क्या भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई होगी? बसंत पंचमी पर नमाज पर रोक की मांग

Click to start listening
क्या भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई होगी? बसंत पंचमी पर नमाज पर रोक की मांग

सारांश

भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की मांग की गई है। क्या इस बार मामला सुलझ पाएगा? जानिए इस मामले की गहराई और इसके पीछे की धार्मिक व ऐतिहासिक पृष्ठभूमि।

Key Takeaways

  • भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की मांग की गई है।
  • हिंदू पक्ष ने पूजा और नमाज पर रोक की अपील की है।
  • भोजशाला का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है।
  • सुरक्षा व्यवस्था को लेकर याचिका में अनुरोध किया गया है।
  • विवाद का समाधान अदालत की सुनवाई पर निर्भर करेगा।

नई दिल्ली, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला विवाद के संदर्भ में, हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से सुनवाई की तात्कालिक मांग की है। बसंत पंचमी पर पूजा-अर्चना और नमाज पर रोक लगाने की मांग के साथ, हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने शीर्ष अदालत से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। इस पर गुरुवार को सुनवाई होगी।

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा दाखिल याचिका में कहा गया है कि 23 जनवरी को बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ रही है, जिससे टकराव की संभावना है।

याचिका में भोजशाला परिसर में नमाज पर रोक और केवल हिंदुओं को मां सरस्वती की पूजा करने की अनुमति देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि बसंत पंचमी के दिन भोजशाला परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और राज्य सरकार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।

याचिका में भोजशाला के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इस परिसर में मां वाग्देवी अर्थात सरस्वती का प्राचीन मंदिर है, जिसका निर्माण 11वीं सदी में परमार वंश के राजा भोज ने करवाया था। लंबे समय से यहां हिंदू नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं।

हिंदू पक्ष ने 7 अप्रैल 2003 को एएसआई द्वारा जारी आदेश का भी उल्लेख किया है, जिसमें हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन पूजा करने की अनुमति दी गई थी, जबकि मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी। हालाँकि, याचिका में कहा गया है कि एएसआई का यह आदेश उस स्थिति पर मौन है, जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती है।

याचिका में तर्क दिया गया है कि एएसआई के आदेश में इस प्रकार की परिस्थिति को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं, जिससे टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

यह स्थान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के तहत एक संरक्षित स्मारक है। हिंदुओं का दावा है कि यह 11वीं सदी में परमार राजा भोज द्वारा बनवाया गया देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित प्राचीन मंदिर है, जबकि मुसलमान इसे कमल मौला मस्जिद मानते हैं।

यह विवाद ऐतिहासिक दावों से जुड़ा हुआ है। हिंदुओं का कहना है कि यह ढांचा मध्ययुगीन आक्रमणों के दौरान कथित विनाश और धर्मांतरण से पहले वैदिक शिक्षा का केंद्र और सरस्वती मंदिर था, जबकि मुसलमान मौलाना कमालुद्दीन चिश्ती के नाम पर बनी मस्जिद में पूजा की निरंतरता बनाए रखने का दावा करते हैं।

Point of View

लेकिन हमें यह समझना होगा कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी जाने वाली सुनवाई का परिणाम सभी पक्षों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
NationPress
20/01/2026

Frequently Asked Questions

भोजशाला विवाद क्या है?
भोजशाला विवाद उस स्थल का विवाद है जहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच पूजा और नमाज को लेकर संघर्ष हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में कब सुनवाई होगी?
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई गुरुवार को होगी।
भोजशाला का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
भोजशाला का ऐतिहासिक महत्व मां वाग्देवी के मंदिर के रूप में है, जो 11वीं सदी में राजा भोज ने बनवाया था।
क्या सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी?
याचिका में अदालत से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।
क्या इस विवाद का समाधान संभव है?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद विवाद का समाधान संभव हो सकता है, लेकिन यह सभी पक्षों की सहमति पर निर्भर करेगा।
Nation Press