क्या आर्मी डे परेड से पहले सेना ने लद्दाख में ग्रीन हाइड्रोजन माइक्रोग्रिड स्थापित किया?
सारांश
Key Takeaways
- भारत की स्वच्छ ऊर्जा की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- दुर्गम क्षेत्रों में हरित ऊर्जा का उपयोग।
- प्रति वर्ष 1,500 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी।
लद्दाख, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। देश में सेना दिवस परेड की तैयारियां जोरों पर हैं। परेड में अब केवल 5 दिन शेष हैं। इससे पहले, भारतीय सेना ने लद्दाख के चुशुल क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त की है। यहां दुनिया की सबसे ऊंचाई पर ग्रीन हाइड्रोजन माइक्रोग्रिड परियोजना की स्थापना की गई है।
यह परियोजना, कठिन और दुर्गम परिस्थितियों में स्वच्छ ऊर्जा के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का विकास एनटीपीसी के सहयोग से किया गया है।
यह जानकारी भारतीय सेना की अतिरिक्त महानिदेशालय जन सूचना विभाग के आधिकारिक 'एक्स' पोस्ट के माध्यम से साझा की गई है।
इस ग्रीन हाइड्रोजन माइक्रोग्रिड के जरिए चुशुल में तैनात सैनिकों को 24 घंटे निर्बाध हरित बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। इससे पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा।
अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना से हर साल लगभग 1,500 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। -40 डिग्री सेल्सियस तक की भीषण ठंड, तेज हवाओं और कम ऑक्सीजन वाली कठिन परिस्थितियों में भी यह सिस्टम बिना रुकावट काम करेगा।
यह पहल भारतीय सेना की स्थिरता, सहनशक्ति और आत्मनिर्भरता के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। अत्यधिक ठंड, ऊंचाई और सीमित संसाधनों वाले क्षेत्र में ग्रीन एनर्जी का उपयोग सेना के लिए एक बड़ी तकनीकी और रणनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है।
आर्मी डे परेड 2026 से पहले सामने आई यह पहल न केवल सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि भारत सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में भी हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के मार्ग पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।