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क्या ईरान पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष खत्म करने के लिए मध्यस्थता को तैयार है?

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क्या ईरान पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष खत्म करने के लिए मध्यस्थता को तैयार है?

सारांश

तेहरान में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए मदद की पेशकश की है। क्या ईरान इस मुश्किल स्थिति में सुलह करवा सकता है? जानिए विस्तार से।

मुख्य बातें

ईरान ने मध्यस्थता की पेशकश की है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव कम करने की आवश्यकता है।
बातचीत में मतभेदों का समाधान करना महत्वपूर्ण है।
क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सभी पक्षों का सहयोग आवश्यक है।
सीमा पार आतंकवाद पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

तेहरान, 28 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए सहायता प्रदान करने की पेशकश की है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पेजेशकियन ने मंगलवार को कहा कि तेहरान मध्यस्थता के लिए तैयार है।

इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) की रिपोर्ट के अनुसार, पेजेशकियन ने मंगलवार को तेहरान में चौथे ईसीओ आंतरिक मंत्रियों की बैठक के दौरान पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के साथ एक वार्ता की।

उन्होंने क्षेत्र में तनाव को कम करने और संघर्ष से बचने के लिए प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया और पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान के बीच विवादों को सुलझाने के लिए ईरान की तैयारी व्यक्त की। उनका कहना था, "आज, हमें मुस्लिम देशों को एकजुट होकर अपने दुश्मनों के खिलाफ खड़ा होना होगा, यह अत्यंत आवश्यक हो गया है।"

पेजेशकियन के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब इस्तांबुल में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का नवीनतम दौर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका। मध्यस्थों ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण किसी भी समझौते में बाधा होने का जिक्र किया है।

क्षेत्रीय मध्यस्थता प्रयासों के बावजूद, लगातार तीन दिनों तक चली पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बातचीत में कोई सफलता नहीं मिली है। मध्यस्थों ने यह माना कि दोनों देशों के दृष्टिकोण में काफी अंतर था और इसीलिए बातचीत में कोई प्रगति नहीं हो सकी। अफगानिस्तान की प्रमुख समाचार एजेंसी खामा प्रेस ने जियो न्यूज की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि इन मतभेदों के कारण दोनों देशों के अधिकारियों को बातचीत के दौरान कोई प्रगति नहीं मिल सकी।

पाकिस्तान ने जोर देकर कहा है कि तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) के खिलाफ कदम उठाना और इस समूह के लड़ाकों को अफगानिस्तान में पनाह लेने से रोकना किसी भी समझौते के लिए महत्वपूर्ण शर्तें हैं। पाकिस्तान टीटीपी विद्रोह को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा मानता है।

विश्लेषकों का कहना है कि बातचीत की विफलता दोनों देशों के बीच अविश्वास को दर्शाती है और सीमा पार आतंकवाद को रोकने में कठिनाई को दर्शाती है। उन्होंने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक गतिरोध से दोनों देशों में अस्थिरता का खतरा बढ़ सकता है।

सीमा पर झड़पों के बाद, इस्लामाबाद ने चेतावनी दी है कि अगर टीटीपी आतंकवादियों के हमले जारी रहे, तो वह अफगान क्षेत्र के अंदर सैन्य कार्रवाई करने का निर्णय ले सकता है। सुरक्षा अधिकारियों ने जोर दिया है कि सीमा पर नागरिकों और सैन्य ठिकानों की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाना आवश्यक है।

पाकिस्तान-अफगानिस्तान बातचीत का पहला दौर, जिसकी मध्यस्थता कतर और तुर्की ने मिलकर की थी, 18-19 अक्टूबर को दोहा में आयोजित किया गया था।

जब दोनों प्रतिनिधिमंडल शांति वार्ता के दूसरे दौर के लिए इस्तांबुल में मिले, तो पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने काबुल को चेतावनी दी कि अगर बातचीत विफल रही, तो "ओपन वॉर" होगा।

पाकिस्तानी मीडिया ने बताया कि इस्लामाबाद एक "थर्ड-पार्टी ओवरसाइट स्ट्रक्चर" भी स्थापित करना चाहता है, जिसकी सह-अध्यक्षता संभावित रूप से तुर्की और कतर करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह आवश्यक है कि हम बातचीत और समझौते के माध्यम से तनाव को कम करें। ईरान की मध्यस्थता की पेशकश एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसे लागू करने के लिए सभी पक्षों को सहयोग करना होगा।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान की मध्यस्थता का क्या महत्व है?
ईरान की मध्यस्थता का महत्व इस संघर्ष को समाप्त करने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने में है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बातचीत में क्या समस्याएँ हैं?
बातचीत में मुख्य समस्याएँ दोनों देशों के दृष्टिकोण में अंतर और सुरक्षा चिंताओं से संबंधित मतभेद हैं।
क्या ईरान की भूमिका संघर्ष में प्रभावी हो सकती है?
हां, यदि सभी पक्ष ईरान की मध्यस्थता स्वीकार करते हैं, तो यह संघर्ष को समाप्त करने में मदद कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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