किसान क्रेडिट कार्ड: किसानों के जीवन में आया नया मोड़ - शिवराज चौहान
सारांश
Key Takeaways
- किसान क्रेडिट कार्ड योजना किसानों के लिए वित्तीय सहायता का एक महत्वपूर्ण साधन है।
- इस योजना के तहत किसानों को नई तकनीकों और नवाचारों की जानकारी मिलती है।
- महिलाओं की उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए भी इस महोत्सव में विशेष प्रयास किए गए हैं।
- किसान उत्पादक संगठन किसानों की आय को बढ़ाने का माध्यम बन रहे हैं।
- आधुनिक तकनीक और संसाधनों का समन्वय खेती को एक नई दिशा दे रहा है।
रायसेन, १३ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के रायसेन में आयोजित उन्नत कृषि महोत्सव २०२६ के अंतिम दिन किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसान क्रेडिट कार्ड के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की।
शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा, "इस मेले का उद्देश्य यह है कि जो सरकारी योजनाएं हैं, उनके बारे में सभी किसानों को जानकारी प्राप्त हो। नए नवाचारों को जानें और उनके बारे में जानकारी हासिल करें। किसान क्रेडिट कार्ड एक महत्वपूर्ण योजना है, जिससे किसानों की जिंदगी में बदलाव आया है। यह योजना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में आरंभ की गई थी, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे आगे बढ़ाया है।"
उन्होंने आगे कहा, "जब खाद-बीज के लिए पैसे की आवश्यकता होती थी, तो किसानों को लोन लेना पड़ता था। उस समय ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेना पड़ता था। कई लोग प्राइवेट लोन लेते थे और उनकी पूरी फसल ब्याज चुकाने में चली जाती थी। किसान क्रेडिट कार्ड योजना किसानों के लिए एक वरदान है। इसके अलावा, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड योजना भी बहुत लाभकारी है।
प्रधानमंत्री कुसुम योजना केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जो किसानों को सौर पंप लगाने और ग्रिड-संबद्ध सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए लगभग ६०%25 तक सब्सिडी प्रदान करती है। किसानों के पास अभी भी जानकारी की कमी है, जिसके कारण कई बार गलतियां हो जाती हैं। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि राज्यमंत्री रामनाथ ठाकुर और हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा की उपस्थिति में किसान कल्याण के लिए आयोजित कृषि विज्ञान केंद्र सेमिनार में भाग लिया और किसानों को संबोधित किया।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ‘उन्नत कृषि महोत्सव २०२६’ में किसान उत्पादक संगठनों से जुड़ी हमारी मातृशक्ति अपनी उद्यमिता और मेहनत से सफलता की नई कहानी लिख रही है। बेहतरीन उत्पादों, आधुनिक सोच और उच्च गुणवत्ता के साथ ये महिलाएं आत्मनिर्भर भारत की सशक्त छवि प्रस्तुत कर रही हैं। एकजुटता और बाजार की समझ के माध्यम से वे न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि पूरे गांव के विकास का मार्ग भी प्रशस्त कर रही हैं।
स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपने उत्पादों, नवाचारों और उद्यमिता से उन्नत कृषि महोत्सव २०२६ में विशेष पहचान बना रही हैं। उनके स्टॉल पर आत्मनिर्भरता, गुणवत्ता और मूल्य संवर्धन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। नए प्रयोगों और संगठित प्रयासों के माध्यम से ये महिलाएं न केवल अपनी आय में वृद्धि कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही हैं। तीन दिवसीय उन्नत कृषि महोत्सव २०२६ किसानों के लिए नई उम्मीदों और अवसरों के साथ अपने समापन की ओर बढ़ रहा है। आधुनिक तकनीक, नवाचार और प्राकृतिक संसाधनों के समन्वय ने खेती को एक नई दिशा दी है।