असम में नवंबर 2026 में होंगे सोनोवाल कचारी स्वायत्त परिषद चुनाव, बिना पार्टी चिह्न के होगा मुकाबला
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 25 सितंबर 2026 को गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि सोनोवाल कचारी स्वायत्त परिषद (SKAC) के चुनाव नवंबर 2026 में कराए जाएंगे और ये चुनाव बिना किसी राजनीतिक दल के आधिकारिक चुनाव चिह्न के आयोजित होंगे। असम कैबिनेट ने गुरुवार को ही मिसिंग स्वायत्त परिषद और सोनोवाल कचारी स्वायत्त परिषद, दोनों के चुनाव नवंबर में कराने के इस फैसले को मंजूरी दी थी।
चुनाव प्रक्रिया और नियम
मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि राजनीतिक दलों के समर्थन वाले उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतर सकते हैं, लेकिन चुनाव आयोग उन्हें पार्टी के आधिकारिक चुनाव चिह्न के बजाय अलग चुनाव चिह्न आवंटित करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने उम्मीदवार उतारेगी, परंतु वे औपचारिक रूप से पार्टी के चुनाव चिह्न का उपयोग नहीं करेंगे।
सरमा के अनुसार, BJP ने इसी तरह की व्यवस्था पंचायत चुनावों में भी अपनाई थी, जहाँ चुनाव बिना पार्टी के चुनाव चिह्न के आयोजित किए गए थे। उन्होंने कहा कि इसका मूल उद्देश्य जमीनी स्तर पर मतदाताओं और समुदायों को राजनीतिक दलों के आधार पर विभाजित होने से रोकना है।
BJP के वरिष्ठ नेता रहेंगे प्रचार से दूर
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि BJP के वरिष्ठ नेता — जिनमें विधायक, मंत्री और अन्य निर्वाचित प्रतिनिधि शामिल हैं — इन चुनावों के प्रचार से दूर रहेंगे। हालाँकि, पार्टी के सामान्य कार्यकर्ता चुनाव नियमों के दायरे में प्रचार और अन्य गतिविधियों में हिस्सा ले सकेंगे।
यह कदम इस दृष्टि से उल्लेखनीय है कि स्वायत्त परिषद चुनावों को स्थानीय और सामुदायिक मुद्दों पर केंद्रित रखने की कोशिश की जा रही है, ताकि ये चुनाव दलीय राजनीति की सीधी लड़ाई में न बदल जाएँ।
विपक्षी दलों की तैयारियाँ
असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सोनोवाल कचारी स्वायत्त परिषद चुनाव के लिए 50 सदस्यीय समन्वय समिति का गठन कर दिया है। इस समिति में डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, धेमाजी, जोरहाट, गोलाघाट, शिवसागर और लखीमपुर सहित कई जिलों को शामिल किया गया है।
असम गण परिषद (AGP) ने भी तैयारियाँ तेज कर दी हैं और कहा है कि वह स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी। इस तरह तीन प्रमुख राजनीतिक ताकतों के बीच मुकाबला होने के आसार हैं।
सोनोवाल कचारी स्वायत्त परिषद की पृष्ठभूमि
सोनोवाल कचारी स्वायत्त परिषद असम की वैधानिक स्वायत्त परिषदों में से एक है, जिसका गठन संबंधित अनुसूचित जनजाति समुदाय के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। यह परिषद असम के उस संवैधानिक ढाँचे का हिस्सा है जो आदिवासी और जनजातीय समुदायों को स्थानीय स्वशासन का अधिकार देती है।
गौरतलब है कि इन परिषदों के चुनाव लंबे अंतराल के बाद कराए जा रहे हैं, जो इन समुदायों के लिए शासन और विकास के नजरिए से महत्त्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
आगे क्या होगा
नवंबर 2026 में होने वाले इन चुनावों की तैयारियाँ अब तेज हो गई हैं। चुनाव आयोग द्वारा शीघ्र ही आधिकारिक कार्यक्रम की घोषणा अपेक्षित है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिना पार्टी चिह्न की यह व्यवस्था स्थानीय नेताओं को अधिक स्वायत्तता देगी, लेकिन साथ ही बड़ी पार्टियों के प्रभाव को कितना सीमित कर पाएगी, यह चुनाव परिणाम ही बताएँगे।