क्या भारतीय सेना ने श्रीलंकाई लोगों की मुसीबत में मदद की?
सारांश
मुख्य बातें
कोलंबो, 12 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। चक्रवाती तूफान ‘दितवाह’ के कारण आई भयंकर बाढ़ के बाद, श्रीलंका के स्थानीय निवासियों ने भारतीय सेना और भारत सरकार के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। ग्रामीणों का कहना है कि तूफान ने उनके घरों, स्कूलों और सड़कों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप पूरा क्षेत्र अलग-थलग पड़ गया।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, “भारतीय सेना और भारत सरकार ने हमारी मदद की और हमारे जीवन को बचाया। हमारा गांव बुरी तरह प्रभावित हुआ था और बच्चों के स्कूल जाने का रास्ता भी बह गया था। ऐसे कठिन समय में भारत ने हर संभव सहायता प्रदान की।”
ज्ञात हो कि भारतीय सेना ने सबसे प्रभावित क्षेत्रों में एक पूर्ण सुसज्जित फील्ड अस्पताल स्थापित किया है, जहां हजारों लोगों को तात्कालिक चिकित्सा सहायता दी जा रही है। कोलंबो से आपदा क्षेत्र तक पहुँचने में सड़कों का बह जाना, पुलों का टूटना और संचार व्यवस्था का ठप होना जैसी चुनौतियों के बावजूद, भारतीय राहत दल ने 18 घंटे की कठिन यात्रा पूरी की।
इन्फ्रास्ट्रक्चर के पूर्ण विनाश के कारण, सेना ने एक खाली पार्किंग स्थल को एक हाई-टेक मेडिकल फैसिलिटी में बदल दिया, जिसे पोर्टेबल जेनरेटर और पुनर्स्थापित संचार केंद्र के माध्यम से संचालित किया गया।
दल का नेतृत्व कर रहे लेफ्टिनेंट कर्नल जगनीत गिल ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच संयुक्त प्रयासों से राहत कार्य को गति मिली है। इंजीनियरों और चिकित्सा टीमों ने रात भर शेल्टर, ऑपरेशन थिएटर, एचवीएसी युक्त मेडिकल टेंट और उन्नत डायग्नोस्टिक सुविधाएं स्थापित कीं।
क्षेत्रीय हालात का त्वरित आकलन करने और मरीजों को सुरक्षित रूप से पहुँचाने के लिए सर्विलांस ड्रोन भी तैनात किए गए हैं।
फील्ड अस्पताल को जल्द ही बहु-विशेषता केंद्र के रूप में विस्तारित किया जाएगा, जिसमें सर्जरी, आर्थोपेडिक्स, डेंटल केयर, एक्स-रे और कई ओपीडी सेवाएं उपलब्ध होंगी।
भारतीय सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स ने क्षतिग्रस्त पुलों को हटाने, बेली ब्रिज के घटकों के परिवहन और सड़क संपर्क बहाल करने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को तेज किया है। इसके अलावा, पेयजल आपूर्ति को बहाल करने, संचार लाइनों को दुरुस्त करने और जरूरी अधिरचना को फिर से खड़ा करने में भी सेना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।