क्या कॉन्सुलर एक्सेस की आवश्यकता है? भारत ने कहा-पाकिस्तान उन भारतीयों को छोड़े जो सजा पूरी कर चुके हैं

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क्या कॉन्सुलर एक्सेस की आवश्यकता है? भारत ने कहा-पाकिस्तान उन भारतीयों को छोड़े जो सजा पूरी कर चुके हैं

सारांश

भारत ने पाकिस्तान से सिविल कैदियों और मछुआरों की रिहाई की मांग की है। साथ ही, कॉन्सुलर एक्सेस का अधिकार सुनिश्चित करने की भी अपील की है। जानें इस मुद्दे का महत्व और अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत इसके प्रावधान।

Key Takeaways

  • भारत ने पाकिस्तान से सिविल कैदियों की रिहाई की मांग की है।
  • कॉन्सुलर एक्सेस का अधिकार सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
  • पाकिस्तान से 167 मछुआरों की रिहाई की प्रक्रिया तेज करने की आवश्यकता है।
  • दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर समझौता का आदान-प्रदान हो चुका है।
  • भारत ने 2,661 मछुआरों को पाकिस्तान से वापस लाने का दावा किया है।

नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने गुरुवार को पाकिस्तान की हिरासत में मौजूद सिविल कैदियों, मछुआरों और उनकी नावों तथा लापता भारतीय रक्षा कर्मियों को जल्द ही रिहा करने और वापस भेजने की मांग की है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में यह उल्लेख किया गया। इसके साथ ही भारत ने उन सभी कैदियों को कॉन्सुलर एक्सेस प्रदान करने का अनुरोध किया है, जिन्हें अब तक यह सुविधा नहीं मिली है।

विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में कहा, "पाकिस्तान से कहा गया है कि वह अपनी कस्टडी में बंद 35 भारतीय सिविल कैदियों और मछुआरों को तुरंत कॉन्सुलर एक्सेस उपलब्ध कराए।"

कॉन्सुलर एक्सेस का मतलब है कि जब कोई नागरिक विदेश में हिरासत में होता है, तो उसके देश के राजनयिकों से मिलने, उसकी स्थिति जानने, परिवार से संपर्क करने या अन्य सहायता प्राप्त करने की अनुमति होती है।

यह अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत कैदियों का मौलिक अधिकार है। कॉन्सुलर एक्सेस पर द्विपक्षीय समझौते 2008 के नियमों के अनुसार हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को ऐसी सूचियों का आदान-प्रदान किया जाता है।

विदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि "भारत और पाकिस्तान ने आज नई दिल्ली और इस्लामाबाद के माध्यम से एक-दूसरे के साथ न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन और फैसिलिटी पर हमले को रोकने के समझौते के तहत आने वाले न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन और फैसिलिटी की सूची का आदान-प्रदान किया है।"

गौरतलब है कि यह समझौता 31 दिसंबर 1988 को हुआ था और इसे 27 जनवरी 1991 को लागू किया गया। समझौते में यह भी कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान हर साल की पहली जनवरी को समझौते के तहत आने वाले न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन और फैसिलिटी के बारे में एक-दूसरे को सूचित करेंगे।

दोनों देशों के बीच पहली बार इस तरह की सूची का आदान-प्रदान 1 जनवरी 1992 को हुआ था। इस बार लगातार 35वीं बार इस सूची का आदान-प्रदान किया जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान से 167 भारतीय मछुआरों और सिविल कैदियों की रिहाई और उन्हें वापस भेजने में तेजी लाने को कहा है। ये वे कैदी हैं जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है।

विदेश मंत्रालय ने कहा, "भारत ने अपनी कस्टडी में बंद 391 सिविल कैदियों और 33 मछुआरों की जानकारी साझा की है, जो पाकिस्तानी हैं या जिन्हें पाकिस्तानी माना जाता है। इसी प्रकार, पाकिस्तान ने अपनी कस्टडी में बंद 58 सिविल कैदियों और 199 मछुआरों की जानकारी साझा की है, जो भारतीय हैं या जिन्हें भारतीय माना जाता है।"

नई दिल्ली ने यह भी कहा कि उसने पाकिस्तान सरकार से सभी भारतीय सिविल कैदियों और मछुआरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा है, जब तक कि उनकी रिहाई नहीं हो जाती।

विदेश मंत्रालय के बयान में यह भी कहा गया, "भारत सरकार के निरंतर प्रयासों के कारण 2014 से अब तक 2,661 भारतीय मछुआरों और 71 भारतीय सिविल कैदियों को पाकिस्तान से वापस लाया गया है। इनमें 500 भारतीय मछुआरे और 13 भारतीय सिविल कैदी शामिल हैं, जिन्हें 2023 से अब तक वापस लाया गया है।"

Point of View

NationPress
01/01/2026

Frequently Asked Questions

कॉन्सुलर एक्सेस क्या है?
कॉन्सुलर एक्सेस वह अधिकार है जिसके तहत किसी नागरिक को विदेश में हिरासत में लेने की स्थिति में अपने देश के राजनयिकों से मिलने की अनुमति मिलती है।
भारत ने पाकिस्तान से क्या मांग की है?
भारत ने पाकिस्तान से सिविल कैदियों और मछुआरों की रिहाई और कॉन्सुलर एक्सेस प्रदान करने की मांग की है।
कॉन्सुलर एक्सेस के तहत क्या सुविधाएं मिलती हैं?
कॉन्सुलर एक्सेस के तहत नागरिक को अपने परिवार से संपर्क करने, हालचाल जानने और अन्य सहायता प्राप्त करने की अनुमति होती है।
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