बिहार चुनाव: हायाघाट में बाढ़, बेरोजगारी और बदलते समीकरणों के बीच क्या जनता का समर्थन किसी एक पार्टी को मिलेगा?

सारांश
Key Takeaways
- हायाघाट विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं।
- यहाँ की जनता बाढ़ और बेरोजगारी की समस्याओं का सामना कर रही है।
- हर चुनाव में एंटी-इंकम्बेंसी फैक्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- हायाघाट की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है।
- यहाँ के युवा बड़ी संख्या में महानगरों की ओर पलायन कर रहे हैं।
नई दिल्ली, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। बिहार चुनाव की गर्मी के बीच दरभंगा जिले की हायाघाट विधानसभा सीट पर राजनीतिक गतिविधियाँ तेजी से बढ़ी हैं। ग्रामीण परिवेश के कारण यहाँ की जनता का मूड और समीकरण हमेशा बदलता रहता है।
1967 में स्थापित इस सीट पर अब तक 14 चुनाव हो चुके हैं। हायाघाट प्रखंड और बहेरी प्रखंड की 18 ग्राम पंचायतों से मिलकर बनी यह सीट समस्तीपुर (अनुसूचित जाति) लोकसभा क्षेत्र में आती है।
भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र सड़क मार्ग से उत्तर-मध्य बिहार के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। दरभंगा जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित है। समस्तीपुर, रोसड़ा, मधुबनी और मुजफ्फरपुर जैसे बड़े केंद्र इसके निकट हैं, जबकि पटना से इसकी दूरी लगभग 175 किलोमीटर है। इसके बावजूद, औद्योगिक विकास के मामले में हायाघाट काफी पिछड़ा हुआ है।
यहाँ की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से कृषि और छोटे व्यापार पर निर्भर है। धान, गेहूं, मक्का और दलहन की खेती यहाँ प्रमुख है, लेकिन कमला और बागमती नदियों से आने वाली हर साल की बाढ़ लोगों की आजीविका और बुनियादी ढांचे को प्रभावित करती है। यही कारण है कि बाढ़ और सड़क संपर्क की समस्या हमेशा चुनावी मुद्दों में प्रमुखता से रहती है।
हायाघाट का चुनावी इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है। शुरुआती दौर में कांग्रेस ने लगातार तीन बार जीत हासिल की और बलेश्वर राम यहाँ के सबसे सफल उम्मीदवार रहे। इसके बाद राजनीति में बदलाव आया और राजद के हरिनंदन यादव ने दो बार जनता का विश्वास जीता।
2010 में अमरनाथ गामी ने भाजपा से जीत प्राप्त की और 2015 में जदयू से विधायक बने। दिलचस्प यह है कि अब तक कांग्रेस, जनता दल, भाजपा और निर्दलीय ने दो-दो बार इस सीट पर जीत दर्ज की है, जबकि जनता पार्टी और जदयू को एक-एक बार सफलता मिली है।
2020 में भाजपा के रामचंद्र प्रसाद ने राजद उम्मीदवार को हराकर सीट पर कब्जा जमाया। इससे पहले 2015 में महागठबंधन के टिकट पर जदयू के अमरनाथ गामी जीते थे। इन नतीजों से स्पष्ट है कि हायाघाट की जनता किसी एक दल को स्थायी समर्थन नहीं देती, बल्कि यहाँ हर चुनाव में एंटी-इंकम्बेंसी फैक्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
शिक्षा और रोजगार की खोज में हायाघाट के युवा बड़े पैमाने पर पटना, दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों की ओर पलायन कर रहे हैं। कृषि-आधारित उद्योगों और ग्रामीण उद्यमों में ठोस निवेश की कमी यहाँ की सबसे बड़ी चुनौती है। यह स्थिति भी चुनावी बहस में अक्सर सामने आती है।
चुनाव आयोग के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, हायाघाट विधानसभा क्षेत्र की कुल जनसंख्या 4,21,654 है, जिनमें 2,20,853 पुरुष और 2,00,801 महिलाएं शामिल हैं। इस सीट पर कुल 2,55,322 मतदाता पंजीकृत हैं, जिनमें 1,34,323 पुरुष, 1,20,995 महिलाएं और 4 थर्ड जेंडर मतदाता हैं।