क्या अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में किसानों और छोटे उत्पादकों का हित प्राथमिकता है?

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क्या अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में किसानों और छोटे उत्पादकों का हित प्राथमिकता है?

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर ने हाल ही में भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के महत्व पर जोर दिया है। क्या यह वार्ता किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों की रक्षा कर पाएगी? जानें इस महत्वपूर्ण विषय पर उनकी राय और अमेरिकी राष्ट्रपति की नीतियों का प्रभाव।

मुख्य बातें

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता जारी है।
किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों की सुरक्षा प्राथमिकता है।
अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव भारतीय उत्पादों पर पड़ सकता है।
मुक्त व्यापार समझौतों के लिए राष्ट्रीय हितों की रक्षा जरूरी है।
भारत यूरोपीय संघ के साथ भी बातचीत कर रहा है।

नई दिल्ली, 23 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर ने शनिवार को कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता अभी भी जारी है, लेकिन हमारे सामने कुछ सीमाएं (रेड लाइन्स) हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर 27 अगस्त से एडिशनल 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने जा रहे हैं, यानी देश पर कुल 50 प्रतिशत लागू हो जाएगा।

'इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2025' में विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि अमेरिका के साथ बातचीत चल रही है।

उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा, "हमारी चिंता इस बात को लेकर है कि सीमाएं मुख्य रूप से हमारे किसानों और कुछ हद तक हमारे छोटे उत्पादकों के हित से जुड़ी हैं। हम, एक सरकार के रूप में, अपने किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम इस पर पूरी तरह दृढ़ हैं। इस पर समझौता नहीं किया जा सकता।"

विदेश मंत्री ने आगे कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दुनिया और यहां तक कि अपने देश के साथ भी व्यवहार करने का तरीका पारंपरिक रूढ़िवादी तरीके से बेहद अलग है।

इससे पहले, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसी कार्यक्रम में कहा था कि अन्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों के लिए व्यापार वार्ता में सरकार का दृष्टिकोण राष्ट्रीय हित और भारतीय उद्योग की प्राथमिकताओं द्वारा निर्देशित होगा।

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री ने शुक्रवार को कार्यक्रम में कहा, "मेरा हमेशा से एक स्पष्ट दृष्टिकोण रहा है। जब हम व्यापार समझौते करते हैं तो मुझे राष्ट्रीय हितों की रक्षा करनी होती है। अब हम आमतौर पर विभिन्न देशों के साथ बातचीत शुरू करने से पहले ही पूर्व-समझौते के साथ काम करते हैं। आप मेरी संवेदनशीलता का सम्मान करते हैं, मैं आपकी संवेदनशीलता का सम्मान करता हूं। दुनिया के हर देश में चिंता के कुछ क्षेत्र हैं।"

उन्होंने आगे कहा कि भारत यूरोपीय संघ के साथ नियमित रूप से बातचीत कर रहा है और तीन-चार व्यापार समझौतों पर बातचीत में तेजी ला रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, "यूरोपीय संघ के कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं, जो उनके लिए बेहद संवेदनशील हैं। हम उनका सम्मान करते हैं। जैसे वे हमारे क्षेत्र का सम्मान करते हैं। इसलिए, मुझे लगता है कि व्यापार के मोर्चे पर समझौता करना मुश्किल नहीं होगा।"

केंद्रीय मंत्री गोयल ने कहा कि अमेरिका के साथ भारत के संबंध बहुत महत्वपूर्ण हैं और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के नाते भारत में संभावनाओं की भरमार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें यह समझना होगा कि भारत के किसानों और छोटे उत्पादकों का हित हमेशा प्राथमिकता होनी चाहिए। अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि भारत की आर्थिक स्थिरता और विकास को नुकसान न पहुंचे।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाना और किसानों तथा छोटे उत्पादकों के हितों की रक्षा करना है।
अमेरिकी टैरिफ का भारतीय उत्पादों पर क्या असर होगा?
अमेरिकी टैरिफ बढ़ने से भारतीय उत्पादों की लागत बढ़ सकती है, जिससे किसानों और छोटे उत्पादकों को नुकसान हो सकता है।
भारत के लिए अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत के लिए अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका भारत का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है और इससे विकास के नए अवसर मिलते हैं।
राष्ट्र प्रेस