ईरान की शांति की चाह: संघर्ष विराम के लिए शर्तें मानने पर स्थायी समाधान संभव: इलाही
सारांश
Key Takeaways
- ईरान शांति चाहता है।
- संघर्ष विराम की घोषणा की गई है।
- न्यूक्लियर वेपन के खिलाफ ईरान का स्पष्ट रुख।
- अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
- स्थायी समाधान के लिए शर्तों की आवश्यकता।
दिल्ली, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ईरान में संघर्ष विराम की घोषणा की व्यापक प्रशंसा की जा रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक ट्रुथ सोशल पोस्ट के माध्यम से इस बात की जानकारी दी। ईरान ने भी 2 हफ्तों की अस्थायी सहमति दी है। बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में कुछ प्रश्नों के उत्तर खोजे जा रहे हैं। भारत में ईरानी सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने ईरान की सोच और प्रयासों के बारे में जानकारी साझा की। राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में इलाही ने स्पष्ट किया कि ईरान ये संघर्ष नहीं चाहता था और हमने कभी भी न्यूक्लियर वेपन के समर्थक नहीं रहे।
डॉ. इलाही का मानना है कि अमेरिका संघर्ष विराम के लिए मजबूर हुआ। उन्होंने इसके पीछे की वजहें भी बताईं। उन्होंने कहा, "यूएस को संघर्ष विराम का ऐलान करने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि वे जंग जारी नहीं रख सकते थे। उन्होंने बहुत बड़ी गलती की थी। पिछले 41 दिनों में वे जंग रोकना चाहते थे, लेकिन वे ऐसा नहीं कर सके। अंततः, जब उन्हें एहसास हुआ कि वे इस युद्ध को जारी नहीं रख सकते और हारेंगे, तो उन्होंने सीजफायर के नाम पर इस युद्ध को रोकने का ऐलान किया।"
इलाही ने कहा, "मुझे लगता है कि शुरू से ही हम जंग नहीं चाहते थे। यह जंग हम पर थोपी गई थी। दूसरी बात, हमें एहसास हुआ कि इस जंग के कारण विभिन्न देशों के कई लोगों को नुकसान हुआ है, और हम ऐसा नहीं चाहते थे।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि सीजफायर से कोई स्थायी हल निकल सकता है? तो ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि बोले, "अगर वे हमारी शर्तें मान लेते हैं, तो हां, यह इस जंग का अंत होगा।"
अमेरिका का आरोप कि ईरान यूरेनियम संवर्द्धन में लगा है, पर ईरान का क्या मत है? डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने अपने सर्वोच्च नेता की बात याद करते हुए कहा, "...शुरू से ही, शायद 30 साल या उससे भी पहले, हमारे सुप्रीम लीडर ने साफ-साफ ऐलान किया था कि परमाणु हथियार हमारे धर्म के हिसाब से हराम है, ये हमारे पास नहीं हो सकता। हम नहीं चाहते, हम नहीं चाहते थे, हम अभी नहीं चाहते और भविष्य में भी नहीं, कभी नहीं, हम न्यूक्लियर वेपन नहीं चाहते।"
आखिर जो संकट पैदा हुई उसकी वजह क्या रही? गल्फ देशों ने भी ईरान पर कुछ आरोप लगाए हैं। इस पर इलाही ने कहा, "इस इलाके में झगड़े तब से पैदा हुए जब से अमेरिका 7,000 मील दूर से इस इलाके में आया और बहुत सारे झगड़े और मुश्किलें लेकर आया। यह पहली बात है। दूसरी बात जो मैं ऐलान करना चाहता हूं, वह यह है कि हम जानते हैं कि अमेरिका हम पर न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया, वाशिंगटन से हमला नहीं करता। वे बेस कहां हैं जिनका इस्तेमाल करके अमेरिका ने हम पर हमला किया? बिल्कुल, वे बेस इसी अरब देश में थे।"
ईरान को उम्मीद है कि दुनिया समझ चुकी है कि इस क्षेत्र को छेड़ा तो नुकसान किसी एक को नहीं, पूरी दुनिया को उठाना पड़ सकता है। इलाही ने उम्मीद जताई कि वैश्विक संकट खत्म हो जाएगा। बोले, "मुझे उम्मीद है कि यह ग्लोबल संकट खत्म हो जाएगा, लेकिन दूसरे देशों को एहसास है कि अगर इस खाड़ी, फारस की खाड़ी में लड़ाई और संकट होता है, तो उन्हें नुकसान होगा। इसलिए अब उन्हें एक साथ आवाज उठानी होगी और इस इलाके में किसी भी देश पर हमला करने से रोकना होगा।"