22 अक्टूबर 2026
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चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग की पुतिन से सेंट पीटर्सबर्ग में मुलाकात, SCO-ब्रिक्स सहयोग पर जोर

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चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग की पुतिन से सेंट पीटर्सबर्ग में मुलाकात, SCO-ब्रिक्स सहयोग पर जोर

सारांश

चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग और राष्ट्रपति पुतिन की सेंट पीटर्सबर्ग में मुलाकात महज शिष्टाचार नहीं थी — यह पश्चिमी दबाव के बीच दोनों शक्तियों द्वारा अपनी रणनीतिक धुरी की सार्वजनिक पुष्टि थी। SCO, ब्रिक्स और 'ग्लोबल साउथ' एकता पर जोर यह संकेत देता है कि बीजिंग-मॉस्को गठजोड़ बहुपक्षीय मोर्चे पर और सक्रिय होने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने 21 अक्टूबर 2026 को सेंट पीटर्सबर्ग में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से द्विपक्षीय वार्ता की।
ली छ्यांग ने चीन-रूस संबंधों को वैश्विक स्थिरता की 'अनमोल शक्ति' बताया और ऊर्जा, व्यापार, निवेश व परिवहन में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई।
दोनों देशों ने SCO और ब्रिक्स मंचों पर सहयोग घनिष्ठ करने और 'ग्लोबल साउथ' एकता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
पुतिन ने चीन को रूस का 'सबसे घनिष्ठ और विश्वसनीय साझेदार' बताया; संबंध किसी तीसरे पक्ष से प्रभावित नहीं होने की बात कही।
रूस 2026 APEC शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है; 2027 में ब्रिक्स अध्यक्षता चीन के पास आएगी — दोनों आयोजनों पर सहयोग की सहमति बनी।

चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने 21 अक्टूबर 2026 को सेंट पीटर्सबर्ग में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से द्विपक्षीय वार्ता की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब वैश्विक स्तर पर एकतरफावाद और शक्तिशाली देशों के दबदबे को लेकर तनाव बढ़ रहा है। दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने तथा बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

ली छ्यांग का बयान: स्थिरता की 'अनमोल शक्ति'

ली छ्यांग ने वार्ता में कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में कठिन बदलावों के बीच चीन और रूस के बीच घनिष्ठ संबंध वैश्विक स्थिरता के लिए एक अनमोल शक्ति हैं। उन्होंने रूस के साथ रणनीतिक संपर्क मजबूत करने, आपसी राजनीतिक विश्वास बढ़ाने और व्यापक पारस्परिक लाभ वाले सहयोग का विस्तार करने की इच्छा जताई।

ली छ्यांग ने ऊर्जा, संसाधन, व्यापार, निवेश और परिवहन क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को और प्रगाढ़ बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की आर्थिक पूरकता का लाभ उठाते हुए दोनों राष्ट्रों की समृद्धि बढ़ाई जानी चाहिए।

बहुपक्षीय मंच और 'ग्लोबल साउथ' एकता

ली छ्यांग ने यह भी कहा कि वर्तमान विश्व में एकतरफावाद और प्रभुत्ववाद फैल रहा है। उन्होंने चीन की ओर से शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों पर रूस के साथ सहयोग घनिष्ठ करने की बात कही। उनके अनुसार, अधिक-से-अधिक 'ग्लोबल साउथ' देशों को एकजुट कर समान हितों तथा निष्पक्षता और न्याय की रक्षा की जाएगी।

गौरतलब है कि 2026 में एपेक (APEC) अनौपचारिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी रूस कर रहा है, और अगले वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता चीन के पास आने वाली है — दोनों पक्षों ने इन आयोजनों को सफल बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

पुतिन का रुख: 'सबसे घनिष्ठ और विश्वसनीय साझेदार'

राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस-चीन संबंध समानता, सम्मान, आपसी लाभ और एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता पर आधारित हैं, और ये संबंध किसी तीसरे पक्ष के दबाव या अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के परिवर्तन से प्रभावित नहीं होते। पुतिन ने कहा, 'चीन रूस का सबसे घनिष्ठ और विश्वसनीय साझेदार था, है और हमेशा रहेगा।'

पुतिन ने चीन-रूस शिक्षा वर्ष के सफल आयोजन और जन-संपर्क विस्तार में सहयोग की बात भी कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस 2026 के APEC अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में चीन की सक्रिय भागीदारी का स्वागत करता है और अगले वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता में चीन का समर्थन करता है।

संदर्भ और महत्व

यह वार्ता ऐसे वैश्विक संदर्भ में हुई है जब पश्चिमी देशों और रूस के बीच यूक्रेन युद्ध को लेकर तनाव अभी भी बना हुआ है और चीन-अमेरिका व्यापार तनाव में कोई ठोस कमी नहीं आई है। विश्लेषकों के अनुसार, यह बैठक बीजिंग और मॉस्को द्वारा पश्चिमी दबाव के मद्देनजर अपनी रणनीतिक धुरी को सार्वजनिक रूप से पुष्ट करने का प्रयास है। यह ऐसे समय में आई है जब SCO और ब्रिक्स जैसे मंचों पर 'ग्लोबल साउथ' देशों को एकजुट करने की कोशिशें तेज हो रही हैं।

आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच ऊर्जा और व्यापार समझौतों पर प्रगति तथा 2027 ब्रिक्स अध्यक्षता के एजेंडे पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अलग-अलग कारणों से पश्चिमी दबाव में हैं — और यह संयोग नहीं है। 'एकतरफावाद और प्रभुत्ववाद' जैसे शब्द सीधे अमेरिका पर निशाना हैं, भले ही नाम न लिया गया हो। असली सवाल यह है कि ऊर्जा, व्यापार और SCO-ब्रिक्स सहयोग की बातें कितनी ठोस नीतिगत कदमों में बदलती हैं — क्योंकि इस तरह की उच्चस्तरीय बैठकों के बाद ऐलानों और जमीनी अमल के बीच अक्सर बड़ा अंतर देखा गया है। भारत के लिए यह वार्ता इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह SCO और ब्रिक्स दोनों का सदस्य है — और बीजिंग-मॉस्को धुरी का मजबूत होना नई दिल्ली की संतुलन-नीति को और जटिल बना सकता है।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ली छ्यांग और पुतिन की मुलाकात कहाँ और कब हुई?
यह मुलाकात 21 अक्टूबर 2026 को रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हुई। चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने दोपहर बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से द्विपक्षीय वार्ता की।
इस मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
दोनों नेताओं ने ऊर्जा, व्यापार, निवेश और परिवहन में सहयोग, SCO व ब्रिक्स मंचों पर समन्वय, चीन-रूस शिक्षा वर्ष और 'ग्लोबल साउथ' एकता पर चर्चा की। इसके साथ ही 2026 APEC और 2027 ब्रिक्स अध्यक्षता के बारे में भी सहमति बनी।
पुतिन ने चीन के बारे में क्या कहा?
पुतिन ने चीन को रूस का 'सबसे घनिष्ठ और विश्वसनीय साझेदार' बताया। उन्होंने कहा कि रूस-चीन संबंध समानता और आपसी लाभ पर आधारित हैं और किसी तीसरे पक्ष या अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से प्रभावित नहीं होते।
इस वार्ता का वैश्विक राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पश्चिमी देशों और रूस के बीच यूक्रेन को लेकर तनाव जारी है और चीन-अमेरिका व्यापार विवाद भी अनसुलझा है। दोनों देशों द्वारा SCO और ब्रिक्स के जरिए 'ग्लोबल साउथ' को एकजुट करने की कोशिश पश्चिमी नेतृत्व वाली विश्व व्यवस्था के लिए एक सीधी चुनौती मानी जा रही है।
ब्रिक्स 2027 की अध्यक्षता किसके पास होगी?
2027 में ब्रिक्स की अध्यक्षता चीन के पास होगी। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने इस अवसर पर ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में चीन के लिए अपने समर्थन की घोषणा की।
राष्ट्र प्रेस
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