50 वैज्ञानिकों ने दवा-प्रतिरोधी फंगस से मुकाबला करने के लिए 5 उपाय बताए
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। फंगल संक्रमणों का खतरा अब वैश्विक स्तर पर और अधिक गंभीर होता जा रहा है, क्योंकि अनेक प्रकार के फंगस दवाओं के प्रति तेजी से प्रतिरोधक बनते जा रहे हैं। एक हालिया अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यह स्थिति विशेष रूप से उन मरीजों के लिए जानलेवा हो सकती है जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है।
इस अध्ययन का प्रकाशन नेचर मेडिसिन में किया गया है, जिसमें नीदरलैंड्स के रेडबाउड यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट प्रोफेसर पॉल वर्वीज के नेतृत्व में 50 वैज्ञानिकों ने 16 संगठनों के साथ मिलकर कार्य किया है।
शोधकर्ताओं ने वैश्विक आंकड़ों के आधार पर फंगल प्रतिरोध से निपटने के लिए एक पांच-स्तरीय रणनीति तैयार की है। इसमें जागरूकता बढ़ाने, निगरानी को मजबूत करने, संक्रमण नियंत्रण, दवाओं का संतुलित उपयोग और इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना शामिल है।
अध्ययन में यह भी पाया गया है कि फंगस में दवा-प्रतिरोध अस्पतालों में नहीं, बल्कि मुख्य रूप से पर्यावरण में विकसित होता है। कृषि में उपयोग होने वाले फफूंदनाशक और चिकित्सा में प्रयुक्त एंटीफंगल दवाएं संरचना में काफी समान हैं। लंबे समय तक इनका संपर्क में रहकर, फंगस इन दवाओं के खिलाफ प्रतिरोध विकसित कर लेते हैं और फिर हवा के माध्यम से फैलते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति वन हेल्थ दृष्टिकोण की आवश्यकता को उजागर करती है, जिसमें मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण और कृषि को एक साथ लेकर रणनीति बनानी होगी।
अध्ययन में कैंडिडा ऑरिस और एस्परगिलस जैसे खतरनाक फंगल संक्रमणों का उल्लेख किया गया है, जो अस्पतालों और समुदाय दोनों में तेजी से फैल रहे हैं और इलाज को चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं।
माइकेला लैकनर ने कहा कि कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र में एंटीफंगल दवाओं के दोहरे उपयोग को संतुलित करना आवश्यक है। इसके साथ ही, नए एंटीफंगल उपचार और सस्ती जांच तकनीकों में निवेश बढ़ाना भी समय की मांग है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर इस बढ़ते खतरे को जल्द नहीं काबू किया गया, तो यह एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी वैश्विक स्वास्थ्य संकट की पुनरावृत्ति कर सकता है।