अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 18-22 अक्टूबर को मुंबई और जामनगर दौरे पर, ऊर्जा सहयोग एजेंडे में
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले सप्ताह भारत दौरे पर आएंगे और मुंबई तथा जामनगर की यात्रा करेंगे। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी मीडिया नोट के अनुसार, यह दौरा 17 से 22 अक्टूबर 2026 के बीच होगा, जिसमें ऊर्जा सहयोग, रणनीतिक साझेदारी और व्यापारिक निवेश प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं। यह दौरा ऐसे नाज़ुक समय में हो रहा है जब रूसी ऊर्जा खरीदारों पर अमेरिकी प्रतिबंधों की 18 अक्टूबर की समय सीमा बीत चुकी होगी।
दौरे का कार्यक्रम और उद्देश्य
अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने बयान में कहा, 'विदेश मंत्री इस साल अपनी दूसरी आधिकारिक यात्रा के लिए भारत जाएंगे। वह वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मिलेंगे ताकि अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत किया जा सके, क्षेत्रीय और वैश्विक हालात पर विचारों का आदान-प्रदान हो सके और बेहतर ऊर्जा सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की जा सके।' विभाग ने यह भी बताया कि रुबियो व्यापारिक निवेश और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए व्यापारिक नेताओं से भी मुलाकात करेंगे।
गौरतलब है कि इस 'ऐतिहासिक यात्रा' में रुबियो 200 से अधिक व्यापारिक नेताओं वाले अमेरिकी वाणिज्यिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे, जो विदेश विभाग के अनुसार अमेरिका और मध्य एशिया के बीच वाणिज्यिक सहयोग के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक होगा।
जामनगर को क्यों चुना गया
गुजरात का जामनगर शहर रिलायंस इंडस्ट्रीज के रिफाइनिंग हब का केंद्र है, जो दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में से एक माना जाता है। हालाँकि, विदेश विभाग ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया कि इस शहर को दौरे के लिए विशेष रूप से क्यों चुना गया। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, जामनगर का दौरा अमेरिका की उस रणनीतिक मंशा का संकेत हो सकता है जिसमें भारत को रूसी तेल के विकल्प की ओर प्रोत्साहित करना शामिल है।
रूसी ऊर्जा और ग्राहम एक्ट का दबाव
यह दौरा 18 अक्टूबर की उस समय सीमा के ठीक बाद हो रहा है जो ग्राहम एक्ट के तहत रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर शुल्क लगाने से संबंधित है। भारत वर्ष 2022 से रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल रहा है, और यह खरीद वॉशिंगटन के साथ तनाव का लगातार विषय बनी हुई है। इस पृष्ठभूमि में, रुबियो का दौरा केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि ऊर्जा नीति पर सीधे संवाद का मंच बनने की संभावना रखता है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका संबंधों में रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी सहयोग में तेज़ी आई है, लेकिन ऊर्जा खरीद का मुद्दा एक खुला प्रश्नचिह्न बना हुआ है।
समरकंद से दौरे की शुरुआत
भारत पहुँचने से पहले रुबियो उज्बेकिस्तान के समरकंद में C5+1 मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लेंगे। C5+1 एक राजनयिक मंच है जो अमेरिका और मध्य एशिया के पाँच गणराज्यों — कजाकिस्तान, किर्गिज़ गणराज्य, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान — को एक साथ लाता है। रुबियो इन देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे।
भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी की दिशा
उल्लेखनीय है कि मई 2026 में रुबियो ने भारत को 'महान भागीदार' बताया था और कहा था कि उनकी यात्रा ऊर्जा और क्वाड पर केंद्रित होगी। भारत और अमेरिका अपने संबंधों को रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा को कवर करने वाली एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के रूप में परिभाषित करते हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या यह दौरा रूसी ऊर्जा के मुद्दे पर कोई ठोस समझौते की दिशा में आगे बढ़ता है या केवल कूटनीतिक संवाद तक सीमित रहता है।