क्या बेटियों के भविष्य को सुरक्षित रखना हमारा प्रथम धर्म है?
सारांश
Key Takeaways
- बेटियों का भविष्य सुरक्षित रखना हमारा प्राथमिक कर्तव्य है।
- महिलाओं की कहानियाँ जागरूकता फैलाने का एक साधन हैं।
- समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की आवश्यकता है।
- परिवारों को बेटियों के साथ संवाद बढ़ाने की आवश्यकता है।
- महिलाओं की सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है।
नई दिल्ली, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। 'लव जिहाद' से प्रभावित महिलाओं की कहानी पर आधारित एक कार्यक्रम में रविवार को विभिन्न स्थानों से आई महिलाओं ने अपने दर्द को बयां किया।
इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि आज विश्व हिन्दू परिषद द्वारा आयोजित ‘जिहाद पीड़ित बहनों की कहानी, उन्हीं की जुबानी’ कार्यक्रम में भाग लेकर उन साहसी बहनों के साथ संवाद किया, जिनका दर्द किसी भी संवेदनशील मन को झकझोर देता है।
सीएम रेखा गुप्ता के अनुसार इन बहनों ने बताया कि किस प्रकार 'लव जिहाद' की साजिशों ने उनके जीवन को बर्बाद करने का प्रयास किया और कैसे झूठी पहचान, धर्म परिवर्तन तथा मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न ने उन्हें ऐसी भयावह स्थितियों में पहुंचा दिया, जिनकी कल्पना भी असहज करती है।
उनकी कहानियाँ यह स्पष्ट करती हैं कि यह कट्टरपंथी सोच कितनी भयानक है। धर्मांतरण को नया रूप देने वालों का यह व्यवहार नफरत, विनाश, और महिलाओं पर अक्षम्य अत्याचार से भरा है। एक मां और बेटी होने के नाते, वे पीड़ित महिलाओं के दर्द को न केवल सुन रही हैं बल्कि इसे भीतर तक महसूस कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि इन साहसी बहनों की आवाज किसी चेतावनी से कम नहीं है। आपकी यह पहल हजारों बेटियों को जागरूक करेगी और उन्हें सतर्क रहने की शक्ति देगी।
कार्यक्रम में डॉ. अतिरा की पुस्तक का विमोचन भी किया गया। यह पुस्तक इन बहनों की सच्ची आपबीती का संग्रह है। इनके अनुभव हर माता-पिता और हर युवती के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होंगे।
उन्होंने कहा कि बेटियों के भविष्य को सुरक्षित रखना हमारा प्रथम धर्म है। विश्व हिन्दू परिषद के इस अभियान में हम हरसंभव सहायता और सहयोग देने के लिए सदैव प्रतिबद्ध हैं।
इस अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद के दिल्ली प्रांत अध्यक्ष कपिल खन्ना सहित अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने परिवारों और समाज से बेटियों के साथ संवाद बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बेटियों के दोस्त बनें ताकि वे बिना झिझक हर बात साझा कर सकें।
उन्होंने कहा कि सुरक्षित माहौल देना केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।