क्या जापान के रक्षा मंत्री ने चीन-रूस के संयुक्त बॉम्बर उड़ानों को धमकी बताया?
सारांश
Key Takeaways
- चीन और रूस की ज्वाइंट बॉम्बर उड़ानें सुरक्षा चिंता का विषय हैं।
- जापान ने संभावित उल्लंघनों को रोकने के लिए फाइटर जेट भेजे।
- यह पहली बार है जब दोनों देशों ने शिकोकू के पास संयुक्त उड़ान भरी।
- यह घटना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती उत्पन्न कर सकती है।
- जापान को अपनी सुरक्षा के लिए सतर्क रहने की आवश्यकता है।
टोक्यो, 16 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने मंगलवार को पश्चिमी जापान के शिकोकू क्षेत्र के निकट चीन और रूस की संयुक्त बॉम्बर उड़ान पर अपनी चिंता व्यक्त की और इसे शक्ति का प्रदर्शन बताया। स्थानीय मीडिया ने उनके बयान के हवाले से यह जानकारी दी है।
जापान टुडे के अनुसार, कोइज़ुमी ने इस मामले में पूछे गए सवाल का सीधे तौर पर जवाब नहीं दिया, लेकिन पत्रकारों से कहा, "मैं चीन और रूस के इरादों के बारे में पक्का जवाब नहीं दे सकता, लेकिन कह सकता हूं कि उनकी बार-बार होने वाली ज्वाइंट बॉम्बर उड़ानें जापान के आसपास उनकी गतिविधियों के विस्तार को दर्शाती हैं। इन हरकतों को धमकी के तौर पर देखा जाना चाहिए।"
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, संयुक्त अभ्यास के दौरान दो रूसी टीयू-95 बॉम्बर जापान सागर से उड़ान भरते हुए पूर्वी चीन सागर के ऊपर दो चीनी एच-6 बॉम्बर से मिले, जिसके बाद वे 9 दिसंबर को शिकोकू के मुख्य द्वीप के पास प्रशांत महासागर की दिशा में आगे बढ़ गए।
कोइज़ुमी ने कहा कि यह नवंबर 2024 के बाद दोनों देशों की पहली ज्वाइंट बॉम्बर उड़ान थी और कुल मिलाकर नौवीं। उन्होंने कहा कि इस कदम से जापान को संभावित एयरस्पेस उल्लंघन को रोकने के लिए फाइटर जेट भेजने पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि यह चीन और रूस की शिकोकू (द्वीप) के पास आने वाली पहली ज्वाइंट बॉम्बर उड़ान थी।
कोइज़ुमी ने यह भी दोहराया कि 6 दिसंबर को जापान के ओकिनावा प्रांत के पास एक चीनी जे-15 विमान द्वारा एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के एफ-15 पर लगभग 30 मिनट तक रडार लॉक करना एक "खतरनाक हरकत" थी।
चीन की नौसेना के लड़ाकू विमानों ने 6 दिसंबर को ओकिनावा के दक्षिण-पूर्व में जापानी एफ-15 जेट्स पर दो बार फायर-कंट्रोल रडार लॉक किया था, जिसे लेकर जापान ने आपत्ति जताई थी।
9 दिसंबर के रूस-चीन के संयुक्त अभ्यास के बाद अमेरिका और जापान ने भी पैसिफिक में ज्वाइंट ड्रिल की थी।