क्या चुनाव आयोग ने 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की तारीख बढ़ाई?

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क्या चुनाव आयोग ने 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की तारीख बढ़ाई?

सारांश

चुनाव आयोग ने 12 राज्यों में एसआईआर की तारीख बढ़ाकर 11 दिसंबर की कर दी है। यह निर्णय विवादों के बीच लिया गया है। क्या यह विपक्षी दलों के आरोपों पर प्रभाव डालेगा?

Key Takeaways

  • चुनाव आयोग ने 12 राज्यों में एसआईआर की तारीख बढ़ाई।
  • नए शेड्यूल के अनुसार, अंतिम प्रकाशन की तारीख 14 फरवरी है।
  • विपक्षी दल इस निर्णय पर सवाल उठा रहे हैं।
  • मतदाता सूची की योग्यता की समीक्षा की जा रही है।
  • महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा है।

कोलकाता, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। चुनाव आयोग ने 12 भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की तारीख बढ़ा दी है। इस संबंध में चुनाव आयोग ने रविवार को एक नोटिफिकेशन जारी किया है।

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने एसआईआर की समय सीमा को सात दिन बढ़ाकर अब इसे 11 दिसंबर तक बढ़ा दिया है। पहले के अनुसार, वोटरों के एन्यूमरेशन फॉर्म जमा करने और उन्हें डिजिटाइज करने का कार्य 4 दिसंबर को होना था।

पोलिंग स्टेशनों को ठीक करने या फिर से व्यवस्थित करने की नई तारीख भी 11 दिसंबर तय की गई है।

पहले के शेड्यूल के अनुसार, ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल के पब्लिकेशन की अंतिम तारीख 9 दिसंबर थी, जिसे अब बढ़ाकर 16 दिसंबर कर दिया गया है।

नए शेड्यूल के अनुसार, दावे और आपत्तियां दर्ज करने का समय 16 दिसंबर, 2025 से 15 जनवरी, 2026 के बीच निर्धारित किया गया है।

नोटिस फेज की तारीखें, जिसमें एन्यूमरेशन फॉर्म जारी करना, सुनवाई, वेरिफिकेशन और उन पर फैसला करना और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ईआरओ) द्वारा दावों और आपत्तियों का निपटारा शामिल है, 16 दिसंबर, 2025 से 7 फरवरी, 2026 के बीच तय की गई हैं।

चेकिंग की नई तारीख वोटर रोल के हेल्थ पैरामीटर्स की जांच और फाइनल पब्लिकेशन के लिए ईसीआई की अनुमति लेने की अंतिम तारीख 10 फरवरी, 2026 है।

मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की नई तारीख 14 फरवरी है, जो पहले 7 फरवरी निर्धारित की गई थी।

शुरू से ही, विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग पर जल्दबाजी में एसआईआर कराने का आरोप लगा रही हैं। इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस भी चुनाव आयोग के खिलाफ है।

इस मामले पर राजनीतिक पार्टियों की ओर से अभी कोई बयान नहीं आया है। हालांकि, पश्चिम बंगाल टीएमी के एक सदस्य ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि सात दिन का एक्सटेंशन केवल दिखावे के लिए है। उन्होंने कहा, "इस मामले में कोई भी आधिकारिक बयान या तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या हमारी पार्टी के जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी देंगे।"

Point of View

यह समझना महत्वपूर्ण है कि चुनाव आयोग का यह निर्णय न केवल चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को प्रभावित कर सकता है, बल्कि यह राजनीतिक स्थिरता पर भी प्रभाव डाल सकता है। हमें देखना होगा कि विपक्षी दल इस पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं।
NationPress
30/11/2025

Frequently Asked Questions

एसआईआर क्या है?
एसआईआर का मतलब विशेष गहन पुनरीक्षण है, जिसमें मतदाता सूची की समीक्षा की जाती है।
चुनाव आयोग ने तारीख क्यों बढ़ाई?
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को संपूर्ण और सटीक बनाने के लिए तारीख बढ़ाई है।
क्या यह निर्णय विवादित है?
जी हां, विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर जल्दबाजी में निर्णय लेने का आरोप लगाया है।
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