एस्ट्रोनॉट्स ने चांद का चक्कर लगाकर 7,000 से अधिक तस्वीरें संग्रहीत कीं, जानिए कपोला मॉड्यूल की विशेषताएँ
सारांश
Key Takeaways
- आर्टेमिस II मिशन ने 6,94,481 मील की यात्रा की।
- एस्ट्रोनॉट्स ने 7,000 से अधिक तस्वीरें लीं।
- कपोला मॉड्यूल ने अद्भुत दृश्य प्रदान किए।
- यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर मानव लैंडिंग के लिए एक कदम है।
- स्पेस से संबंधित गतिविधियों के लिए कपोला का महत्वपूर्ण योगदान है।
नई दिल्ली, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के आर्टेमिस II मिशन के दल ने कुल 6,94,481 मील की यात्रा कर पृथ्वी से 2,52,756 मील दूर पहुँचकर 1970 के अपोलो 13 मिशन का रिकॉर्ड तोड़ दिया। करीब 10 दिनों की इस यात्रा के बाद चारों एस्ट्रोनॉट्स ने शुक्रवार को प्रशांत महासागर के सैन डिएगो तट के पास ओरियन से सुरक्षित उतरकर एक नई उपलब्धि हासिल की।
उतरने के बाद, नासा और अमेरिकी सेना की संयुक्त टीम ने उनका स्वागत किया। टीम ने उन्हें ओरियन स्पेसक्राफ्ट से बाहर निकालकर हेलीकॉप्टर से यूएसएस जॉन पी. मुर्था जहाज पर पहुँचाया। प्रारंभिक चिकित्सा जांच के बाद चालक दल के सदस्य ह्यूस्टन के जॉनसन स्पेस सेंटर लौटेंगे। यह मिशन चंद्रमा पर भविष्य में मानव लैंडिंग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। कपोला मॉड्यूल ने अंतरिक्ष यात्रियों को अद्भुत दृश्य प्रदान करके इस मिशन को और भी यादगार बना दिया।
स्पेस से संबंधित मिशनों में कपोला का एक महत्वपूर्ण योगदान होता है। कपोला अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर स्थित एक छोटा लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण मॉड्यूल है। इसे स्टेशन के बाहर होने वाली गतिविधियों को देखने के लिए खास तौर पर डिज़ाइन किया गया है। आर्टेमिस II मिशन के दौरान, अंतरिक्ष यात्री इसी कपोला से चंद्रमा और पृथ्वी के अद्भुत दृश्य देख रहे थे।
कपोला मॉड्यूल में कुल सात खिड़कियाँ होती हैं- छह किनारों पर और एक सीधे नीचे की ओर देखने वाली। इन खिड़कियों से पृथ्वी और खगोलीय पिंडों के दृश्य दिखाई देते हैं। खिड़कियों पर लगे शटर उन्हें गंदगी, ऑर्बिटल मलबे या छोटे उल्कापिंडों से सुरक्षित रखते हैं। कपोला में एक रोबोटिक वर्कस्टेशन भी है, जिससे अंतरिक्ष यात्री रोबोटिक आर्म को नियंत्रित कर सकते हैं। इससे वे अंतरिक्ष यानों को पकड़ने, जोड़ने और स्टेशन पर विभिन्न कार्य करने में सहायता लेते हैं।
कपोला का मुख्य उपयोग पृथ्वी का अवलोकन, स्पेसवॉक देखना और अंतरिक्ष यानों के आगमन-प्रस्थान की निगरानी के लिए भी किया जाता है। यहाँ से चालक दल के सदस्य अक्सर अपने कैमरे से पृथ्वी के विभिन्न स्थानों की तस्वीरें लेते हैं। यह मॉड्यूल स्टेशन का सबसे पसंदीदा हिस्सा माना जाता है क्योंकि यहाँ से पृथ्वी एक बड़े पैनल की तरह दिखाई देती है।
आर्टेमिस II मिशन में नासा के रीड वाइजमैन (कमांडर), विक्टर ग्लोवर (पायलट), क्रिस्टीना कोच और कनाडाई स्पेस एजेंसी के जेरेमी हैनसेन शामिल थे। यह मिशन 1 अप्रैल को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से नासा के एसएलएस रॉकेट द्वारा लॉन्च किया गया। लॉन्च के समय रॉकेट ने 8.8 मिलियन पाउंड का थ्रस्ट दिया और ओरियन अंतरिक्ष यान को सटीक कक्षा में स्थापित किया। इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा के निकट से गुजरते हुए उसकी सतह की 7,000 से अधिक तस्वीरें लीं।
उन्होंने एक अद्भुत सूर्य ग्रहण का भी नजारा देखा, जिसमें चंद्रमा ने सूर्य को ढक लिया था। इन तस्वीरों में अर्थराइज-अर्थसेट, चंद्रमा पर उल्कापिंडों के गड्ढे, प्राचीन लावा प्रवाह, मिल्की वे गैलेक्सी और चंद्रमा की सतह पर दरारें व रंगों की भिन्नताएं स्पष्ट रूप से दिखाई दीं।