11 अगस्त 2026
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क्या एसआईआर मामले में सम्राट चौधरी का विपक्ष पर तंज है, 'दिल्ली और पटना वाले राजकुमार को कुछ पता नहीं'?

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क्या एसआईआर मामले में सम्राट चौधरी का विपक्ष पर तंज है, 'दिल्ली और पटना वाले राजकुमार को कुछ पता नहीं'?

सारांश

बिहार में चुनाव से पहले मतदाता सूची पुनरीक्षण पर उठे विवाद में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर निशाना साधा है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद उन्होंने कहा कि कुछ राजकुमारों को इस मामले की सही जानकारी नहीं है। जानें इस मुद्दे की गहराई।

मुख्य बातें

बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण का मामला गरमाया हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को कुछ सुझाव दिए हैं।
सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर कटाक्ष किया है।
आवासीय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने वालों की संख्या बढ़ी है।
बिहार की चुनावी प्रक्रिया पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

पटना, 11 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में चुनाव से पहले मतदाता सूची पुनरीक्षण का मुद्दा काफी गरमाया हुआ है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में इस पर सुनवाई हुई। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष के रुख पर कटाक्ष करते हुए कहा कि दिल्ली और पटना के राजकुमार को कुछ भी जानकारी नहीं है।

बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर अदालत ने कहा कि निर्वाचन आयोग को आधार कार्ड, मतदाता फोटो पहचान पत्र और राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों को मान्यता देनी चाहिए। न्यायालय ने यह भी कहा कि 11 स्वीकृत दस्तावेजों की सूची पूरी नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर विपक्ष के कुछ नेता इसे अपनी जीत बता रहे हैं। सम्राट चौधरी ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने सलाह दी है, लेकिन जो लोग संविधान को दिखाते हैं, उन्हें यह नहीं पता है। निर्वाचन आयोग ने जो फॉर्म जारी किया है, उसमें पहले से ही आधार कार्ड और मोबाइल नंबर मांगे जा रहे हैं। माता-पिता और पत्नी का एपिक नंबर भी मांगा जा रहा है। जन्मतिथि की भी मांग की जा रही है, इसमें कोई नई बात नहीं है। निर्वाचन आयोग सभी से यही जानकारी मांग रहा है।"

विपक्ष की विजय की भावना पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, "जो जानता ही नहीं, उसके बारे में क्या चर्चा करना? 9 जुलाई को बिहार में 52 प्रतिशत लोगों ने फॉर्म भरा है, चार करोड़ से अधिक लोगों ने इसे जमा किया है, लेकिन विपक्ष को इसकी जानकारी नहीं है। वे केवल राजकुमार हैं, एक दिल्ली वाला और एक पटना वाला, और कुछ नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को जोड़ने की सलाह दी है, लेकिन विपक्ष को यह नहीं पता कि यह पहले से ही जुड़ा हुआ है।"

उन्होंने आगे बताया, "पिछले 8 दिनों में पूर्णिया और किशनगंज में 10 गुना अधिक लोगों ने आवासीय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया है, जिसकी राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग जांच कर रहे हैं। अचानक इतने सारे लोग आवासीय प्रमाण पत्र के लिए क्यों आए? क्या वे बांग्लादेशी तो नहीं हैं? इसकी जांच की जाएगी।"

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें यह समझना होगा कि बिहार में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची का पुनरीक्षण बहुत महत्वपूर्ण है। यह लोकतंत्र की नींव है और सभी राजनीतिक दलों को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मतदाता सूची पुनरीक्षण का क्या महत्व है?
मतदाता सूची पुनरीक्षण यह सुनिश्चित करता है कि सभी योग्य मतदाता सही तरीके से पंजीकृत हों और चुनाव में भाग ले सकें।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का विपक्ष पर क्या असर होगा?
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियाँ विपक्ष की रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि वे इसे कैसे भुनाते हैं।
क्या बिहार में चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी है?
बिहार में चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन सुधार की आवश्यकता है।
राष्ट्र प्रेस
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