कृषि उत्पादन 2024-25 में 357 मिलियन टन: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने SKUAST में गिनाई उपलब्धियाँ
सारांश
Key Takeaways
- उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 28 अप्रैल को SKUAST जम्मू में राष्ट्रीय कृषि शिखर सम्मेलन को संबोधित किया।
- भारत का कृषि उत्पादन 2024-25 में 357 मिलियन टन रहा, जो 2023-24 से 25 मिलियन टन अधिक है।
- बागवानी उत्पादन 362 मिलियन टन दर्ज किया गया, उच्च मूल्य फसल विविधीकरण सहित।
- 25 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित; किसान ऋण सीमा ₹3 लाख से बढ़कर ₹5 लाख हुई।
- MSP पर दालों की खरीद में 7,350%25 और तिलहन में 1,500%25 वृद्धि (2013-14 से अब तक)।
- उच्च उत्पादकता बीज मिशन के लिए ₹100 करोड़ का फंड आवंटित।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को जम्मू स्थित शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST) में आयोजित राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का कृषि उत्पादन 2024-25 में 357 मिलियन टन तक पहुँच गया है, जो 2023-24 की तुलना में 25 मिलियन टन अधिक है। यह सम्मेलन 'सतत एवं जलवायु अनुकूल कृषि पारिस्थितिकी तंत्र: नवाचार एवं नीतिगत ढाँचा' विषय पर केंद्रित था।
मुख्य घटनाक्रम
उपराज्यपाल ने बताया कि 2024-25 में बागवानी उत्पादन 362 मिलियन टन रहा, जिसमें उच्च मूल्य वाली फसलों का विविधीकरण भी शामिल है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत जलवायु अनुकूल कृषि की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। सम्मेलन में वैज्ञानिकों, नवप्रवर्तकों और अन्य हितधारकों से एकजुट होकर सतत कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को रूपांतरित करने का आह्वान किया गया।
सरकार की उपलब्धियाँ
उपराज्यपाल सिन्हा ने कई महत्वपूर्ण कृषि नीतिगत उपलब्धियाँ गिनाईं। उन्होंने बताया कि भारत ने राष्ट्रव्यापी मृदा परीक्षण शुरू कर 25 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए हैं। किसानों के लिए ऋण सीमा ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी गई है। एक राष्ट्रीय मिशन के तहत उच्च उत्पादकता वाले बीजों के लिए ₹100 करोड़ का फंड आवंटित किया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि 2013-14 से अब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर दालों की खरीद में 7,350 प्रतिशत और तिलहन की खरीद में 1,500 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
जलवायु परिवर्तन की चुनौती
उपराज्यपाल ने स्वीकार किया कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव तीव्र होते जा रहे हैं और पिछले वर्ष विभिन्न राज्यों में भीषण मौसम की स्थिति देखी गई। उन्होंने कहा,