ट्रंप ने ईरान पर हमले का निर्णय टाला, समयसीमा से 90 मिनट पहले लिया फैसला
सारांश
Key Takeaways
- ट्रंप ने ईरान पर हमले को टाला।
- समयसीमा से 90 मिनट पहले लिया गया निर्णय।
- ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर सहमति देनी होगी।
- पाकिस्तान की मध्यस्थता से वार्ता का सकारात्मक प्रभाव।
- भारत की अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव।
वाशिंगटन, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव को अभी के लिए टालने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित हमलों को दो सप्ताह के लिए रोका जाएगा, यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमत होता है। इस फैसले से विश्वभर में लोगों को बड़ी राहत मिली है।
यह महत्वपूर्ण निर्णय उस समय लिया गया जब ट्रंप द्वारा निर्धारित रात 8 बजे (ईएसटी) की समयसीमा में मात्र 90 मिनट का समय शेष था। इस दौरान पाकिस्तान की मध्यस्थता से गुप्त वार्ताएं हुईं।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर साझा किया कि यदि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खोलने के लिए सहमत होता है, तो अमेरिका अगले दो हफ्तों तक हमले रोक देगा। उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान के साथ वार्ता के बाद एक प्रकार का “दोनों पक्षों का युद्धविराम” संभव हुआ है।
ट्रंप के अनुसार, अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को पहले ही हासिल कर चुका है और ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति के लिए एक समझौते की दिशा में काफी प्रगति कर चुका है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को ईरान की तरफ से 10 बिंदुओं का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, जिस पर आगे बातचीत की जा सकती है। ट्रंप ने यह दावा किया कि जिन मुद्दों पर पहले मतभेद थे, उनमें से अधिकांश पर सहमति बन चुकी है। इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए दो हफ्तों का समय दिया गया है।
हालांकि, यह युद्धविराम पूरी तरह से सुनिश्चित नहीं है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह केवल तभी लागू होगा जब ईरान तुरंत और सुरक्षित तरीके से होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने पर सहमत होगा।
ईरान ने भी इस पर प्रारंभिक सहमति के संकेत दिए हैं। विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि यदि ईरान पर हमले समाप्त होते हैं, तो उनकी सेना भी अपनी कार्रवाइयों को रोक देगी। उन्होंने बताया कि अगले दो हफ्तों के दौरान ईरान की सेना के साथ समन्वय स्थापित कर और तकनीकी सीमाओं का ध्यान रखते हुए इस समुद्री मार्ग से सुरक्षित आवाजाही संभव होगी।
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, इजरायल ने भी इस दो हफ्तों के विराम पर सहमति जताई है, हालाँकि इस पर पूरी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है। इस घोषणा से पहले, हालात काफी तनावपूर्ण थे। ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो “आज रात एक पूरी सभ्यता समाप्त हो सकती है।”
होर्मुज जलडमरूमध्य इस संकट का केंद्र बना हुआ है। इसके बंद होने से तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है और कीमतें बढ़ गई हैं। संयुक्त राष्ट्र में बहरीन के नेतृत्व में इस मार्ग को खोलने का प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन रूस और चीन ने उसे वीटो कर दिया।
व्हाइट हाउस ने कहा कि बातचीत जारी रह सकती है, लेकिन इस पर जोर दिया गया कि "जब तक राष्ट्रपति या व्हाइट हाउस की तरफ से कोई घोषणा नहीं की जाती, तब तक कुछ भी अंतिम नहीं है।"
हालांकि, इस घोषणा के बाद भी खाड़ी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों की रिपोर्ट आई हैं, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि युद्धविराम कैसे लागू होगा। फिलहाल, यह दो हफ्तों का समय बातचीत के लिए एक सीमित अवसर प्रदान करता है। अभी भी प्रतिबंधों, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण जैसे मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।
यह संघर्ष पिछले कुछ हफ्तों से जारी है, जिसमें अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ठिकानों पर हमले किए हैं। इससे पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध का खतरा बढ़ गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से विश्व के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है।
भारत के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह खाड़ी क्षेत्र से आने वाले तेल पर काफी निर्भर है। ऐसे में इस मार्ग में कोई भी रुकावट या तनाव भारत की अर्थव्यवस्था और रणनीतिक हितों को सीधे प्रभावित कर सकता है।