10 अगस्त 2026
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बच्चू कडू की शिवसेना में वापसी, अमरावती में आतिशबाजी और मिठाइयों से हुआ स्वागत

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बच्चू कडू की शिवसेना में वापसी, अमरावती में आतिशबाजी और मिठाइयों से हुआ स्वागत

सारांश

विदर्भ के फायरब्रांड नेता बच्चू कडू की शिवसेना में वापसी महज एक पार्टी-बदलाव नहीं — यह किसानों, विधवाओं और दिव्यांगों के मुद्दों पर शर्तों के साथ की गई राजनीतिक घर-वापसी है। शिंदे गुट ने उनकी सभी माँगें मानीं, जो बताता है कि विदर्भ में पार्टी को कडू की कितनी ज़रूरत थी।

मुख्य बातें

बच्चू कडू ने 30 अप्रैल 2025 को मुंबई में एकनाथ शिंदे की उपस्थिति में शिवसेना की सदस्यता ग्रहण की।
कडू ने कहा कि शिंदे गुट ने उनकी सभी शर्तें मान लीं — किसानों के लिए समर्थन मूल्य सुधार, विधवा महिलाओं के मुद्दे और दिव्यांग मंत्रालय को मजबूत करना।
प्रहार जनशक्ति पार्टी सामाजिक कार्यों के लिए सक्रिय रहेगी, लेकिन राजनीतिक रूप से कार्यकर्ता अब शिवसेना के बैनर तले काम करेंगे।
कडू ने कपास के समर्थन मूल्य पर असहमति के चलते पहले शिवसेना से इस्तीफा दिया था।
अमरावती में समर्थकों ने आतिशबाजी और मिठाइयाँ बाँटकर जश्न मनाया।

विदर्भ के फायरब्रांड नेता और प्रहार जनशक्ति पार्टी के पूर्व अध्यक्ष बच्चू कडू ने 30 अप्रैल 2025 को उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में औपचारिक रूप से प्रवेश किया। मुंबई में शिंदे की मौजूदगी में पार्टी का दामन थामने के तुरंत बाद अमरावती में उनके समर्थकों ने आतिशबाजी, पेड़े और मिठाइयाँ बाँटकर इस राजनीतिक वापसी का जोरदार स्वागत किया।

मुंबई में हुई औपचारिक घर-वापसी

बच्चू कडू ने मुंबई में एकनाथ शिंदे की उपस्थिति में शिवसेना की सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर कडू ने स्पष्ट किया कि उनकी राजनीतिक पारी की शुरुआत शिवसेना से हुई थी और अब वे शिंदे के नेतृत्व में ही अपनी राजनीतिक यात्रा जारी रखेंगे। उन्होंने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि किसानों और दिव्यांगों के लिए की गई शर्तें ज़मीन पर कितनी लागू होती हैं। कडू का राजनीतिक इतिहास बताता है कि वे मुद्दों पर समझौता करने वाले नेता नहीं हैं — यही उनकी ताकत भी है और शिंदे गुट के लिए एक संभावित चुनौती भी। विदर्भ में शिवसेना की जड़ें मजबूत करने के लिए यह कदम ज़रूरी था, परंतु प्रहार जनशक्ति पार्टी का सामाजिक ढाँचा बनाए रखने का निर्णय यह भी संकेत देता है कि कडू ने अपना स्वतंत्र जनाधार पूरी तरह नहीं छोड़ा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बच्चू कडू ने शिवसेना क्यों छोड़ी थी?
बच्चू कडू ने कपास के समर्थन मूल्य पर असहमति के चलते शिवसेना से इस्तीफा दिया था। किसानों के मुद्दों पर पार्टी के रुख से नाराज होकर उन्होंने प्रहार जनशक्ति पार्टी बनाई थी।
बच्चू कडू ने शिवसेना में वापसी की क्या शर्तें रखी थीं?
कडू ने किसानों के लिए उपज पर समर्थन मूल्य में सुधार, विधवा महिलाओं के मुद्दों का समाधान और दिव्यांग मंत्रालय को मजबूत करने की शर्तें रखी थीं। शिवसेना के शिंदे गुट ने इन सभी शर्तों को मान लिया, जिसके बाद कडू ने पार्टी में प्रवेश किया।
प्रहार जनशक्ति पार्टी का अब क्या होगा?
पार्टी नेता बल्लू जवंजाल के अनुसार, प्रहार जनशक्ति पार्टी सामाजिक कार्यों के लिए सक्रिय रहेगी। हालाँकि, राजनीतिक रूप से पार्टी के कार्यकर्ता अब शिवसेना के बैनर तले काम करेंगे।
बच्चू कडू की शिवसेना में वापसी का महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर होगा?
कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस प्रवेश से विदर्भ क्षेत्र में शिवसेना और मजबूत होगी। कडू का विदर्भ में किसानों और दलित-पिछड़े वर्गों में मजबूत जनाधार है, जो शिंदे गुट के लिए संगठनात्मक लाभ माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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