क्या विजय दिवस पर शेख हसीना ने 1971 में पराजित ताकतों के उभार पर चेतावनी दी?

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क्या विजय दिवस पर शेख हसीना ने 1971 में पराजित ताकतों के उभार पर चेतावनी दी?

सारांश

बांग्लादेश के विजय दिवस पर शेख हसीना ने चेतावनी दी है कि 1971 में पराजित ताकतें फिर से सक्रिय हो रही हैं। यह बयान देश में एक बार फिर से बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता और मुक्ति संग्राम की विरासत के प्रति चिंता को दर्शाता है। क्या बांग्लादेश की स्वतंत्रता की कहानी को एक बार फिर खतरा है?

Key Takeaways

  • 1971 में पराजित ताकतों का फिर से उभार
  • शेख हसीना की चिंता और चेतावनी
  • मुक्ति संग्राम की विरासत पर हमला
  • स्वतंत्रता सेनानियों की सुरक्षा पर सवाल
  • बांग्लादेश की एकता और मूल्यों का संरक्षण

ढाका, 16 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश के विजय दिवस के संदर्भ में, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने आशंका व्यक्त की है कि 1971 के मुक्ति संग्राम में पराजित ताकतें एक बार फिर सक्रिय हो रही हैं। यह वही संघर्ष था, जिसमें बांग्लादेश ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी स्वतंत्रता हासिल की थी।

शेख हसीना ने बताया कि अवामी लीग के नेतृत्व में नौ महीने तक चले संघर्ष के बाद 16 दिसंबर 1971 को बांग्लादेश को बड़े बलिदानों के साथ सफलता मिली थी और पाकिस्तानी सेना को आत्मसमर्पण करना पड़ा था।

पूर्व पीएम का बयान अवामी लीग के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किया गया। बयान में कहा गया, "जीत के गौरव के साथ, आज यह कहना दुर्भाग्यपूर्ण है कि 1971 की पराजित ताकतें एक बार फिर खड़ी हो गई हैं। भेदभाव विरोधी आंदोलन के नाम पर लोगों को धोखा दिया गया, योजनाबद्ध हिंसा फैल रही है और सत्ता पर अवैध कब्जा किया गया है।"

शेख हसीना ने उल्लेख किया कि वर्ष 2024 में होने वाले विरोध प्रदर्शनों में सबसे पहला हमला बंगबंधु के घर धनमंडी 32 पर हुआ। यही वह ऐतिहासिक स्थान है, जहां से बांग्लादेश की स्वतंत्रता की घोषणा की गई थी। इसके बाद पूरे देश में मुक्ति संग्राम से जुड़े स्मारकों पर हमले किए गए।

उन्होंने बताया, "5 अगस्त को, पहले हमले में खुद बंगबंधु को निशाना बनाया गया। धनमंडी 32 में स्थित ऐतिहासिक घर को आग लगा दी गई; यहीं से बंगबंधु ने स्वतंत्रता की घोषणा की थी। देशभर में, बंगबंधु और मुक्ति संग्राम की मूर्तियों और स्मारकों को तोड़ दिया गया, मुक्ति संग्राम संग्रहालय को लूटा गया, और यहां तक कि हत्या के मैदानों और स्मारकों को भी क्षति पहुंचाई गई।"

शेख हसीना ने मोहम्मद यूनुस की नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि पिछले 17 महीनों में पूरे देश में अराजकता फैली हुई है और मुक्ति संग्राम को निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों पर हमले हो रहे हैं, राष्ट्रपिता के खिलाफ झूठे प्रचार किए जा रहे हैं और मुक्ति संग्राम की महानता को कमजोर दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। मुक्ति संग्राम की पीढ़ी को सबसे खराब पीढ़ी कहा जा रहा है और सज़ायाफ्ता युद्ध अपराधियों को रिहा कर दिया गया है।

विजय दिवस पर बांग्लादेश की जनता को शुभकामनाएं देते हुए और स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, शेख हसीना ने लोगों से अपील की कि वे कठिन समय में भी मुक्ति संग्राम की भावना और मूल्यों को मजबूती से थामे रखें।

उन्होंने विश्वास जताया कि हारी हुई ताकतों को एक बार फिर पराजित किया जाएगा। पूर्व पीएम ने कहा, "हम हारी हुई ताकतों को एक बार फिर हराएंगे। ठीक वैसे ही जैसे 16 दिसंबर, 1971 को हुआ था, बांग्लादेश की जीत एक बार फिर अवामी लीग के नेतृत्व में होगी। आज़ादी की लड़ाई की उपलब्धियों से बने इस बांग्लादेश को मुट्ठी भर धोखेबाजों की साजिशों के कारण बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।"

Point of View

यह स्पष्ट है कि बांग्लादेश की राजनीति में हाल के दिनों में उथल-पुथल देखने को मिली है। शेख हसीना का बयान इस बात का संकेत है कि उन्हें देश की सुरक्षा और स्वतंत्रता की चिंता है। हमें चाहिए कि हम ऐसे समय में एकजुट होकर अपने मूल्यों और स्वतंत्रता की रक्षा करें।
NationPress
08/02/2026

Frequently Asked Questions

शेख हसीना ने विजय दिवस पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि 1971 में पराजित ताकतें फिर से सक्रिय हो गई हैं और देश में अराजकता फैली हुई है।
बंगबंधु के घर पर हुआ हमला कब हुआ?
हुआ हमला 5 अगस्त को बंगबंधु के घर धनमंडी 32 पर हुआ था।
क्या बांग्लादेश की स्वतंत्रता को खतरा है?
शेख हसीना का बयान दर्शाता है कि देश में अस्थिरता बढ़ रही है, जो स्वतंत्रता को खतरे में डाल सकती है।
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