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रूस से तेल खरीद पर भारत को अमेरिकी प्रतिबंध से राहत, SRII एक्ट के तहत कार्रवाई स्थगित

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रूस से तेल खरीद पर भारत को अमेरिकी प्रतिबंध से राहत, SRII एक्ट के तहत कार्रवाई स्थगित

सारांश

रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंध का खतरा टला — पर यह महज कूटनीतिक सौजन्य नहीं है। रुबियो की यात्रा, 300 अरब डॉलर का जामनगर निवेश और अमेरिकी मध्यावधि चुनाव — ये तीन धाराएँ मिलकर भारत को राहत दिला रही हैं। पूर्व राजदूत अशोक सज्जनहार के अनुसार, यह रणनीतिक स्थगन है, स्थायी छूट नहीं।

मुख्य बातें

SRII एक्ट ( 18 सितंबर को पारित) के तहत एक महीने में कार्रवाई का प्रावधान था, लेकिन अमेरिका ने भारत पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया।
पूर्व राजदूत अशोक सज्जनहार के अनुसार, चीन और भारत — दोनों को फिलहाल कार्रवाई से राहत मिली है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान हिंद-प्रशांत और द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर चर्चा होगी।
रिलायंस के मुकेश अंबानी द्वारा अमेरिका में 300 अरब डॉलर के संभावित निवेश को प्रतिबंध स्थगन का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव, टेक्सास सहित पाँच-छह 'टॉस-अप' सीटें — भारतीय निवेश ट्रंप के लिए राजनीतिक लाभ का जरिया।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते को 'अंतिम पड़ाव' पर बताया।

नई दिल्ली में 17 अक्टूबर को पूर्व राजदूत अशोक सज्जनहार ने स्पष्ट किया कि रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर मंडरा रहा अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा फिलहाल टल गया है। 18 सितंबर को अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित सैंक्शंस ऑन रशिया एंड ईरान एक्ट (SRII) के तहत एक महीने के भीतर कार्रवाई का प्रावधान था, लेकिन वाशिंगटन ने रणनीतिक कारणों से इसे स्थगित कर दिया है। यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा, क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक, जामनगर रिफाइनरी से जुड़ा 300 अरब डॉलर का संभावित निवेश और अमेरिकी मध्यावधि चुनाव जैसे कई अहम घटनाक्रम एक साथ जुड़ रहे हैं।

SRII एक्ट और भारत पर उसका असर

पूर्व राजदूत अशोक सज्जनहार के अनुसार, SRII एक्ट के तहत यह प्रावधान है कि जो भी देश रूस या ईरान से तेल खरीदेगा या उनके साथ आर्थिक संबंध बढ़ाएगा, उस पर टैरिफ और प्रतिबंध लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा, 'एक महीने के अंदर इस पर कार्रवाई होनी थी लेकिन अब खबर आई है कि कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।' रूस से तेल खरीदने वाले पाँच सबसे बड़े आयातकों में चीन, भारत, तुर्किए, अज़रबैजान और एक-दो अन्य देश शामिल हैं।

चीन और भारत — दोनों को राहत

सज्जनहार ने बताया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हालिया अमेरिका यात्रा के बाद यह तय हुआ था कि कम से कम दो महीने तक चीन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। उन्होंने कहा, 'सबकी नजर भारत पर थी और अब भारत पर भी कहा गया है कि कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।' यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि अमेरिका अभी कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता दे रहा है।

रुबियो की यात्रा और क्वाड बैठक का महत्व

पूर्व राजदूत के अनुसार, आने वाले दिनों में मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर चर्चा होगी और चारों क्वाड देशों के विदेश मंत्री — जिनमें जापान के विदेश मंत्री भी शामिल हैं — आपस में विचार-विमर्श करेंगे। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने पर भी बातचीत होगी। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिया है कि यह समझौता 'अंतिम पड़ाव' पर पहुँच गया है।

जामनगर निवेश और अमेरिकी मध्यावधि चुनाव का संदर्भ

सज्जनहार ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम में रिलायंस के मुकेश अंबानी द्वारा अमेरिका में 300 अरब डॉलर के संभावित निवेश की भूमिका अहम है, जिसकी घोषणा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ समय पहले की थी। उन्होंने कहा कि इस निवेश में करीब 150 से 200 अरब डॉलर का आयात शामिल होगा और 4 से 5 अरब डॉलर की लागत से वहाँ एक रिफाइनरी भी बनेगी। 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में सीनेट की 35 सीटों पर मतदान होना है, जिनमें पाँच-छह 'टॉस-अप' सीटें हैं। टेक्सास में रिलायंस के संभावित निवेश को ट्रंप प्रशासन के लिए एक राजनीतिक लाभ के रूप में देखा जा रहा है।

आगे क्या होगा

सज्जनहार के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप का यह निर्णय कूटनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर सोची-समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है। उन्होंने कहा, 'अगले दो-चार दिन में जब मार्को रुबियो यहाँ आते हैं तो तब देखा जाएगा कि दोनों देशों के संबंधों को आगे ले जाने में हम कैसे सक्रिय हो पाते हैं।' भारत-अमेरिका संबंधों की यह नई करवट आने वाले हफ्तों में और स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

रणनीतिक है — और इसे भ्रमित नहीं करना चाहिए। SRII एक्ट अभी भी कानून की किताब में है; केवल उसका क्रियान्वयन स्थगित हुआ है। भारत को यह छूट अपनी कूटनीतिक ताकत से नहीं, बल्कि अमेरिकी घरेलू राजनीति — मध्यावधि चुनाव, टेक्सास में निवेश की उम्मीद — की वजह से मिली है। यह उजागर करता है कि भारत की ऊर्जा नीति और विदेश नीति अभी भी वाशिंगटन के आंतरिक चुनावी चक्र के प्रति संवेदनशील है। असली परीक्षा तब होगी जब मध्यावधि चुनाव बीत जाएंगे और जामनगर निवेश की रूपरेखा स्पष्ट होगी — तब देखना होगा कि यह 'स्थगन' स्थायी छूट में बदलता है या नहीं।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SRII एक्ट क्या है और इसका भारत पर क्या असर था?
SRII यानी सैंक्शंस ऑन रशिया एंड ईरान एक्ट, अमेरिकी कांग्रेस द्वारा 18 सितंबर को पारित कानून है, जिसके तहत रूस या ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ और प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। भारत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले शीर्ष पाँच देशों में शामिल है, इसलिए उस पर कार्रवाई की आशंका थी — जो अब फिलहाल स्थगित कर दी गई है।
भारत को अमेरिकी प्रतिबंध से राहत क्यों मिली?
पूर्व राजदूत अशोक सज्जनहार के अनुसार, मार्को रुबियो की भारत यात्रा, क्वाड बैठक, रिलायंस के 300 अरब डॉलर के संभावित अमेरिकी निवेश और 3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव जैसे कारकों ने मिलकर वाशिंगटन को यह निर्णय लेने पर मजबूर किया। अमेरिका अभी भारत के साथ संबंध बेहतर रखना चाहता है, इसलिए कार्रवाई टाली गई है।
जामनगर रिफाइनरी निवेश का इस मामले से क्या संबंध है?
राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की थी कि रिलायंस के मुकेश अंबानी अमेरिका में करीब 300 अरब डॉलर का निवेश करेंगे, जिसमें 150 से 200 अरब डॉलर का आयात और 4 से 5 अरब डॉलर की रिफाइनरी शामिल है। टेक्सास में यह निवेश ट्रंप के लिए मध्यावधि चुनाव में राजनीतिक लाभ का जरिया है, जिससे भारत पर प्रतिबंध लगाना उनके हित में नहीं था।
मार्को रुबियो की भारत यात्रा में किन मुद्दों पर बात होगी?
अशोक सज्जनहार के अनुसार, रुबियो की यात्रा में हिंद-प्रशांत रणनीति, क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक और भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना प्रमुख एजेंडा होगा। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने पहले ही संकेत दिया है कि यह समझौता अंतिम पड़ाव पर है।
क्या भारत पर प्रतिबंध का खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है?
नहीं — पूर्व राजदूत अशोक सज्जनहार के अनुसार यह एक रणनीतिक स्थगन है, स्थायी छूट नहीं। SRII एक्ट अभी भी लागू है और आने वाले हफ्तों में रुबियो की यात्रा और जामनगर निवेश की प्रगति के आधार पर स्थिति और स्पष्ट होगी।
राष्ट्र प्रेस
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