26 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या पारंपरिक बहुपक्षवाद का युग समाप्त हो गया है: अमेरिकी विदेश मंत्री?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या पारंपरिक बहुपक्षवाद का युग समाप्त हो गया है: अमेरिकी विदेश मंत्री?

सारांश

क्या अमेरिका का पारंपरिक बहुपक्षवाद का युग समाप्त हो चुका है? अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की नई घोषणा ने वैश्विक संगठनों की भूमिका पर सवाल उठाया है। जानिए इस महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव के पीछे की वजहें और अमेरिका की नई विदेश नीति की दिशा।

मुख्य बातें

पारंपरिक बहुपक्षवाद का युग अब समाप्त हो चुका है।
अमेरिका ने 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकलने का निर्णय लिया है।
रूबियो ने नैतिक उल्लंघनों की आलोचना की।
इससे वैश्विक संगठनों की वैधता पर प्रश्न उठेंगे।
अमेरिका ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है।

वॉशिंगटन, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका ने शनिवार को घोषणा की है कि पारंपरिक बहुपक्षवाद (ट्रैडिशनल मल्टीलेट्रलिज़्म) का युग अब समाप्त हो चुका है। यह घोषणा ट्रंप प्रशासन द्वारा 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकलने के फैसले के कुछ ही दिनों बाद की गई है, जिन्हें अमेरिका ने अपव्ययी, अप्रभावी और अपने राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताया है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि जिसे आज “अंतरराष्ट्रीय प्रणाली” कहा जाता है, वह सैकड़ों अपारदर्शी अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भरी हुई है, जिनके दायित्व एक-दूसरे से टकराते हैं, काम दोहराए जाते हैं, नतीजे कमजोर हैं और वित्तीय व नैतिक प्रशासन भी खराब है।

रूबियो ने अपने सबस्टैक पोस्ट में लिखा, “अंतरराष्ट्रीय नौकरशाहियों को बिना शर्त चेक देने का दौर अब खत्म हो चुका है।”

इस सप्ताह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक राष्ट्रपति ज्ञापन जारी कर 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका के बाहर निकलने के फैसले को औपचारिक रूप दिया। प्रशासन के अनुसार ये संगठन या तो अनावश्यक हैं, ठीक से प्रबंधित नहीं हैं, फिजूलखर्ची करते हैं या फिर ऐसे हितों के प्रभाव में हैं जो अमेरिका की संप्रभुता, स्वतंत्रता और समृद्धि के खिलाफ हैं।

विदेश मंत्री ने कहा कि ऐसे संगठनों में अमेरिका का निवेश अब न तो अमेरिकी करदाताओं के हित में है और न ही वैश्विक समस्याओं के समाधान में सहायक। उन्होंने कहा, “ऐसे संस्थानों में अमेरिकी जनता की मेहनत की कमाई लगाना अब स्वीकृत नहीं है, जो परिणाम, जवाबदेही या हमारे राष्ट्रीय हितों का सम्मान तक नहीं दिखा पाते।”

रूबियो ने आरोप लगाया कि अमेरिका की निरंतर भागीदारी इन संस्थानों को केवल वैधता देती है, जबकि इनका मॉडल अरबों लोगों के लिए विफल साबित हुआ है, खासकर किफायती ऊर्जा, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय संप्रभुता जैसे मुद्दों पर।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से जुड़े कई संगठनों को उदाहरण के तौर पर पेश किया। रूबियो ने यूएन पॉपुलेशन फंड पर जबरन गर्भपात को वित्तपोषित करने जैसे नैतिक उल्लंघनों का आरोप लगाया, वहीं यूएन वीमेन की आलोचना करते हुए कहा कि वह “महिला की परिभाषा तक स्पष्ट नहीं कर पाया है।”

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन पर भी पश्चिमी तट और गाजा में “क्लाइमेट अलार्मिस्ट और ऊर्जा-विरोधी निवेश” पर लाखों डॉलर खर्च करने का आरोप लगाया। इसके अलावा, उन्होंने अफ्रीकी मूल के लोगों पर संयुक्त राष्ट्र के स्थायी मंच पर वैश्विक क्षतिपूर्ति (रेपरेशन्स) के समर्थन में “खुले तौर पर नस्लवादी नीतियां” अपनाने का आरोप लगाया।

रूबियो ने कहा, “इन संगठनों का रिकॉर्ड लगातार विफलताओं से भरा है, अगर इसे सीधी दुर्भावना न कहा जाए तो। अमेरिकी जनता, हमारे साझेदार और दुनिया भर के वे अरबों लोग जो अमेरिका से नेतृत्व की उम्मीद करते हैं, इससे बेहतर के हकदार हैं।”

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, जिन संगठनों से बाहर निकलने का फैसला किया गया है, उनका चयन लंबी समीक्षा प्रक्रिया के बाद किया गया, जिसमें उनके उद्देश्य, कार्य, दक्षता, प्रभावशीलता और अमेरिका के राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने की क्षमता को परखा गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। हालांकि यह बदलाव कुछ संगठनों की वैधता पर प्रश्न चिह्न खड़ा करता है, लेकिन यह अमेरिकी नीति के प्रति एक ठोस दृष्टिकोण को दर्शाता है।
RashtraPress
26 जून 2026
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 महीने पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले