बंगाल में परिवर्तन की बयार, भाजपा की सरकार बनना तय: रोहन गुप्ता
सारांश
Key Takeaways
- रोहन गुप्ता का दावा है कि भाजपा की सरकार बनना तय है।
- चुनाव आयोग ने मतदान दो चरणों में कराने का निर्णय लिया।
- टीएमसी के तुष्टीकरण की राजनीति पर रोहन गुप्ता ने सवाल उठाए।
- भाजपा नक्सलवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन देती है।
- पश्चिम बंगाल के लोगों के विकास की आवश्यकता है।
कोलकाता, 1 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा के वरिष्ठ नेता रोहन गुप्ता ने पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में परिवर्तन की संभावना जताई है और दावा किया है कि इस बार राज्य में भाजपा की सरकार बनना सुनिश्चित है।
कोलकाता में राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए, रोहन गुप्ता ने कहा कि इस बार चुनाव आयोग ने मतदान को दो चरणों में आयोजित करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि पहले टीएमसी और वामपंथी दलों की हिंसा को देखते हुए, आयोग ने इसे काफी हद तक नियंत्रित कर लिया है। मुझे लगता है कि टीएमसी अब समझ चुकी है कि उन्हें इस बार भारी हार का सामना करना पड़ेगा।
रोहन गुप्ता ने कहा कि ममता बनर्जी और टीएमसी को यह पता चल गया है कि इस बार उनकी स्थिति बहुत कमजोर है। चुनाव हारने के बाद, उन्हें कुछ न कहने के लिए बहाना बनाने की आवश्यकता होगी। तुष्टीकरण की राजनीति इतनी बढ़ चुकी है कि सत्ता में बने रहने के लिए उनके पास केवल यही विकल्प है, जबकि लोगों के विकास का कोई ध्यान नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति ने पश्चिम बंगाल के लोगों के अधिकारों को प्रभावित किया है। बाबर के नाम पर मस्जिद की अनुमति ममता बनर्जी ने दी है। लोग विकास चाहते हैं, न कि तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले नेताओं की।
नक्सलवाद पर, रोहन गुप्ता ने कहा कि यह सरकार का सीधा सिद्धांत है, जो कहा गया है, उसे किया जाएगा। 2014 में पीएम मोदी ने कहा था कि हम 10 साल में भारत को नक्सल-मुक्त बना देंगे। उस समय कांग्रेस के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि नक्सलियों की समस्या आतंकवाद से भी बड़ी है, लेकिन वे कुछ नहीं कर पाए। जिस पार्टी ने 60 साल राज किया, वह कुछ नहीं कर सकी। भाजपा ने जो कहा, उसे करके दिखाया।
विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग द्वारा अधिकारियों के तबादले पर रोहन गुप्ता ने कहा कि यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। असम में भाजपा की सरकार है, वहां भी ऐसा ही किया गया। इसलिए, हर चीज को राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए। मैं फिर से कहता हूं कि हारने के बाद, वे कोई न कोई बहाना जरूर बनाएंगे। उन्हें लोकतंत्र पर भरोसा नहीं है और संविधान की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं।