क्या ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' में 25 देश शामिल हुए हैं, किन देशों ने ठुकराया राष्ट्रपति का न्योता?

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क्या ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' में 25 देश शामिल हुए हैं, किन देशों ने ठुकराया राष्ट्रपति का न्योता?

सारांश

क्या आप जानते हैं कि ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' में कौन से 25 देश शामिल हुए हैं? जानिए किन देशों ने राष्ट्रपति ट्रंप का न्योता स्वीकार और किन्हें ठुकराया। यह जानकारी जानना आपके लिए बेहद रोचक हो सकता है।

Key Takeaways

  • बोर्ड ऑफ पीस में 25 देशों ने ट्रंप का न्योता स्वीकार किया।
  • रूस ने कुछ शर्तों के साथ बोर्ड में शामिल होने का प्रस्ताव रखा है।
  • भारत ने अभी तक इस मामले पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
  • बोर्ड का कार्यकाल तीन साल है।
  • स्थायी सदस्यता के लिए 1 बिलियन डॉलर का भुगतान आवश्यक है।

नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वैश्विक राजनीति के क्षेत्र में इस समय कई महत्वपूर्ण मुद्दे चर्चा में हैं। वेनेजुएला, ग्रीनलैंड, रूस-यूक्रेन युद्ध और गाजा सीजफायर जैसे विषय आज के सियासी परिदृश्य को प्रभावित कर रहे हैं। विश्व में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस की स्थापना की है। इस बोर्ड में शामिल होने के लिए ट्रंप ने लगभग 60 देशों को आमंत्रित किया था। आइए जानते हैं कि किन देशों ने ट्रंप के इस आमंत्रण को स्वीकार किया और किन्हें ठुकराया।

इजरायली मीडिया के अनुसार, 60 में से 25 देशों ने ट्रंप के न्योते को स्वीकार किया है। इस बोर्ड में शामिल देशों में इजरायल, बहरीन, मोरक्को, अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, बुल्गारिया, हंगरी, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कोसोवो, पाकिस्तान, पराग्वे, कतर, सऊदी अरब, तुर्किए, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान, बेलारूस, मिस्र, वियतनाम और मंगोलिया शामिल हैं।

हालाँकि, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि वे काउंसिल को फंड देने के लिए पश्चिम में स्थित अपनी संपत्तियों से 1 बिलियन डॉलर देने को तैयार हैं, बशर्ते कि वे फिलिस्तीनी लोगों की समस्याओं और गाजा में मौजूदा मानवीय संकटों को हल करने में मदद करें।

आठ इस्लामिक देशों ने भी बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्योता स्वीकार किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी गाजा में इजरायल-हमास सीजफायर समझौते के तहत घोषित बोर्ड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। लेकिन भारत की ओर से अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस पर विचार चल रहा है।

इससे पहले, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन, जर्मनी, स्वीडन, नार्वे जैसे कई प्रमुख देशों ने इस साइनिंग सेरेमनी में हिस्सा नहीं लिया। इसके साथ ही जर्मनी, इटली, पैराग्वे, रूस, स्लोवेनिया, तुर्किए और यूक्रेन जैसे कई देशों ने इस न्योते पर कोई वादा नहीं किया है।

हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की दावोस में ट्रंप से मुलाकात करने वाले हैं। जेलेंस्की ट्रंप से मुलाकात के लिए दावोस पहुंच चुके हैं।

बोर्ड में शामिल सदस्य देशों के कार्यकाल की अवधि तीन साल तक होगी, और स्थायी सदस्यता प्राप्त करने के लिए 1 बिलियन डॉलर का भुगतान करना होगा।

Point of View

ट्रंप का 'बोर्ड ऑफ पीस' वैश्विक शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, जिन देशों ने न्योता ठुकराया है, उनका दृष्टिकोण भी विचारणीय है। यह देखना होगा कि क्या यह पहल वास्तविकता में शांति स्थापित करने में मददगार साबित होगी।
NationPress
22/01/2026

Frequently Asked Questions

बोर्ड ऑफ पीस का उद्देश्य क्या है?
बोर्ड ऑफ पीस का मुख्य उद्देश्य वैश्विक शांति को बढ़ावा देना है।
किन देशों ने ट्रंप का न्योता स्वीकार किया?
इजरायल, बहरीन, मोरक्को, अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, और अन्य 25 देशों ने न्योता स्वीकार किया है।
भारत ने इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता स्वीकार किया है?
भारत ने अभी तक इस न्योते पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
रूस ने बोर्ड में शामिल होने का न्योता क्यों ठुकराया?
रूस ने फिलिस्तीनी मुद्दों को हल करने की शर्त पर अपनी संपत्तियों से 1 बिलियन डॉलर देने का प्रस्ताव रखा है।
बोर्ड में शामिल होने के लिए क्या शर्तें हैं?
बोर्ड में शामिल होने के लिए 1 बिलियन डॉलर का भुगतान करना होगा।
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