भारत-इजरायल के बीच आयरन डोम डील पर सहमति, पाकिस्तान में खलबली

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भारत-इजरायल के बीच आयरन डोम डील पर सहमति, पाकिस्तान में खलबली

सारांश

भारत और इजरायल के बीच आयरन डोम पर बातचीत महत्वपूर्ण मोड़ पर है। यदि सहमति बनती है, तो यह सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा। जानिए इस डील का क्या असर होगा।

Key Takeaways

  • भारत और इजरायल के बीच आयरन डोम डील पर वार्ता हो रही है।
  • यह डील सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
  • भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान अपने स्वदेशी हथियारों की शक्ति दिखाई है।
  • इजरायल ने भारत को आयरन डोम तकनीक का हस्तांतरण करने का प्रस्ताव दिया है।
  • भारत का लक्ष्य 2030 तक एक अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार करना है।

तेल अवीव, २६ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के बीच आज आयरन डोम पर महत्वपूर्ण वार्ता हो सकती है। यदि दोनों देशों के बीच आयरन डोम को लेकर सहमति बन जाती है, तो यह देश की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

वास्तव में, 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत ने अपने स्वदेशी हथियारों की क्षमताओं को प्रदर्शित करते हुए दुश्मनों के सभी हमलों को विफल कर दिया। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और पीओके के नौ आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू किंग डेविड होटल में एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक करने से पहले 'यद वाशेम' जाएंगे। इस चर्चा में भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसमें रक्षा, विज्ञान-तकनीक, व्यापार, और लोगों के बीच सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, दोनों नेता आवश्यक क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर भी विचार साझा करेंगे।

इस दौरान, दोनों नेता आर्थिक, सुरक्षा, और कूटनीतिक क्षेत्रों में कई एमओयू पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाना है। हस्ताक्षर समारोह के बाद, प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री नेतन्याहू मीडिया में संयुक्त बयान देंगे।

भारत का ध्यान आयरन डोम तकनीक को हासिल करने के लिए इजरायल के साथ एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी बनाने पर है। प्रस्तावित व्यवस्था सीधे खरीद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है और इसे भारत के स्वदेशी 'मिशन सुदर्शन चक्र' का एक मुख्य घटक माना जा रहा है, जिसे प्रोजेक्ट कुशा के नाम से भी जाना जाता है।

इजरायल ने “मेक इन इंडिया” पहल के अंतर्गत भारत को आयरन डोम तकनीक का आधिकारिक हस्तांतरण करने का प्रस्ताव दिया है। इससे स्थानीय उत्पादन और कम दूरी के रॉकेट, मोर्टार, और ड्रोन का मुकाबला करने के लिए डिजाइन किए गए बहु-परत वायु रक्षा प्रणाली में एकीकरण संभव होगा।

आयरन डोम के साथ-साथ, भारत इजरायल के नए आयरन बीम लेजर-आधारित प्रणाली में भी गहरी रुचि दिखा रहा है। इसे कम लागत वाले हवाई खतरों के खिलाफ एक प्रभावी और त्वरित समाधान के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय शहरों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को उच्च सफलता दर वाली सुरक्षा कवच के माध्यम से सुरक्षित करना है, जो एस-400 जैसे लंबे दूरी के रक्षा प्लेटफार्मों का पूरक बनेगा। व्यापक लक्ष्य २०३० तक एक “अभेद्य” राष्ट्रीय सुरक्षा कवच तैयार करना है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने के लिए स्वदेशी हथियारों और आधुनिक विदेशी हथियारों का उपयोग किया था। ब्रह्मोस, हैमर गाइडेड बम, राफेल, सुखोई एसयू-30एमकेआई और मिराज 2000 के जरिए भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को नष्ट किया था।

Point of View

बल्कि भारत-इजरायल संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
NationPress
26/02/2026

Frequently Asked Questions

आयरन डोम क्या है?
आयरन डोम एक मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम है, जो कम दूरी के मिसाइलों और हवाई खतरों को नष्ट करने में सक्षम है।
इस डील का भारत की सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यदि यह डील सफल होती है, तो इससे भारत की सुरक्षा में महत्वपूर्ण सुधार होगा और यह आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ एक मजबूत ढाल बनेगा।
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