क्या पाकिस्तान में 27वां संशोधन वकीलों के उग्र प्रदर्शन का कारण बना?

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क्या पाकिस्तान में 27वां संशोधन वकीलों के उग्र प्रदर्शन का कारण बना?

सारांश

पाकिस्तान में 27वें संशोधन ने वकीलों के बीच भारी विरोध को जन्म दिया है। कराची बार एसोसिएशन के वकीलों ने सिंध हाई कोर्ट में प्रदर्शन किया, जो कि पुलिस और वकीलों के बीच झड़प का कारण बना। क्या यह संशोधन देश की न्यायिक प्रणाली में बदलाव ला रहा है?

Key Takeaways

  • 27वां संशोधन सेना को मजबूत करता है।
  • कराची बार एसोसिएशन का प्रदर्शन न्यायपालिका की स्वायत्तता के लिए है।
  • वकीलों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं।
  • संशोधन के खिलाफ पूर्व जजों का भी विरोध।
  • हड़ताल का निर्णय केबीए द्वारा लिया गया।

कराची, 22 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान में सेना को मजबूत करने और अन्य प्रशासनिक तथा संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने वाले 27वें संशोधन के खिलाफ कराची बार एसोसिएशन (केबीए) के वकीलों ने शनिवार को सिंध हाई कोर्ट (एसएचसी) में जोरदार प्रदर्शन किया। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एसएचसी परिसर में वकीलों और पुलिस के बीच जबरदस्त झड़पें हुईं। पुलिस का कहना है कि वकीलों ने उनकी यूनीफॉर्म तक फाड़ दी।

यह विवादास्पद संशोधन फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट (एफसीसी) के गठन का कारण बना है, जिसे संसद ने विपक्ष के कड़े विरोध के बावजूद पारित किया।

प्रमुख मीडिया संस्थान डॉन ने कुछ विशेषज्ञों के हवाले से कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट (एससी) को हटाने और एफसीसी को स्थापित करने का एक प्रयास है।

संशोधन के प्रभावों का जिक्र करते हुए, पूर्व और वर्तमान जजों तथा वकीलों ने भी इस पर विरोध प्रकट किया है। 13 नवंबर को संशोधन लागू होने के कुछ घंटे बाद, एससी के दो जजों ने इसके खिलाफ आपत्ति जताते हुए इस्तीफा दिया था। ये दो जज अतहर मिनल्लाह और मंसूर अली शाह थे।

शनिवार को, वकीलों ने एसएचसी परिसर के बाहर नारेबाजी करते हुए विरोध शुरू किया और बाद में हाई कोर्ट के परिसर में प्रवेश किया। डॉन के अनुसार, कुछ वकील पुलिस से भिड़ते हुए दिखाई दिए। झड़प के बाद, पुलिस को पीछे हटना पड़ा और वकीलों को प्रदर्शन जारी रखने की अनुमति दी गई। कुछ पुलिस अधिकारियों को हल्की चोटें आई हैं।

वकील सिंध हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के हॉल में घुस गए और सरकार के खिलाफ नारे लगाते रहे। बाद में, बिजली बंद होने के कारण उन्होंने बार रूम के बाहर अपना प्रदर्शन जारी रखा।

केबीए ने पिछले सप्ताह रिटायर्ड जजों के समर्थन में समस्त सबऑर्डिनेट ज्यूडिशियरी में एक दिन की हड़ताल की थी। इसने सोमवार को भी हड़ताल की थी, जिसके दौरान मामलों की सुनवाई नहीं हो सकी।

केबीए ने पहले ही घोषणा की थी कि मंगलवार से शनिवार (आज) तक, “सुबह 11 बजे से टोकन हड़ताल की जाएगी।”

Point of View

यह स्थिति पाकिस्तान के न्यायिक ढांचे के लिए चुनौतीपूर्ण है। 27वें संशोधन के परिणाम देश के लिए दूरगामी प्रभाव डाल सकते हैं। न्यायपालिका की स्वायत्तता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, ताकि नागरिकों के अधिकार सुरक्षित रहें।
NationPress
29/11/2025

Frequently Asked Questions

27वें संशोधन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
27वें संशोधन का उद्देश्य पाकिस्तान में सेना को मजबूत करना और अन्य प्रशासनिक इकाइयों को कमजोर करना है।
वकीलों का प्रदर्शन क्यों हुआ?
वकीलों ने 27वें संशोधन के खिलाफ विरोध जताते हुए प्रदर्शन किया, जो उनके अनुसार न्यायपालिका की स्वायत्तता को खतरे में डाल रहा है।
क्या इस प्रदर्शन में पुलिस की भागीदारी थी?
हाँ, प्रदर्शन के दौरान वकीलों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, जिसमें कुछ पुलिस अधिकारियों को चोटें आईं।
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