हरभजन ने जलियांवाला बाग के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की, एक दर्दनाक इतिहास की याद
सारांश
Key Takeaways
- हरभजन सिंह ने जलियांवाला बाग के शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
- यह घटना भारतीय इतिहास का एक काला अध्याय है।
- गौतम गंभीर ने भी इस पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
- जलियांवाला बाग कांड ने स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा को बदल दिया।
- यह घटना 13 अप्रैल 1919 को हुई थी।
नई दिल्ली, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत के पूर्व स्पिनर हरभजन सिंह ने जलियांवाला बाग कांड की 107वीं वर्षगांठ पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने इसे इतिहास के सबसे काले और दर्दनाक अध्यायों में से एक करार दिया।
हरभजन ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "जलियांवाला बाग हत्याकांड की स्मृति में मैं उन अनगिनत बेगुनाह जिंदगियों के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा प्रकट करता हूं, जिनका अंत इस दुखद घटना में हुआ। यह सिर्फ एक कृत्य नहीं था, बल्कि भारत की आत्मा पर एक घाव था। इस दर्द से एक मजबूत इरादा, एकजुट आवाज और गुलामी की जंजीरों को तोड़ने का पक्का संकल्प पैदा हुआ। जब हम उन्हें याद करते हैं, तो हमें अपनी स्वतंत्रता की असली कीमत भी याद आती है। बहादुर आत्माओं को हमेशा शांति मिले। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक रहेगा।"
भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने भी जलियांवाला बाग हत्याकांड में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, "शहीद हमेशा अमर रहते हैं।" एक सदी से अधिक समय पहले, आज ही के दिन 1919 में ब्रिटिश अधिकारियों के क्रूर कार्यों ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर गहरा असर डाला था। इस घटना ने जनता को विदेशी क्रूरता के खिलाफ चेताया और आजादी की लड़ाई की दिशा बदल दी।
यह घटना बैसाखी के दौरान हुई थी, जब हजारों लोग अमृतसर के जलियांवाला बाग में एकत्रित हुए थे। सभी लोग इस बात से अनजान थे कि ब्रिटिश सरकार ने यहां सभा करने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद, ब्रिटिश सेना के ब्रिगेडियर रेजिनाल्ड डायर ने अपने सैनिकों के साथ यहां पहुंचकर गोली चलाने का आदेश दिया था। इस हत्याकांड में लगभग एक हजार लोगों की जान गई थी। ब्रिटिश सैनिकों ने 1,650 राउंड फायरिंग की, जिसमें 1200 से अधिक लोग घायल हुए थे। हालांकि, आधिकारिक रिपोर्ट में 379 मौतों का आंकड़ा दिया गया था।