ट्रंप का स्वीकार: ईरान युद्ध से तेल महंगा हुआ, पर परमाणु हथियार रोकना था ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 24 अक्टूबर 2026 को स्वीकार किया कि ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष के कारण तेल की कीमतें बढ़ी हैं और इसका सीधा आर्थिक बोझ अमेरिकी परिवारों पर पड़ा है। हालाँकि, उन्होंने इसे 'ज़रूरी कीमत' करार देते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता थी।
इंटरव्यू में ट्रंप के मुख्य बयान
फ्लोरिडा के टेलीविज़न चैनल विंक-टीवी को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि सैन्य कार्रवाई का फैसला लेते वक्त उन्हें भली-भाँति पता था कि ऊर्जा की कीमतें चढ़ेंगी। उन्होंने कहा, 'ईरान जैसे बहुत बुरे देश से परमाणु हथियार छीनने के लिए यह एक छोटी सी कीमत है।' चैनल की एंकर क्लेयर गैल्ट ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम फ्लोरिडा में पेट्रोल की औसत कीमत 4.18 डॉलर प्रति गैलन तक जा पहुँची है।
ट्रंप ने माना कि बीफ की कीमतें अभी भी ऊँची हैं, पर दावा किया कि वे धीरे-धीरे नीचे आ रही हैं। उन्होंने जोड़ा कि पशुपालन और उत्पादन की प्रक्रिया में समय लगता है, इसलिए कीमतें सामान्य होने में थोड़ा वक्त लगेगा।
मिडटर्म चुनावों की पृष्ठभूमि
यह बयान ऐसे समय में आया है जब 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों की तैयारियाँ ज़ोरों पर हैं। बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत अमेरिकी मतदाताओं के लिए एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस पर अपनी पकड़ बनाए रखने की जद्दोजहद में है। गौरतलब है कि महंगाई के आँकड़े चुनावी नतीजों को प्रभावित करने वाले सबसे अहम कारकों में गिने जाते हैं।
फोर्ट मायर्स में एक रिपब्लिकन चुनावी रैली के दौरान भी ट्रंप ने इस मुद्दे का उल्लेख करते हुए बताया कि सैन्य अभियान शुरू होने से पहले उन्होंने आयोवा में पेट्रोल की कीमतें 1.85 डॉलर से 1.95 डॉलर प्रति गैलन तक देखी थीं। इसके बाद उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को साफ निर्देश दिया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना सबसे बड़ी राष्ट्रीय प्राथमिकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर दावा
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि युद्ध के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल की आवाजाही पहले की तुलना में बढ़ी है। उन्होंने कहा, 'होर्मुज स्ट्रेट से बहुत बड़ी मात्रा में तेल गुजर रहा है। हैरानी की बात यह है कि युद्ध से पहले के मुकाबले अब ज़्यादा तेल वहाँ से आ रहा है।' उनके अनुसार, इलाके में अमेरिकी नौसेना और सैन्य बलों की सक्रियता के चलते यह संभव हो पाया है। हालाँकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल शिपमेंट बढ़ने के इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
युद्ध समाप्ति पर अनिश्चितता
ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने की कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी, लेकिन आशावादी स्वर में कहा, 'मुझे लगता है कि यह जल्द खत्म होगा — किसी समझौते के ज़रिए या किसी और तरीके से, लेकिन यह खत्म होगा।' इस बयान से यह संकेत भी मिलता है कि कूटनीतिक वार्ता के अलावा आगे और सैन्य कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।
ट्रंप प्रशासन अमेरिकी नागरिकों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश में जुटा है कि युद्ध के आर्थिक प्रभाव दीर्घकालिक नहीं रहेंगे और पेट्रोल की कीमतें शीघ्र ही नीचे आएँगी। आने वाले हफ्तों में मिडटर्म चुनाव इस दावे की असली परीक्षा लेंगे।