आंध्र प्रदेश सरकार और एनआरएससी का समझौता: बिजली गिरने से मौतों में कमी लाने की दिशा में एक कदम
सारांश
Key Takeaways
- आंध्र प्रदेश सरकार ने एनआरएससी के साथ समझौता किया है।
- बिजली गिरने से होने वाली मौतों को कम करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
- प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को बेहतर बनाया जाएगा।
- हॉटस्पॉट क्षेत्रों की पहचान की जाएगी।
- यह कदम आपदा प्रबंधन को सुदृढ़ करेगा।
अमरावती, १५ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी) और आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एपीएसडीएमए) ने बुधवार को राज्य में आकाशीय बिजली गिरने से होने वाली मौतों की संख्या को कम करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाना और समुदाय को बेहतर तरीके से तैयार करना है, ताकि आंध्र प्रदेश में बिजली गिरने से होने वाली मौतिकाओं को कम किया जा सके।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस समझौते के तहत दोनों संगठन राज्य में बिजली गिरने के 'हॉटस्पॉट' क्षेत्रों की पहचान करेंगे और विस्तृत जोखिम आकलन करेंगे। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां व्यावहारिक रोकथाम की रणनीतियाँ विकसित की जाएंगी और राज्य में सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ किया जाएगा।
इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को और बेहतर बनाया जाएगा, ताकि नागरिकों को बिजली गिरने से पहले समय पर और सटीक जानकारी मिल सके।
इस समझौते पर एपीएसडीएमए के प्रबंध निदेशक प्रखर जैन और एनआरएससी की उपनिदेशक डॉ. अपर्णा ने हस्ताक्षर किए।
प्रखर जैन ने कहा कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के निर्देशों के अनुसार, राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली गिरने से होने वाली मौतों को धीरे-धीरे कम करने के लिए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
उन्होंने बताया कि इस उद्देश्य के लिए बुधवार को एपीएसडीएमए कार्यालय में एनआरएससी और एपीएसडीएमए के बीच समझौता किया गया। इस एमओयू का मुख्य लक्ष्य राज्य सरकार को बिजली गिरने से होने वाली जान-माल की हानि को कम करने में सहायता प्रदान करना है।
इस कार्यक्रम में एपीएसडीएमए की कार्यकारी निदेशक के. कौसर बानो, एनआरएससी के वैज्ञानिक मुव्वा वेंकट रमण, आलोक तोरी, सत्यनारायण, और वेंकटेश सहित कई आपदा प्रबंधन अधिकारी उपस्थित थे।
पिछले सप्ताह हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि नवीनतम तकनीक का उपयोग करके लोगों को पहले से अलर्ट किया जाए और बिजली गिरने से होने वाली मौतों को रोका जाए।
उन्होंने कहा था कि अलर्ट केवल मोबाइल संदेशों तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि फील्ड स्तर के कर्मचारियों को भी सक्रिय किया जाए और नेटवर्क आधारित प्रणाली के माध्यम से विशेष टावर क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को संभावित खतरे की जानकारी दी जाए।