क्या श्रीलंका में दित्वाह तूफान से आई आपदा में मरने वालों की संख्या 153 हो गई?
सारांश
Key Takeaways
- तूफान दित्वाह के कारण 153 लोगों की मौत हुई है।
- 191 लोग अभी भी लापता हैं।
- भारतीय रेस्क्यू टीम राहत कार्य में शामिल है।
- कई परिवार राहत शिविरों में रह रहे हैं।
- बाढ़ और लैंडस्लाइड के कारण स्थिति गंभीर है।
कोलंबो, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। तूफान दित्वाह के कारण श्रीलंका में आई आपदा में मरने वालों की संख्या अब 153 हो गई है। स्थानीय मीडिया ने डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर (डीएमसी) के हवाले से बताया है कि कम से कम 191 लोग लापता हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन को और तेज कर दिया गया है।
न्यूज आउटलेट डेली मिरर के अनुसार, भारी बारिश, बाढ़ और लगातार लैंडस्लाइड के कारण आम लोगों की जिंदगी में मुसीबतें आ गई हैं। मौसम अभी भी खराब है। सरकार द्वारा जारी किए गए नए आंकड़ों के अनुसार, 25 जिलों के 217,263 परिवारों के 774,724 लोग प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा, कई इलाके अब भी बाढ़, लैंडस्लाइड और लगातार बारिश की चपेट में हैं।
डीएमसी ने बताया कि 27,494 परिवारों के 100,898 लोग राहत शिविर में रह रहे हैं। देशभर में 798 शिविरों में लोगों को रखा गया है। दूसरी ओर, अधिकारी राहत पहुंचाने और बेघर हुए लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत हैं।
इस आपदा से कई जगहों पर संपर्क मार्ग कट गए हैं, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में कठिनाई हो रही है। श्रीलंका के राष्ट्रपति के मीडिया विभाग ने कहा कि श्रीलंका के टेलीकम्युनिकेशन ऑपरेटर नेटवर्क कंजेशन को कम करने और प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत करने के लिए इमरजेंसी कॉल को प्राथमिकता देने पर सहमत हो गए हैं। हालांकि, रविवार से मौसम में सुधार होने की उम्मीद है।
वहीं, श्रीलंका में आई इस आपदा का सामना करने के लिए भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है। भारतीय रेस्क्यू टीम श्रीलंका एयरफोर्स, नेवी, आर्मी, पुलिस और स्थानीय फर्स्ट रेस्पॉन्डर्स के साथ मिलकर बाढ़ से प्रभावित समुदायों की मदद कर रहे हैं। संकट में फंसे लोगों को निकालने, सप्लाई पहुंचाने और इमरजेंसी मदद की कोशिशें जारी हैं।
दो भारतीय नेवी हेलीकॉप्टरों ने पन्नाला में बाढ़ के पानी में फंसे आठ लोगों को बचाया। अधिकारियों ने बताया कि चार भारतीय हेलीकॉप्टर पूरे देश में बचाव मिशन में लगे हुए हैं। इनमें से दो एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत से उड़ान भर रहे हैं। एयरक्राफ्ट ने पन्नाला इलाके में कई उड़ानें भरीं। इन क्षेत्रों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ने के कारण कई घरों तक पहुंचना मुश्किल हो गया था। इसके बाद वहां से रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया और स्थानीय अधिकारियों को सौंप दिया गया।