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क्या <b>भ्रामरी प्राणायाम</b> आंतरिक शांति का अचूक साधन है?

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क्या <b>भ्रामरी प्राणायाम</b> आंतरिक शांति का अचूक साधन है?

सारांश

आंतरिक शांति की खोज में भ्रामरी प्राणायाम एक प्रभावी उपाय है। यह तकनीक तनाव और माइग्रेन जैसी समस्याओं से राहत दिलाती है। जानें इसे कैसे करना है और इसके लाभ क्या हैं।

मुख्य बातें

भ्रामरी प्राणायाम मानसिक तनाव को कम करता है।
यह माइग्रेन और सिरदर्द से राहत देता है।
इससे नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है।
यह शरीर के रक्तचाप को नियंत्रित करता है।
नियमित अभ्यास से भावनात्मक संतुलन प्राप्त होता है।

नई दिल्ली, 17 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। अशांति के इस समय में शांति की खोज किसे नहीं होगी? आंतरिक शांति का महत्व अत्यधिक है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, भ्रामरी प्राणायाम एक सरल और प्रभावशाली तकनीक है, जो आंतरिक शांति प्रदान करती है और माइग्रेन जैसी समस्याओं से राहत दिलाती है। इसे ‘मधुमक्खी की गुनगुनाहट’ की सांस के रूप में जाना जाता है, जो मन और शरीर को शांत करने में सहायक है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, भ्रामरी प्राणायाम तनाव, चिंता और मानसिक अशांति को दूर करने का एक आसान उपाय है। मस्तिष्क में गूंजने वाली ध्वनि मन और तंत्रिका तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। यह चिंता, क्रोध और घबराहट को कम करने में सहायक है।

आयुष मंत्रालय भ्रामरी प्राणायाम करने का सही तरीका भी बताता है। इसके लिए एक शांत और हवादार स्थान चुनें। किसी भी आरामदायक ध्यान मुद्रा, जैसे सुखासन या पद्मासन में बैठें और आंखें बंद करें। नाक से गहरी सांस लें। इसके बाद, दोनों तर्जनी उंगलियों से आंखों को हल्के से दबाएं, मध्यमा उंगलियों को नाक के किनारों पर रखें, अनामिका उंगली ऊपरी होंठ के ऊपर और कनिष्ठा उंगली निचले होंठ के नीचे रखें। दोनों अंगूठों से कानों को बंद करें। इसे षण्मुखी मुद्रा कहा जाता है। अब, सांस छोड़ते समय मधुमक्खी की तरह गहरी गुनगुनाहट की ध्वनि निकालें और इस ध्वनि पर ध्यान केंद्रित करें। सांस छोड़ने के बाद हाथों को घुटनों पर लौटाएं। यह एक चक्र है। शुरुआत में पांच चक्र करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।

भ्रामरी प्राणायाम मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। गुनगुनाहट की ध्वनि मन को शांत करती है, जिससे चिंता, क्रोध और हाइपरएक्टिविटी कम होती है। यह माइग्रेन और सिरदर्द से राहत देती है, नींद की गुणवत्ता सुधारती है और तनाव कम करने में सहायक है। यह रक्तचाप को नियंत्रित करने, एकाग्रता बढ़ाने और मानसिक स्पष्टता प्रदान करने में भी मदद करती है। नियमित अभ्यास से भावनात्मक संतुलन और आंतरिक शांति प्राप्त होती है।

भ्रामरी प्राणायाम एक सरल और प्रभावशाली तकनीक है, जो आधुनिक जीवन की भागदौड़ में मन को शांति और शरीर को राहत देती है। इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर आप माइग्रेन और तनाव से छुटकारा पा सकते हैं। विशेषज्ञ भ्रामरी प्राणायाम करते समय कुछ सावधानियां बरतने की भी सलाह देते हैं। इसे खाली पेट या भोजन के कुछ घंटों बाद करें। कान या साइनस के गंभीर रोगों से पीड़ित लोग इसे न करें। गर्भवती महिलाएं और हृदय रोग से ग्रसित लोगों को सलाह लेने के बाद ही इसे करना चाहिए। गुनगुनाहट की ध्वनि को जबरदस्ती न बढ़ाएं, इसे सहज रखें। यदि चक्कर या असुविधा महसूस हो, तो अभ्यास रोक दें।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कहना उचित होगा कि भ्रामरी प्राणायाम जैसे प्राचीन उपाय आधुनिक जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह न केवल मानसिक स्वास्थ्य को सुधारता है, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भ्रामरी प्राणायाम कब करना चाहिए?
भ्रामरी प्राणायाम सुबह खाली पेट या भोजन के कुछ घंटों बाद किया जाना चाहिए।
क्या भ्रामरी प्राणायाम सभी के लिए सुरक्षित है?
नहीं, गर्भवती महिलाएं और हृदय रोग से ग्रसित लोगों को इसे करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
भ्रामरी प्राणायाम करने का सही तरीका क्या है?
शांत और हवादार जगह पर बैठकर गहरी सांस लें और मधुमक्खी की गुनगुनाहट की आवाज निकालें।
राष्ट्र प्रेस
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