क्या अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को जापान के सैन्यवाद के फिर से शुरू होने से सतर्क रहना चाहिए?
सारांश
Key Takeaways
- जापान के सैन्यवाद का पुनरुत्थान चिंता का विषय है।
- थाईवान मुद्दा चीन का आंतरिक मामला है।
- अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को सतर्क रहना चाहिए।
बीजिंग, २९ नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने हाल ही में थाईवान के संदर्भ में विवादास्पद बयान दिया है। इस पर कई देशों के नागरिकों ने स्पष्ट किया कि थाईवान का मुद्दा चीन का आंतरिक मामला है। साने ताकाइची के बयान से यह स्पष्ट है कि जापान अपने अतीत में किए गए फासीवादी अपराधों को लेकर कोई खेद नहीं महसूस करता। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को जापान के सैन्यवाद के पुनरुत्थान से सतर्क रहना आवश्यक है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने २८ नवंबर को बताया कि पाकिस्तान एक चीन की नीति को दृढ़ता से समर्थन करता है और मानता है कि चीनी जन गणराज्य ही पूरे चीन का प्रतिनिधित्व करने वाली एकमात्र वैध सरकार है। थाईवान चीन की प्रादेशिक भूमि का एक अभिन्न हिस्सा है। पाकिस्तान 'दो चीन' या 'एक चीन एक थाईवान' की किसी भी कोशिश का विरोध करता है।
इराक के चीन मैत्री संघ के अध्यक्ष हैदर रुबाई ने कहा कि थाईवान के मुद्दे पर जापान का बयान पूरी तरह से निराधार है और यह एक अनुचित एवं अस्वीकार्य हस्तक्षेप है। इराक चीन की प्रभुसत्ता का सम्मान करता है और अंतर्राष्ट्रीय मामलों में चीन की सक्रिय भूमिका की प्रशंसा करता है। थाईवान चीन की प्रादेशिक भूमि का एक अभिन्न हिस्सा है। इराक जापान सहित अन्य देशों द्वारा चीन के आंतरिक मामलों में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप को अस्वीकार करता है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)