चीनी PM ली छ्यांग सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचे, रूस के मिशुस्टिन से नियमित द्विपक्षीय बैठक आज
सारांश
मुख्य बातें
चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग रूसी प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्टिन के निमंत्रण पर 20 अक्टूबर 2026 की रात चार्टर विमान से सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचे, जहाँ दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच नियमित द्विपक्षीय बैठक आयोजित होनी है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब चीन-रूस संबंध वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव की पृष्ठभूमि में और अधिक सुदृढ़ होते दिख रहे हैं।
स्वागत एवं आगमन
हवाई अड्डे पर रूसी उपप्रधानमंत्री दिमित्री चेर्निशेंको और रूस में चीन के राजदूत चांग हानहुइ ने ली छ्यांग की अगवानी की। यह औपचारिक स्वागत दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद की निरंतरता को रेखांकित करता है।
ली छ्यांग के मुख्य वक्तव्य
ली छ्यांग ने इस अवसर पर कहा कि चीन और रूस की मित्रता की राह में दोनों देशों ने गठबंधन न बनाने, आपसी टकराव न करने और किसी तीसरे पक्ष को निशाना न बनाने के सिद्धांत पर आधारित सहअस्तित्व का मार्ग अपनाया है। उन्होंने कहा कि इस नीति ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को निरंतर आगे बढ़ाया और प्रमुख देशों के संबंधों की एक मिसाल कायम की है।
ली छ्यांग ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में हाल के वर्षों में चीन-रूस संबंध और अधिक सुदृढ़ हुए हैं। उन्होंने द्विपक्षीय सहयोग को 'गहरे, व्यावहारिक और लचीले' स्वरूप में विकसित करने की चीन की इच्छा व्यक्त की।
साझेदारी की व्यापक रूपरेखा
ली छ्यांग ने कहा कि चीन रूस के साथ मिलकर 'नये युग की चीन-रूस सर्वांगीण रणनीतिक समन्वय साझेदारी' में नई उपलब्धियाँ हासिल करना चाहता है। उनके अनुसार, इस साझेदारी का उद्देश्य दोनों देशों की जनता को कल्याण प्रदान करने के साथ-साथ विश्व शांति और विकास में स्थिरता व निश्चितता जोड़ना है।
यात्रा की पृष्ठभूमि
ली छ्यांग यह यात्रा ताजिकिस्तान की औपचारिक यात्रा और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक में भाग लेने के बाद सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचे हैं। इस प्रकार उनकी यह यात्रा एक व्यापक क्षेत्रीय कूटनीतिक दौरे का हिस्सा है।
आगे की संभावनाएँ
गौरतलब है कि चीन और रूस के प्रधानमंत्रियों की यह नियमित बैठक दोनों देशों के बीच संस्थागत संवाद तंत्र का हिस्सा है। इस बैठक में व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। विश्लेषकों के अनुसार, वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में यह बैठक दोनों देशों के आर्थिक और कूटनीतिक एजेंडे की दिशा तय करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।