रशासन ने प्रमुख प्रवेश मार्गों पर कंटेनर लगा दिए और रेड ज़ोन को पूरी तरह बंद कर दिया। इसके बावजूद कर्मचारी क्वेटा प्रेस क्लब के बाहर इकट्ठा होने लगे, जहां पुलिस ने उन्हें तितर-बितर किया और कई लोगों को हिरासत में लिया।

Point of View

यह देखना महत्वपूर्ण है कि बलूचिस्तान के सरकारी कर्मचारी अपनी उचित मांगों के लिए क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं। यह इस क्षेत्र में सरकारी नीति और पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है। हमें उनके संघर्ष का समर्थन करना चाहिए और उनकी मांगों पर ध्यान देना चाहिए।
NationPress
06/02/2026
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